लीजिये यहाँ तो आ गए अच्छे दिन ! अब हर यूनिवर्सिटी में होगा दीक्षांत समारोह

किस छात्र की इच्छा नहीं होती कि वो भी फिल्मी छात्रो की तरह काली गाउन पहने और मंच पर उसे भी सम्मानित किया जाय, किन्तु ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता क्योकि भारत जैसे देश में हर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह नहीं होता। भारत में शिक्षा एक हमेशा से चर्चित परन्तु नज़रअंदाज़ किया जाने वाला विषय रहा है| बीते काफी समय से भारतीय यूनिवर्सिटीज अलग -अलग विवादों के कारण चर्चा केंद्र बनी पर आखिर में जाकर एक पुरानी परंपरा के पुनरुत्थान के बाद अब भारतवर्ष के यूनिवर्सिटीज में अच्छे दिन आने वाले है| अब हर साल होगा दीक्षांत समारोह ! एक ऐसा समारोह जहाँ हर मेधावी छात्र-छात्रा को उसके शानदार विद्या-सम्बन्धी या शैक्षिक उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत किया जाता है| मैडल व डिग्री के विजय सम्मान पदक सबको प्रदान किया जाता है|

एक ऐसा समय जो हर किसी को नहीं बल्कि चुनिंदा को ही नसीब होता है|

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र के द्वारा आदेश दिया है कि वह हर साल अपने यहाँ दीक्षांत समारोह बनाये| एचआरडी मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार दीक्षांत समारोह हर साल नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए और विद्यार्थियों को समय पर उनकी डिग्री मिलनी चाहिए। यह समारोह स्नातक के विद्यार्थियों के लिए बड़े महत्व का होता है और उनके परिवारवालों के लिए भी यह गर्व भरा क्षण होता है।”

अधिकारी ने बताया , “ ऐसा पाया गया कि कुछ कॉलेज वित्तीय या समय संबंधित दिक्कतों की वजह से इस प्रक्रिया का नियमित रूप से पालन नहीं कर रहे हैं। ” बता दें कि मिनिस्ट्री द्वारा सभी यूनिवर्सिटीज से पिछले दीक्षांत समारोह का ब्यौरा माँगा गया है|

इस छात्र जीवन की अंतिम व अहम परम्परा की मांग पढाई से सरोकार रखने वाले छात्र -गण , वरिष्ठ शिक्षक -प्राध्यापक व भूतपूर्व छात्र सैदव ही करते रहे है परन्तु नवीनता और स्वार्थ से परिपूर्ण आजकल के मौज-मस्ती परास्त स्टूडेंट्स को सिर्फ फेयरवेल दिखाई देता है क्योंकि उनका पढ़ाई से सरोकार कदापि नहीं है परन्तु जो मेधावी छात्र उस मैडल के साथ अपने छात्र जीवन को समेटना चाहते हैं उनकी आवाज़ अल्पसंख्यक होने के कारण कहीं दबी रह जाती है फिर भी देर आये दुरुस्त आये अब इस बेहतरीन पहल के बाद सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल ही रहा है|

शुरूआती उदाहरणों के परखे तो जेएनयू ने अपने यहाँ दीक्षांत समारोह करीब 46 साल बाद करवाया है तो वहीँ विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने पांच साल बाद मई के महीने कनवोकेशन बनाया है और तो वहीँ त्रिपुरा यूनिवर्सिटी जिसने 4 साल के बाद यह आयोजन बनाया है| अब इस पेहरिस्त में देश का चौथा का सबसे पुराना विश्वविद्लाय इलाहाबाद यूनिवर्सिटी शामिल हो चुका है जिसके कार्यपरिषद ने दीक्षांत समारोह पर औपचारिक मोहर लगा डाली है|

दीक्षांत समारोह एक ऐसा ख़ास पल जो हर छात्र जीवन में सबसे ऊपर मायने रखता है परन्तु आता सबसे आखिर में है| एक ऐसा ख़ास पल जो हर छात्र के जीवन में ख़ास स्थान रखता है| वाकई अपने गुरुजनो ,दोस्तों व माता-पिता के सामने सम्मान पदक और डिग्री ग्रहण की ख़ुशी का एहसास अलवाज़ में बयां नहीं किया जा सकता है|

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