मराठा आरक्षण ना मिलने पर युवा ने की आत्महत्या

देश में आरक्षण का मुद्दा सालों से चला आ रहा है, अब तो आरक्षण के नाम पर राजनीति भी खेली जा रही है इसके लिए अलग-अगल राज्यों में विशेष आरक्षण के लिए कई आंदोलन होते रहे हैं। अब तो हालात यह है कि आरक्षण के नाम पर कि लोग खुदकुशी या आत्महत्या पर मजबूर हो गए हैं। ऐसी ही एक घटना महाराष्ट्र के नवी मुंबई में हुई। युवा ने मराठा आरक्षण ना मिलने पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है।

आर्थिक तनाव के वजह से की आत्महत्या  

 

भले ही अबतक में मराठा आरक्षण को लेकर चल रही हिंसा और प्रदर्शन में कमी आई हो, लेकिन मराठा समुदाय के लोगों के खुदकुशी करने का सिलसिला अभी भी जारी है। सरकार की लाखों कोशिशों के बावजूद भी आत्महत्या करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब तक मराठा आरक्षण को लेकर 8 व्यक्तियों ने यह कदम उठाया है। आरक्षण की मांग को लेकर 26 साल साल के एक युवक जिसका नाम अरुण भडाले है ने भी आत्महत्या की है। पुलिस ने इस युवक के पास से सुसाइड नोट बरामद किए हैं, जिसमें लिखा है कि उसने आर्थिक तंगी से परेशान होकर और आरक्षण ना मिलने पर यह कदम उठाया है। नोट में यह भी लिखा है कि फडणवीस सरकार पर आरक्षण ना देने और झूठे वादे करने से तंग आकर उसने मजबूरी में यह कदम उठाया।

देवेंद्र फडणवीस पर लगाया झूठे वादों का आरोप 

मृतक ने अपने सुसाइड नोट महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। नोट में लिखा है कि मुख्यमंत्री ने ही हमारे सामने आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं छोड़ा है। यह खबर मिलने के बाद नवी मुंबई एपीएमसी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय निगम ने बताया कि अरुण कोपर खैरणे के तुर्भे गांव का निवासी था, और मुंबई में वह एक दिहाड़ी मजदूर था। उसने शनिवार को सुबह करीब पांच बजे अपने घर की बालकनी में रस्सी बांधी और फिर वही रस्सी गले में डालकर झूल गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने जब छानबीन की तो यह पाया कि अरुण ने कई जगह कर्ज के लिए आवेदन किया था लेकिन, उसे कर्ज नहीं मिला। वह अपनी आर्थिक परिस्थिति को लेकर बहुत परेशान था। और सुसाइड नोट पर भी आर्थिक तंगी का जिक्र है, पुलिस का अनुमान है कि आर्थिक तंगी के चलते उसने आत्महत्या की।

अब इस घटना के बाद मराठा आरक्षण को लेकर मुद्दा और भी गंभीर और पेचीदा हो गया है। ऐसा हो सकता है कि अब मराठा समुदाय के लोग भी आंदोलन और प्रदर्शन पर उतर आएंगे। लेकिन असल में लोगों को यह सोचना चाहिए कि आरक्षण के चलते इंसान अपनी जान ले ले, यह सही है ? अगर ध्यान से देखा जाए तो आत्महत्या के अलावा भी और कई रास्ते निकल सकते हैं,  लेकिन लोग मानसिक तनाव के चलते यह कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं।

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