कुली ने सिविल सर्विस परीक्षा पास कर पेश की मिसाल

हाथों में गठ्ठे पड़े हुए कलाइयों से लोहे के रॉड से बने पहिए नुमा ठेले से ना जाने कितने अफसरों का सामान उसने ढोया होगा और उन अफसरों को तो, यह केवल चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी ही लगा होगा, जिनको आज याद भी नहीं होगा कि, जो श्रीनाथ कभी उनको साहब साहब कहकर उनका सामान अपने मजबूत कंधों से, ढोने की बात करता था, आज वही श्रीनाथ सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर चुका है।

जी हां हम बात कर रहे हैं श्रीनाथ की जो हाल ही में केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा को पास करके एक मिसाल पेश की है । श्रीनाथ केरल के एरणाकुलम जंक्शन पर पिछले 5 सालों से कुली का काम कर रहे हैं ।

कैसे पास की परीक्षा ? 

दरअसल श्रीनाथ की कार्यावधि(ड्यूटी पीरियड) दिन की होती थी जिस दौरान यह एरणाकुलम जंक्शन से गुजरने वाली गाड़ियों से उतरे हुए यात्रियों का सामान ढोने का काम करते हैं। रात्रि में जब ये कार्यावधि से खाली होते थे तो इन्हें पढ़ाई का समय मिलता था केवल उसी रात्रि के समय में ही यह अपनी दिनभर की थकान भी दूर करते थे और अपनी पढ़ाई भी पूरी करते थे।

क्या था पढ़ाई का माध्यम ?

आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीनाथ ने सिविल सर्विस परीक्षा केवल इंटरनेट के जरिए ही पास की है । रोमांचक बात यह है कि उन्होंने रेलवे वाईफाई का इस्तेमाल करके अपनी पढ़ाई को अंजाम दिया । श्रीनाथ का कहना है कि , 20 से 40 MB पर सेकेंड की स्पीड से उन्हें प्रेक्टिस क्वेश्चन पेपर और रीडिंग मटेरियल डाउनलोड करने में आसानी मिलती थी । रात में पढ़ाई करने के बाद, दिन में यात्रियों के सामान ढोने के वक्त दब उन्हें वक्त मिलता तब; वह मन ही मन रात में पढ़ी चीजों को दोहराया करते थे ।

प्रधानमंत्री मोदी जी की डिजिटल इंडिया पहल -2016 के तहत रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई की सुविधा को उपलब्ध करवाया गया था । आंकड़ों के मुताबिक मई 2018 तक, देश भर के करीब 685 रेलवे स्टेशनों पर इसका प्रयोग सक्रिय रुप से किया जा रहा है । हालांकि रेलवे ने इसे और विस्तृत करने के लिए लगभग 700 करोड़ रुपए की लागत और लगाने की बात कही है।

गौरतलब है कि श्रीनाथ के इंटरव्यू पास करने के बाद उन्हें लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट में बतौर विलेज फील्ड असिस्टेंट पद पर तैनात किया जाएगा ।

आज आवश्यकता है तो उस युवा वर्ग को श्रीनाथ से सीख लेने की जिन्होंने 3 बार असफल होने पर भी जिंदगी की चुनौती को स्वीकार कर सफलता का परचम लहराया; ना कि निराशा में आकर आत्महत्या जैसे कदमों को उठाया । आज युवा वर्ग का खास तबका रेलवे स्टेशनों पर केवल मूवी डाउनलोड करने वीडियो डाउनलोड करने या सॉफ्टवेयर अपडेट करने जाता है । उन्हें श्रीनाथ जैसे उत्कृष्ट व्यक्तियों के व्यक्तित्व को अपनाने की आवश्यकता है ।

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