थम गया सियासी तूफान, अग्निपरीक्षा में सफल हुई कोंग्रेस, BJP के मिशन ‘कोंग्रेस मुक्त भारत’ पर लगी रोक

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद आज भाजपा के येदियुरप्पा के सामने एक और अग्निपरीक्षा थी, कर्नाटक विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने की, जिसमे वे पूरी तरह से असफल रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद येदियुरप्पा को आज शाम 4 बजे कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बहुमत साबित करना था। लेकिन वो ऐसा कर नही पाये।  आज के दिन की सुबह 8.40 बजे शंगरी-ला होटल में बीजेपी की बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और कर्नाटक के चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर समेत बीजेपी के विधायक भी शामिल थे। होटल के बाहर येदियुरप्पा ने कहा भी की, मैं 100 प्रतिशत बहुमत साबित करने जा रहा हूं। लेकिन, वे ऐसा साबित नही कर पाए। हालांकि, खरीद-फरोख्त के डर से कांग्रेस और जेडीएस ने अपने-अपने विधायकों को हैदराबाद भेज दिया था, जहां से देर रात उन्होंने बेंगलुरु की फ्लाइट ली। सुबह सेवेरे दोनों पार्टियों के विधायक बेंगलुरु पहुंच गए। यहां पहुंचने के बाद विधायकों को बस से होटल हिल्टन ले जाया गया। कांग्रेस और जेडीएस का भी दावा है कि, शक्ति परीक्षण में जीत उनके गठबंधन की ही होगी। लेकिन कोंग्रेस परेशान थी क्योंकि, दोपहर तक जेडीएस के सभी विधायक 38 विधायक विधानसभा में मौजूद थे सिर्फ कांग्रेस के दो विधायक गायब थे। ऐसा भी कहा जा रहा था कि, दो विधायक भाजपा के संपर्क में है। आखिर पुलिस ने कांग्रेस के गायब दोनों विधायकों आनंद सिंह और प्रताप गौड़ा पाटिल को खोज निकाला। ये दोनों बेंगलूरू के होटल गोल्ड फिंच में मिले। लेकिन अंत मे सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने पद की शपथ ली। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी विधानसभा पहुंच गए, साथ ही मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के साथ बीजेपी के विधायक विधानसभा में पहुंचे। कार्यवाही की शुरुआत प्रोटेम स्पीकर ने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को शपथ दिलाने के साथ शुरू हुई और इसके बाद अन्य विधायकों ने शपथ लेना शुरू किया।

पहले ये अनुमान लगाया जा रहा था कि, कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायक विधानसभा नहीं आएंगे जिससे भाजपा के लिए बहुमत साबित करना आसान हो जाएगा। लेकिन जब सारे विधायक पहुंच गए, तो यह अटकलें तेज हो गई की, येदियुरप्पा विश्वास मत हासिल करने से पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं। बहुमत साबित करने के लिए भाजपा की राह कठिन होती गई। कांग्रेस के डीके शिवकुमार ने भी कहा कि, वह इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं की, विश्वासमत से पहले ही येदियुरप्पा त्यागपत्र दे सकते हैं। कोंग्रेस के कई नेताओ का एक ही बयान था कि, फ्लोर टेस्ट के दौरान भाजपा की पोल खुल जाएगी और जब ये येदियुरप्पा को साक्षात्कार हुआ कि, कर्नाटक में बहुमत जुटाने की उनकी सारी कोशिशें विफल हुई है, तो मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विश्वास मत हासिल करने से पहले ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि, कहा कि मैं विश्वास मत का सामना नहीं करूंगा और इस्तीफा देने जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि, सत्ता गंवाना उनके लिए कुछ भी गंवाने जैसा नहीं है। मेरा जीवन लोगों के लिए है। येदियुरप्पा ने कहा कि, लोगों ने हमें 104 सीटें दी। बहुमत कांग्रेस या जेडीएस के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि, यदि लोग हमें 104 की जगह 113 सीटें देते तो हम राज्य को स्वर्ग बना देते। उन्होंने कहा कि, 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 में से 28 सीटें भाजपा जीतेगी। येदियुरप्पा ने कहा कि, मैंने दो साल तक राज्य का दौरा किया और लोगों के चेहरे पर पीड़ा देखी। उन्होंने कहा कि, जितना प्यार लोगों ने मुझे दिया है उसे मैं कभी भूला नहीं सकता।

वहीं जेडीएस नेता कुमारस्वामी के बतौर मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल होंगे। येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि, उन्हें राज्यपाल के न्यौते का इंतजार है। हालांकि उन्हें आधिकारिक तौर पर अभी तक न्यौता नहीं मिला है। साथ ही उन्होंने कहा, ये लोकतंत्र की जीत है। कर्नाटक विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद लगभग सभी पार्टियों ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बीजेपी की जीत बताया है।