वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए व्यवसाय के अवसर

career in commerce

आम मान्यता है कि बारहवीं के बाद कॉमर्स पृष्ठभूमि से आए विद्यार्थयों के लिए बहुत ही सीमित करियर के अवसर रहते हैं। हमारे समाज में जो छात्र अकादमिक स्तर पर बहुत बेहतर कर रहे होते हैं वो बिना किसी दोराय के विज्ञान का ही उच्च शिक्षा के लिए सबसे पहले चुनाव करते हैं। अब जो छात्र दसवीं में अच्छे अंकों के साथ पास नहीं हो पाए उनके लिए कॉमर्स ही इकलौता सम्मानजनक विषय बचता है। कुछ छात्र तो केवल इसलिए कॉमर्स का चुनाव कर लेते हैं ताकि उन्हें फिजिक्स-केमिस्ट्री के लंबे लेक्चर न सुनना पड़े। फिर कुछ यदि अपनी रूचि के अनुसार कॉमर्स चुनते हैं, तो वो भी इस बात से अनभिज्ञ ही रह जाते हैं कि चार्टर्ड एकाउंटेंसी से इतर भी उनके पास कई विकल्प हैं जिससे एक सफल करियर बनाया जा सकता है। तो आइये जानते हैं कुछ अनछुए कैरियर पहलुओं को जो कॉमर्सविदों के लिए रोज़गार के नए और बेहतरीन रास्ते साबित हो सकते हैं।

1. चार्टर्ड एकाउंटेंसी

हर कॉमर्स का छात्र इस क्षेत्र में आते हैं तो शायद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के ख़्वाब को साथ में लेकर। हर नौसिखिये के लिए ये जानना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि जिस रोशनी से चौंधिया कर वो इस ओर आते हैं वो आख़िर है क्या? चार्टर्ड एकाउंटेंसी कोई सरकारी काम नहीं है बल्कि सरकारी मान्यता प्राप्त पेशा है, बिल्कुल वैसे ही जैसे डॉक्टरी या वकालत। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, यानि सी०ए० काफी सारे कार्यक्षेत्र के तहत काम कर सकता है, जैसे, ऑडिट, प्रबंधन परामर्श सेवा, निवेश सलाहकार, वित्त इत्यादि। ये सब या तो वो कोई सी०ए० फर्म के साथ जुड़कर कर सकता है अथवा स्वयं ही अलग से अभ्यास कर सकता है। सी०ए० बनने के लिए बारहवीं के बाद छात्रों को 3 चरण की परीक्षाओं को पार करना होता है फिर 3 साल का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रकार बारहवीं के बाद सी०ए० बनने के लिए कम से कम 6 से 7 साल लग जाते हैं।

2. बीमा विज्ञान

बीमा विज्ञान वह शाखा है जो बीमा, वित्त एवं अन्य उद्योगों में ख़तरों के आकलन हेतु गणित एवं सांख्यिकी पद्धतियों का उपयोग करती है। इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोग बीमांकक कहलाते हैं। एक बीमांकक होना न केवल काफी जटिल कार्य है बल्कि यह अपने आप में ही एक चुनौती है। यदि आप अंक, आंकड़ों एवं डेटा विश्लेषण में रुचि रखते हैं, तो यह आपके लिए है। बीमांकक जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन फण्ड,उद्यम जोखिम, निवेश,पेंशन एवं सेवानिवृत्ति इत्यादि क्षेत्रों में कार्यभार सँभालते हैं। इस विधा की पढ़ाई के लिए बारहवीं के बाद एक्चुरियल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (ACET) में सफल होना होगा। इंस्टीट्यूट ऑफ एक्चुअरीस ऑफ इंडिया की ओर से कुल पंद्रह परीक्षाएँ ली जाती है, जो इस पाठ्यक्रम को पूर्ण करती है । हालाँकि एक बीमांकक के तौर पर आप 4 या 5 परीक्षाओं में सफल होकर भी अभ्यास प्रारम्भ कर सकते हैं ।

3.  लागत और प्रबंधन लेखाकार(CMA)

लागत और प्रबंधन लेखाकार किसी संस्थान के लिए बजट निर्धारण, लागत प्रबंधन, निष्पादन मूल्यांकन एवं परिसंपत्ति प्रबंधन का काम सँभालते हैं। CMA इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया(ICAI) के तहत प्रमाणित है। लागत एवं प्रबंधन लेखाकार का काम कॉर्पोरेट एग्जेक्युटिव के साथ काम करते हुए वित्तीय योजना एवं रणनीति बनाना है। साथ ही, विभिन्न नियामक अधिकारियों, लेनदारों, कर अधिकारियों के लिए वित्तीय रिपोर्ट तैयार करना भी इनका कार्यभार है। इन सब के अलावा इस कोर्स के बाद छात्र ऑडिटिंग के क्षेत्र में भी जा सकते हैं। बारहवीं के बाद 4 अथवा 5 साल की अवधि में ICAI द्वारा संचालित 20 विभिन्न परीक्षाओं को 3 चरणों- फाउंडेशन, इंटरमीडिएट एवं फाइनल- पार करने के बाद ही छात्र अभ्यास के लिए पात्रता प्राप्त कर सकेंगे।

बारहवीं में कॉमर्स चुनने के बाद विद्यार्थियों के लिए कैरियर के कई अवसर होते हैं जो अंजान या अनछुए रह जाते हैं। ज़रूरत है तो सकारात्मक सोच के साथ बेहतर करने की। यहाँ तो केवल तीन विकल्प प्रस्तुत किये गए हैं लेकिन यदि इसपर ढंग से रिसर्च किया जाए तो ऐसे अनेकों विकल्प मौजूद हैं जो हमारे लिए न केवल एक अलग हटके काम होता है अपितु अच्छी कमाई का भी स्रोत बन जाता है।