न्यूज़ एजेंसी के दो पत्रकारों को 7 साल की सजा

कहते हैं कि आज की दुनिया में सच दिखाना उतना ही कठिन है जितना कि,  ‘आग पर नंगे पांव चलना’। वहीं पत्रकारिता का स्तर आज दिन-ब-दिन प्रश्नचिन्ह के घेरे में आता जा रहा है। क्योंकि समाज में प्रथम आने के दर्जे में और ज्यादा एक्सपोज़ करने के चक्कर में कुछ ऐसी गलतियां भी हो जाती हैं जो देश के लिए हानिकारक सिद्ध होती हैं। कुछ ऐसे ही कार्य को करने वाले दो पत्रकारों को 7 साल की सजा सुनाई गई है।

रॉयटर्स के थे दोनों पत्रकार – 

म्यांमार की एक अदालत ने रोहिंग्या नरसंघार की जांच कर रहे दो पत्रकारों को 7-7 साल की सजा सुनाई है। यह दोनों पत्रकार रोहिंग्या में हुए नरसंहार की जानकारी जुटा रहे थे। और वह जल्द ही सारी बातों से पर्दाफाश करने वाले थे। हालांकि इससे देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नुकसान पहुंच सकता था जिसकी वजह से इन दोनों पत्रकारों को रोहिंग्या नरसंघार मामले की छानबीन करने के दौरान पकड़ा गया था। और देश के उद्देश्यों को नुकसान पहुंचाने के तहत रॉयटर्स के दोनों पत्रकारों को 7-7 साल की सजा सुनाई गई है। मामले की सुनवाई कर रहे यंगून कोर्ट के जज ल्यून ने कहा कि इन दोनों पत्रकारों ने देश के उद्देश्यों को नुकसान पहुंचाने का कार्य किया है जिसके तहत उन्हें यह सजा सुनाई जा रही है।

पत्रकार ‘ला लोन’ (32) और ‘क्याव साय ओ’ (28 ) दिसंबर से म्यांमार की जइनसेनी जेल में बंद हैं। दोनों को यंगून में पुलिस ने खाने पर आमंत्रित किया गया था और रेस्टोरेंट से निकलने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत ने रोहिंग्या संकट की कवरेज करने के दौरान गिरफ्तार किए गए समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकारों को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (शासकीय गोपनीयता अधिनियम) का उल्लंघन करने का दोषी पाया है।

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