कब ख़त्म होगा यौन उत्पीड़न ?

यौन उत्पीड़न का सरल मतलब है किसी आवेदक या कर्मचारी के साथ अवांछित या अनुचित वादे के बदले यौनिक प्रताड़ना करना| यह शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर होता है| यह एक कानूनी अपराध तो है ही लेकिन उसे बढ़कर यह एक सामाजिक विषमता है और सबसे बढ़कर यह एक अमानवीय कृत्य है| आप स्त्री है तो भूल जाइए कि पुरुष लिंग का होने पर आप इसके शिकार नहीं होंगे| स्कूल, कॉल-सेंटर, हॉस्पिटल, सरकारी दफ़्तर, होटल आदि किसी भी ऑफिस और किसी के भी साथ यौन उत्पीड़न हो सकता है|

पहले तो यह सिर्फ कॉर्पोरेट दुनिया तक ही सिमित माना जाता था परन्तु हरियाणा के ताज़ा मामले ने देश के सामने सरकारी तंत्र में यौन उत्पीड़न की छुपी काली सच्चाई को उजागर कर दिया है|

हरियाणा राज्य के पशुपालन विभाग में एडिशनल सचिव के पद पर कार्यत महिला अधिकारी ने एक के बाद एक फेसबुक पर पोस्ट कर अपने सीनियर अधिकारी सुनील के गुलाटी के ऊपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा डाला| महिला अधिकारी ने राष्ट्रपति ऑफिस से लेकर पीएमओ तक कुल 53 सरकारी विभागों में शिकायतें कर डाली लेकिन इस भ्रष्ट सिस्टम से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला| हालांकि पुलिस के पास जाकर उन्होंने एफआईआर दर्ज़ नहीं करवाई क्योंकि उसपे उनको भरोसा नहीं था|

शिकायतकर्ता महिला आईएएस के मुताबिक, 10 मई को उन्होंने रेवाड़ी के कोसली तहसील में एसडीजेएम की अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपना बयान और डीवीडी सहित अन्य दस्तावेज बतौर सबूत जमा कर दिए थे|

अपनी शिकायत में महिला अधिकारी ने कहा कि उनके सीनियर सुनील गुलाटी उनको बेवजह तंग करते है, उनसे अश्लील बातें करते है, उनको घंटो ऑफिस में बिठाया जाता है, उनको धमकी दी जाते है कि उन्हें उल्टा टंगवा दिया जाएगा और उनकी एनुअल सीक्रेट रिपोर्ट को छिपा ख़राब कर दिया जाएगा| उन्होंने यौन उत्पीड़न में गुलाटी के साथियों के शामिल होने की बात भी कही है जिससे महिला अधिकारी को अपने ऊपर रात में हमला करवाए जाने का डर है और इसलिए उन्होंने सुरक्षा की मांग भी की है|

उधर आरोपी सीनियर अधिकारी सुनील के गुलाटी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए महिला अधिकारी को कामचोर करार दिया और उन पर ही दोष मढ़ा कि मुफ्त की सहानभूति और अपने द्वारा उनकी गलतियां बताइये जाने उनके प्रति जन्मे द्वेष की भावना के चलते वह ऐसा कर रही है|

यह मामला इस बात को साफ़ ज़ाहिर करता है कि एक कॉलेज पास आउट इंटर्न से लेकर एक आईएएस अधिकारी महिला तक अपने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का शिकार होती है बस फर्क़ है कि एक बोल पाती है और दूसरी चुप रह जाती है| यौन उत्पीड़न की समस्या वास्तव में एक विषैली समस्या है जो कि पुरूषप्रधानता व स्त्री-पुरुष के बीच कामकाजी भेदभाव को जड़ से दिखाता है| इसके लिए 2013 में एक विशेष कानून भी पारित हुआ था इस उम्मीद से है कि अब ऐसा नहीं होगा परन्तु दुर्भाग्य है कि कामुकता के अंधेपन वाले समाज ने मर्यादा को एक चूने की लकीर साबित कर के रख दिया है जिसे जब चाहे कोई भी मिटा दे सकता है|

इस विराट समस्या का निवारण अतिजल्द ढूढ़ना बेहद ज़रूरी है नहीं तो कार्यस्थल केवल कामुकतास्थल बन कर रह जाएगा| अब आइये इससे लड़ने के आपको 5 उचित व त्वरित उपाय बताते हैं –

1 – अपने काम करने की जगह के सेक्सुअल हर्रास्मेंट यानी यौन उत्पीड़न के प्रति निति के बारे में अवश्य जाने|

2- एक फ्रेंडली जोके और भद्दे मज़ाक के अंतर को समझे , इसी प्रकार एक दोस्ताना हाथ मिलाने और एक गंदे टच के बीच रेखा खींचना सीखिए|

3- जो आपका शोषक है उससे सीधा संपर्क कर अपना विरोध जताइए ,डरिये मत आपकी हिम्मत ही आपकी ताक़त है|

4-अपने कानूनी अधिकारों और सहायता विकल्प जैसे वुमन हेल्पलाइन ,महिला आयोग आदि के बारे में जाने और उनसे मदद लें|

5-मामले को सीनियर मैनेजमेंट तक उठाये और यदि सहायता न मिले तो सबके बयान दर्ज़ या सबूत सुरक्षित रखे जिससे आगे कि लड़ाई में आपको सहायता मिले|

यौन उत्पीड़न रेप से कम नहीं है इसलिए डरिये मत केवल लड़िये !

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