अाध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा तनाव से ग्रस्त हू

अाध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। भय्यू महाराज ने सिल्वर स्प्रिंग स्थित अपने निवास पर खुद को गोली मारी। हालाकि उनके खुदकुशी के पीछे पारिवारिक कारण बताये जा रहे हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में उनके आत्महत्या कर लेने के बाद से ही समर्थकों में मातम का माहौल छा गया है। घटना के बाद उन्हें बॉम्बे अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हालांकि भैय्यूजी महाराज का सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि,

“परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वाह करने वाला भी कोई होना चाहिए। मैं बेहद तनाव में हूं और थक गया हूं।”

इंदौर के आईजी मकरंद देउस्कर ने कहा कि, उनके घर में मौजूद लोग गोली की आवाज सुनकर कमरे की तरफ दौड़े लेकिन कमरा बंद था। अंदर जाने के लिए दरवाजे को तोड़ना पड़ा, साथ ही डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्रा ने बताया कि, भय्यू महाराज ने दाईं कनपटी पर गोली मारी। हालाकि इस घटना की जानकारी मिलते ही फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन महाराज की गोली लगने बाद ही फौरन मौत हो चुकी थी। खुद को गोली मारने से पहले भय्यूजी महाराज ने 6 ट्वीट किए थे। अपने आखिरी ट्वीट में उन्होंने लिखा, ”मासिक शिवरात्रि को ‘महाशिवरात्रि’ कहते हैं। दोनों पंचांगों में यह चन्द्रमास की नामाकरण प्रथा है, जो इसे अलग-अलग करती है। मैं सभी भक्तगणों को इस पावन दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।”

भैय्यू जी महाराज का जन्म 29 अप्रैल 1968 को हुआ। वे शुजालपुर के जमीदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। भय्यूजी महाराज का वास्तविक नाम उदय सिंह देशमुख था, लेकिन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इन्हें लोग भय्यूजी महाराज के नाम से जानते थे। भय्यू महाराज एक समय मॉडलिंग से भी जुड़े रहे। उसके बाद उन्होने मॉडलिंग की जिंदगी को अलविदा कहकर अध्यात्म के रास्ते पर चलना तय किया। वह कभी खेतों की जुताई करते देखे जाते थे, तो कभी क्रिकेट खेलते हुए, घुड़सवारी और तलवारबाजी में भी वे पारंगत थे। आलीशान भवन में रहने वाले भय्यूजी महाराज मर्सडीज जैसी महंगी गाड़ियों और रॉलेक्स वॉचेस पहनना पसंद करते थे। भय्यू महाराज को राष्ट्रीय संत माना जाता था। उन्होंने पहली पत्नी की मौत होने के बाद बेटी कुहू और मां का ख्याल रखने के लिए दूसरी शादी की थी। हालाकि बीच में उन्होंने संन्यास ले लिया था लेकिन, घर वालों के लगातार कहने पर भैय्यूजी ने दूसरी शादी करने के लिए हा कर दी थी।

भय्यूजी महाराज उस समय चर्चा में आये थे, जब अन्ना आंदोलन के समय उन्होंने सरकार के साथ बातचीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। उनको मानने वाले भक्तों में लता मंगेशकर से लेकर पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीएम नरेंद्र मोदी, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, मनसे के राज ठाकरे, आशा भोसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी भी शामिल हैं। भय्यू महाराज से मिलने अब तक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान और गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल सहित कई बड़ी हस्तियां उनके आश्रम में आ चुकी हैं। सद्भावना उपवास के दौरान उनको नरेंद्र मोदी ने बुलाया था।

उनके जाने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दु:ख प्रकट किया है। उन्होंने कहा,

”मैं संत भय्यू जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। देश ने एक व्यक्ति खोया है जो संस्कृति, ज्ञान और निस्वार्थ सेवा का उदाहरण था।”

साथ ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि, भय्यू महाराज ने किसान और आदिवासी लोगों के लिए खास तौर पर काम किया। महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने भी भय्यूजी महाराज के निधन को ‘स्तब्ध कर देने वाला और अविश्वसनीय ’करार दिया। वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भय्यू जी की आत्महत्या के मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता माणक अग्रवाल ने कहा, ”मध्य प्रदेश सरकार उन पर सुविधाएं लेने और उसके बदले समर्थन देने का दबाव बना रही थी। उन्होंने इसे लेने से भी इंकार किया था, लगता है इसलिए वह भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। इस मामले की सीबीआई जांच होनी ही चाहिए।

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