कहानीघर में शिक्षकों के लिए ‘शिक्षा में कहानियों के महत्व एवं बारीकियों’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन

आज कहानीघर में ‘शिक्षा में कहानियों के महत्व एवं बारीकियों’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में पटना के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया जिनमें से प्रमुख स्कूल हैं टेंडर हॉट्स हाई स्कूल, क्राइस्ट चर्च हाई स्कूल, एचपीवी हाई स्कूल, हनी ड्यू पॉइंट स्कूल, सेंट फ्रांसिस एकेडमी, श्री राम सेंटेनियल स्कूल आदि। कार्यशाला की शुरुआत करते हुए निफ्ट गांधीनगर के  पूर्व प्रोफेसर एवं कहानीघर के संस्थापक श्री रॉनी बनर्जी ने कहानियों के बाल मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करते हुए यह बताया कि आज के परिवेश में शिक्षा का मशीनीकरण होता जा रहा है। रोज-रोज नई तकनीक और नई प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश करती जा रही है जिस वजह से छात्रों और अध्यापकों के बीच आपसी संवाद की कमी होती जा रही है। स्मार्ट क्लासेज, वर्चुअल क्लासरूम व ऑनलाइन क्लासेज इन सब के बढ़ते प्रचलन ने क्लास रूम के अंदर जो समन्वय होता है अध्यापकों और छात्रों के बीच वह समन्वय कहीं ना कहीं घटता जा रहा है। इसका फल यह हो रहा है कि छात्रों के मन में अपने अध्यापकों के प्रति वह सम्मान की भावना में भी कहीं ना कहीं कमी आती जा रही है। साथ ही साथ बच्चों में इस मशीनीकरण के कारण चीजों को समझने और सीखने की प्रवृत्ति घटती जा रही है और बनिस्पत विषयों को, यहाँ तक कि गणित को भी रट लेने की प्रवृत्ति का विकास होता जा रहा है। कंपटीशन के माहौल में आजकल के बच्चे ज्यादा से ज्यादा अंक लाना चाह रहे हैं, ज्यादा से ज्यादा ग्रेड पॉइंट और परसेंटेज लाने की होड़ मची हुई है। ऐसे में उनके अंदर अपने विषय को समझने और सीखने की ललक घटती जा रही है। उन्होंने बताया कि कहानियाँ एक सशक्त माध्यम है जिनका प्रयोग करके हम बच्चों के मन में  किसी भी विषय को सीखने की ललक पैदा की जा सकती है।

कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को डिजाइन थिंकिंग के नियमों के आधार पर बेहतर कहानियों की संरचना एवं विभिन्न विषयों के महत्वपूर्ण बिंदुओं को कहानियों के माध्यम से बच्चों को समझाने की तकनीक के विषय में परिचर्चा की गई। इसी कड़ी में शाइस्ता अंजुम जी एवं जॉय मित्रा ने भी कुछ कहानियों के माध्यम से ही विषयों को बाल सुलभ एवं सुगम बनाने की तकनीकों पर प्रकाश डाला। कहानी घर की संस्थापिका मीनाक्षी झा बनर्जी मे आई कमी को चीकू की कहानी के माध्यम से बच्चों से जुड़ने के लिए कहानियों को एक सशक्त माध्यम बनाने की अपील की, उन्होंने बताया कि विगत 4 वर्षों से कहानीघर इस दिशा में सतत प्रयास कर रहा है कि फिर से वह दादी-नानी की कहानियां जिनका बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है, वह फिर से पुनर्जीवित हो सके। घर में, परिवार में, स्कूलों में, कॉलेजों में और जीवन के विभिन्न आयामों में कहानियों का जो महत्व कहीं खो सा गया है उसे पुनः स्थापित किए जाने की जरूरत है और इस दिशा में कहानी घर लगातार विभिन्न कार्यशालाओं संवाद कार्यक्रम आदि के जरिए प्रयासरत है। मीनाक्षी जो स्वयं एक ख्याति प्राप्त चित्रकार हैं उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बच्चों में रचनात्मक कौशल एवं सृजनात्मकता के विकास के लिए कहानियों का महत्व सर्वोपरि है। बचपन में जो कहानियां हम सुनते हैं उससे हमारी कल्पना शक्ति में सुधार होती है, हम नई चीजें सोच पाते हैं और सृजनात्मक कार्यों में हमारी अभिरुचि का विकास होता है।

कार्यक्रम में प्रतिभागी शिक्षकों ने भी इस बात पर गहरी चिंता जाहिर की की शिक्षा के मशीनीकरण और प्रौद्योगिकीकरण के कारण शिक्षकों और छात्रों के बीच आपसी समन्वय और संवाद की कमी अवश्य हुई है। उन्होंने कहानीघर के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यशाला को व्यापक पैमाने पर आयोजित करने की जरूरत है।

कार्यशाला के अंत में अमित विक्रम ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहानियों के सिलसिले को आगे बढ़ाने की सभी से अपील की।

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