क्या हृतिक की यह प्रयोग बॉक्स आफिस पर सफल होगी?

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निर्माणाधीन बायोपिक फ़िल्म ‘सुपर 30’ की फर्स्ट लुक जारी हो चुका है, जिसमे हृतिक रोशन अपने ग्लैमरस लुक से इतर बढ़ी हुई दाढ़ी-मुछ व बिखरे बाल में  है। विश्व के सर्वाधिक खूबसूरत अभिनेताओं में शुमार हृतिक का छवि से हटकर यह नन-ग्लैमरस लुक उनके प्रशंसकों को शायद न भाए। इस से पूर्व भी हृतिक की इस प्रकार की एक प्रायोगिक फ़िल्म ‘गुजारिश’, जिसमे की वो ठीक वैसे ही दिखे थे जैसे कि सुपर 30 के पहले लुक में दिखे है, को दर्शकों ने नकार दिया था। करियर के इस मुकाम पर हृतिक को अदद हिट की जरूरत है, उनकी आखिरी फिल्मों, ‘काबिल’ को छोड़कर बॉक्सऑफिस पर अच्छा व्यवसाय नहीं किया है।

हृतिक की अपनी फैन-फॉलोविंग है जो उनकी खूबसूरती, फिटनेस, उनकी आधुनिक व ग्लैमरस लुक की दीवानी है, जिसमे लड़कियों की संख्या ज्यादा है। सावधानी से विकसित मांसपेशियां, स्लिम-एथेलीट बॉडी, भिन्न आंखे उन्हें मौजूदा दौर के अभिनेताओं से अलग करती है। उनकी इन्हीं विशेषताओं के कारण उन्हें ‘ग्रीक गॉड’ भी कहा जाता है। तमाम विशेषताओं के बाबजूद उन्हें वो मुकाम हासिल नहीं हुआ जिसकी उनसे अपेक्षा की जाती है। अपने पिता राकेश रोशन की प्रोडक्शन की फिल्मों को छोड़ दिया जाय तो उनके पास गिनती की ही सफल फिल्मे होंगी। वैसे भी उनके खाते में सफल फिल्मों की वनिस्पत असफल फिल्मों की संख्या ज्यादा है। एक तो चुनिंदा फिल्में करने की रणनीति के कारण वो सुनहरे पर्दे पर दिखते भी कम ही है। 2017 में उनकी चर्चा अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने साथी कलाकार कंगना राणावत के साथ कथित रिश्तों को लेकर रहा।

वैसे भी उनके लिए यह फ़िल्म अग्निपरीक्षा ही है, क्योंकि इस बायोपिक फ़िल्म जिस पृष्ठभूमि पर आधारित है वह उनकी छवि से बिल्कुल भिन्न है। हृतिक कभी अपनी चॉकलेटी, रोमांटिक और चेहरे की मासूमियत वाली छवि से बाहर निकल ही नही पाए है। एक ऐसे किरदार को जीने की कोशिश कर रहे है जो कि जो कि उनसे भिन्न है, यह एक चुनौती भी है और जोखिम भी। एक लंबे अंतराल के बाद शायद उनके प्रशंसक सुनहरे पर्दे पर उनका बेसब्री से इंतेज़ार कर रहे है किंतु उनके इस रूप को स्वीकार्य करना शायद उनके लिए मुमकिन न हो।

जिस देश मे फ़िल्म निर्माण को उधोग का दर्जा प्राप्त है वहां अब फिल्में व्यवसायिक दृष्टिकोण से ही बनाई जाती है और बॉक्स आफिस का गणित, गणित की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म को कैसी प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी, यह तो वक़्त आने पर ही पता चलेगा। अगर आकड़ो की बात की जाय तो देश में खेल व खिलाड़ी पर आधारित बायोपिक को छोड़कर अन्य के लिए खुशनुमा नहीं रहा है। अब निर्माता इस धारणा को कैसे व्यवसायिक रूप दे पाते है, यह भी देखने वाली बात होगी।

क्या हृतिक जोखिम भरे इस चुनौती को सफलता में तब्दील कर पाएंगे? क्या उनके प्रशंसक उनके इस नन-ग्लैमरस अवतार को स्वीकार कर पाएंगे? क्या हृतिक संजीदा अभिनय से इस भूमिका से न्याय कर पाएंगे, जो कि उनके व्यक्तित्व के बिल्कुल विपरीत है?