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Rani Kashyap

Rani Kashyap
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माँ पहली गुरु और उनका समस्त जीवन ही पाठशाला। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक। पढ़ना, पढ़ाना, गीत-संगीत सभी या यूं कहे की वीणावादिनी से हर बार स्वर देने की इच्छा आप तक लायी है। परिवार और मित्रों का अप्रतिम सहयोग और आशीर्वाद भी मेरी शिक्षा का अभिन्न पाठ। इन सभी से ऊपर अपने मौन से संवाद जहाँ अक्षर बनने की कोशिश में है शब्द और शब्द, वाक्य। परम्परागत शिक्षा को एक बार चुनौती दी मौन ने कि, साहित्य में "डूबना मत की डूबते तो वो हैं की जिन्हे गहराई का पता नहीं होता" कई वर्ष मुखर होने के बाद भी दो पल का मौन है अभिन्न गुरु और प्रेरक जो वंदनीय है।