अब दिल्ली आईआईटी में दाखिले के दौरान देना होगा शपथपत्र

देश ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे प्रतिष्ठित  इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक आईआईटी-दिल्ली इस सत्र से दाखिल संबंधित नियमो में कुछ संसोधन करने

का निर्णय लिया है। कॉलेज प्रशासन के निर्णयानुसार विद्यार्थियों को अगले बैच में दाखिले के दौरान एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे जिसमें यह उल्लेख होगा कि  वे कॉलेज परिसर में शराब, सिगरेट या ड्रग्स का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

संस्थान में इससे पूर्व छात्रों द्वारा पीने और धूम्रपान संबंधित प्रतिबंध के उल्लंघन करने पर माता-पिता को सूचित करने की योजना असफल हो चुकी है। उस असफलता से सिख लेते हुए प्रबंधन ने इस बार कुछ अलग करने की सोची है। इसके पश्चात ही संस्थान के द्वारा इस शपथपत्र की योजना को अमल में लाया जा रहा है। इस शपथपत्र के उल्लंघन करने वाले छात्रों को दंडित या निष्कासित कर दिया जाएगा।

कॉलेज प्रबंधन के इस फैसले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए हमने कुछ पूर्ववर्ती छात्रों से संपर्क किया। आईआईटी दिल्ली से 2006-10 के सेशन में केमिकल ब्रांच के छात्र रहे पंकज कपाडिया ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा

” यह एक सराहनीय कदम है, साथ ही इसका निष्पादन भी उतनी ही तत्परता से होना चाहिए। वैसे नशा का विरोध पारिवारिक स्तर से ही शुरू हो जाना चाहिए क्योकि ‘Education begins at home.’ बच्चे वही देखते-सीखते है जो बड़े करते है, इसलिए बड़ो को इस प्रकार के व्यसनों का परहेज रखते हुए बच्चों के सामने आदर्श रूप प्रस्तुत करना चाहिए।”

वहीं सिविल संकाय के छात्र रहे प्रशांत चौबे ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए कहा

” ऐसा बिल्कुल होना चाहिए, यह एक सराहनीय कदम है। ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र संगति के प्रभाव में आकर नशे की लत लगा बैठते है, इसका प्रत्यक्ष असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है। मैंने कुछ ऐसे भी छात्र देखे है जिनकी नशे के कारण डिग्री तक कम्पलीट नहीं हो पायी है। शुरुआत में नशा उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान लगता है किंतु वक़्त के साथ वह व्यवधान का रूप ले लेता है। नशा एक गंभीर समस्या है जिसके समाधान के लिए  प्रबंधन को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। छात्र जीवन में नशा बैन होना चाहिए, हालांकि यह थोड़ा मुश्किल है किंतु यह बेहतर होगा।”

नशा, नाश ही कर सकता है, इससे दूरी ही बेहतर है। किसी भी उम्र में, किसी भी प्रकार से यह लाभकारी नहीं है। छात्र जीवन निर्माण की अवस्था है, उम्र के इस पड़ाव पर इसका परहेज ही उनके लिए सही है।

संस्थान प्रबंधन का यह कदम सर्वथा उचित है किंतु एहतियात यह बरतना है कि इसका हश्र भी पूर्व के योजनाओं की भांति न हो। इसके लिए नियमों का सख्ती से पालन भी करना होगा। छात्रों को भी यह समझना होगा कि यह उनके भले के लिए है। जरूरत है नशे के खिलाफ एकजुट होने की,एकमत होने की तभी इसको जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

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