काले अंग्रेजो ने राष्ट्रवाद की सही पहचान करा दी

2014 इलेक्शन में मोदी जी की जीत में राष्ट्रवाद नाम की चिड़िया का बड़ा योगदान था। इस राष्ट्रवाद में पाकिस्तान से दस सर,काला धन,विश्व गुरु जैसे मुद्दे रहे लेकिन सत्ता में आते ही उस राष्ट्रवाद का हस्तांतरण भारत माता की जय,कुछेक लोगों को पाकिस्तान भेजने जैसे मुद्दे तक सिमट कर रह गए पर इससे एक चीज जरूर हुई है कि हममें से कुछेक को यह भ्रम था कि राष्ट्रवाद का मतलब सिर्फ भारत जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद,चीन मुर्दाबाद के नारे लगाना होता है ।

लेकिन इस नई सरकार ने कुछ बुद्धिजीवियों को एहसास कराया है कि राष्ट्रवाद का अर्थ होता है अपने राष्ट्र के प्रति नैतिक और निष्ठावान होना। राष्ट्रप्रेम का अर्थ होता है कि जो तकलीफ हमारे राष्ट्र के जनमानस को है हम उसे अपना कष्ट समझ कर उसका निराकरण करे भले ही इस सरकार की यह मंशा न रही हो पर ये हुआ जरूर है जिस तरह अंग्रेजो ने न चाहते हुए भी अपनी प्रशासनिक जरूरतों के लिए कॉलेज खुलवाए और रेल चलवाये और इसका फायदा भारतीयों को इस रूप में हुआ की उन्हें दुनिया के अन्य क्षेत्रों से जुड़ने का न सिर्फ मौका मिला बल्कि वे उनके विचारों को जान पाए और तब जाकर उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी हुई ।

इसी तरह इस सरकार ने जो ये राष्ट्रवाद का मुद्दा खड़ा किए इनके सोच के उलट इस मुद्दे ने इस देश को कुछ सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं जो दूरगामी असर डालेंगे।