नेशनल साइज लेने वाला भारत दुनिया में 15वां देश होगा, निफ्ट करवाएगी इंडिया साइज सर्वे

क्या आपको कपड़ो की शॉपिंग के दौरान कभी माप(साइज) को लेकर परेशानी हुई है? क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी एक कंपनी की 42 नंबर की शर्ट आती है तो कभी दूसरी कंपनी की 40 नंबर की? क्या ट्राउज़र्स में भी ऐसा ही होता है किसी कंपनी की 32 तो किसी की 30 साइज फिट आती है?

सिर्फ कपड़े ही नहीं जूतों के साथ भी ऐसा ही होता है। देखने और सुनने में यह कोई बड़ी समस्या नहीं लगती किन्तु असुविधजनक जरूर है और तो और कभी ऐसा भी होता है कि किसी कपड़े की डिज़ाइन और रंग पसंद आ जाये और साइज फिट नही आये तो चिढ़ सी होती है। वैश्वीकरण के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यपार आसान होने के कारण यूएस और यूके की विभिन्न कंपनियां भारत में भी अपना व्यवसाय करती है, उनके यहां बने कपड़ों की साइज का एक स्टैंडर्ड होता है, जो हमसे मेल नहीं खाता इसलिए भी परेशानी होती है। भारतीय कंपनियों के साथ यह समस्या इसलिए होती है क्योंकि यहाँ साइज का एक स्टैंडर्ड माप नहीं हैं।

लेकिन खुशी की बात यह है कि इस आम समस्या को निफ्ट (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी) ने नोटिस किया और इसका हल ढूँढने की पहल की। निफ्ट इस समस्या के हल के लिए ‘टेक्सटाइल मिनिस्ट्री’ की मदद लेगी और देश भर में एक ‘नेशनल साइज सर्वे कैंपेन’ शुरू करेगी जो कीअगले 2 से 3 साल तक चलेगी। योजनानुसार इस सर्वे के तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों से 25000 भिन्न-भिन्न लोगो के शरीर की पूरी माप ली जाएगी। इसके लिए तीन हाईटेक फुल बॉडी स्कैनर्स आवयश्क होंगे जिसके लिए  ग्लोबल टेंडर की अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। इन स्कैनर्स को देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाया जाएगा और भिन्न-भिन्न उम्र, कद और आकार के लोगो का माप लिया जाएगा। लोगों को साइज देने के लिए बॉडी सूट पहन कर इस स्कैनर से गुजरना होगा।

इस योजना का अनुमानित बजट 30 करोड़ रुपये होंगे जिसमे से टेक्सटाइल मिनिस्ट्री 21 करोड़ रुपए देगी। इस देश्वयपि सर्वे के अंत में देश भर के सैंपल साइज मिल जाएंगे जिन्हें बड़ी टेक्सटाइल कंपनियों के साथ शेयर किया जाएगा, ताकि वो उस साइज के अनुसार कपड़े बनाये।

ख़ुशख़बरी यह है कि इस आम समस्या से बहुत ही जल्द आपको निजात मिलने वाली है और आप अपनी पसंद के रंग और डिज़ाइन के कपड़े, जूते खरीद पाएंगे। इस सर्वे के बाद भारत दुनिया का 15वां देश बन जायेगा जिसने नेशनल साइज लिया है।