‘पर्सनालिटी डेवलपमेंट’ के लिए एक अनोखी सामूहिक पहल -“FACON DE PARLER”

FACON DE PARLER

कुमारी श्वेता जो कि पेशे से एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है, आज आत्मविश्वास से अंग्रेजी बोलती है, किन्तु एक वर्ष पूर्व तक उन्हें अंग्रेजी बोलने में हिचकिचाहट होती थी। शिक्षक होने के नाते उन्हें सीखने-सिखाने का महत्व पता है इसलिए वो हमेशा से ही अपने आपको व समाज को बेहतर बनाने में यकीन करती है। वो सदैव ही अपनी इस आंशिक कमी को अपनी संवाद कुशलता बेहतर कर दूर करना चाहती थी किन्तु उपर्युक्त माहौल की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। थका देने वाली व्यस्त दिनचर्या के बीच फुरसत के कुछ लम्हे निकालना मुश्किल था, लेकिन कहते है कि मुश्किलों में ही अवसर छिपा होता है, यही श्वेता के साथ हुआ। उनकी पुत्री ‘सारा’ को किसी मित्र के माध्यम से “FACON DE PARLER” के बारे में पता चला। सारा के वहाँ जाने और उसमें हुए सकारात्मक बदलावों से उत्साहित होकर व सारा के अनुनय-विनय करने पर श्वेता ने भी वहाँ जाना शुरू किया, और आज श्वेता न सिर्फ अच्छि अंग्रेजी बोलती हैं बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है जिस से की वो अब और अधिक प्रभावशाली ढंग से बच्चों को पढ़ाती है। बिहार ऐसे हिंदीभाषी राज्य में श्वेता एवं उनके जैसे बहुतों की यह आम समस्या हैं किंतु सभी श्वेता की तरह तत्परता नहीं दिखाते। “FACON DE PARLER” ने न सिर्फ श्वेता के प्रयास को मुकाम दिया बल्कि उनकी तरह ही अपने बहुत से सदस्यों को बेहतर बनने में मदद की।

आज की इस भाग-दौड़ की ज़िंदगी में वक़्त कम पड़ने लगा है। जिंदगी एक रेस बन चुकी है, जिसमे हर कोई भाग रहा है, पीछे रह जाने का डर, लोगों को भागने को विवश कर रहा है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में जो श्रेष्ठ या बेहतर होते हैं वही चुनौतियों को अवसर में तब्दील कर पाते है, किन्तु श्रेष्ठ या बेहतर बनना भी एक चुनौती ही है। बेहतर होने का तात्पर्य व्यक्तित्त्व विकास से है जिसके लिए समय के साथ खुद को अपडेट करके ही प्रतिस्पर्धा में बना रहा जा सकता है। आंशिक असफलता हताशा व निराशा को जन्म देती है जो बढ़कर अवसाद का रूप ले लेती है। ऐसे वक़्त में अपने आपको बेहतर बनने का एक निशुल्क मंच, आपकी सुविधानुसार समय के साथ मिले तो क्या आप जाना नहीं चाहेंगे?

आइए जानते क्या है “FACON DE PARLER”?

“FACON DE PARLER” एक विभिन्न आयु वर्ग के लोगों का ऐसा समूह जिसमे छात्र, छात्राएं, महिलाएं और पुरुष भी है जो सामूहिक रूप से अपने आपको बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। इस समूह की खासियत इसकी विविधता ही है जो इसे अरसे से जीवंत बनाये हुए है। 80 के दशक से चल रहे इस समूह के सदस्यों का आपसी ताल-मेल काफी बेहतर है। समूह एक संयुक्त परिवार की तरह है जो सप्ताहांत में एक स्थान पर इक्कट्ठा होता है, भिन्न-भिन्न मुद्दों पर चर्चा, वाद-विवाद करते है, जिसमे हर सदस्य बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। समूह चर्चा के पश्चात हर एक सदस्य को पूरे समूह को अपने विचार से अवगत करवाना होता है। इस पूरी गतिविधि से सदस्यों की भाषा बेहतर, तर्क-वितर्क से ज्ञान में वृद्धि होती है।

इस समूह में माँ-बेटा, माँ-बेटी कर पिता-पुत्र भी आते है। सभी सदस्यों की ऊर्जा देखने लायक होती है। एक ओर, किसी विषय पर युवा नजरिया अपने प्रखर अंदाज में अपना पक्ष रखता है तो वहीं दूसरी ओर प्रौढ़ एवं परिपक्व सदस्य अपने अनुभव का सारांश, युवा जोश को नसीहतों के रूप में व्यक्त करता हुआ दिखता है। वर्तमान में यह समूह तीन पीढ़ियों की सोच का समायोजन है। समय के साथ-साथ समूह के सदस्यों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है।

समूह चर्चा को रोचक बनाने के लिए समसामयिक विषयो पर चर्चा किया जाता है ताकि सभी के सामान्य ज्ञान में वृद्धि हो एवं समूह-चर्चा की रोचकता भी बनी रहे। सभी सदस्यों की ऊर्जा को बरकरार रखने के लिए चर्चाओं के मध्य में चाय का दौर भी चलता है।

इस समूह का सबसे युवा सदस्य शुभादित्या दत्ता जहाँ 6 वर्ष का है, वही इसके संस्थापक विजय सिन्हा 70 वर्ष के है। इस समूह में ज्यादातर महिलाएं कामकाजी है जिनमे शिक्षिकाओ की बाहुल्यता है, वहीं कुछ सदस्य विभिन्न स्कूल के छात्र है तो कुछ कॉलेज की दहलीज पर भी है तो कुछ भिन्न-भिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले भी है और कुछ सदस्य तो सरकारिकर्मी भी है। समाज के विभिन वर्गों के प्रतिनिधियों का समूह है “FACON DE PARLER”। कुछ सदस्य तो ऐसे है जो अपने स्कूल लाइफ से यहाँ रहे है, तो सबसे नया सदस्य 6 माह पूर्व से जुड़ा है। आइए समूह के सदस्यों से उनका अनुभव जानते है-

18 वर्षीय शाश्वत जो कि ग्यारहवीं का छात्र है ने बताया

मैं डेढ़ सालों से अधिक समय से यहां आ रहा हुँ और यह मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। यहाँ आने से मेरी भाषा काफी बेहतर हुई है व मैं पूर्व से बेहतर और अधिक आत्मविश्वास से इंग्लिश बोल पाता हूँ।

वहीं संतोष जो कि सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे है ने कहा

मैं यहाँ तब से आ रहा हुँ जब मैं स्कूल में था, यहाँ आने से ही मेरी भाषा बेहतर हुई है। FDP जैसे सार्थक एवं विशिष्ट पहल को शहर के हर मोहल्ले में होना चाहिए।

स्वेता मानवी जो कि पेशे से एक शिक्षिका है और लगभग 2 सालो से यहाँ आ रही है ने अपना अनुभव हमारे प्रतिनिधि से साझा करते हुए कहा “यहाँ आकर मुझे काफी खुशी महसूस होती है जिसे मैं शब्दो मे बयान नही कर सकती  हुँ। FDP व विजय सर ही है जिनके कारण मैं आत्मविश्वास से इंग्लिश बोल पाती हूँ।” उन्होंने आगे कहा”मैंने देखा है कुछ सदस्य ऐसे भी है जो शुरुआत में संकोच एवं हिचकिचाहट के कारण कुछ बोलते नहीं है किंतु थोड़े वक़्त के बाद ही वो अपने विचार साझा करने लगते है, यह देखना एक सुखद एहसास होता है।”

कुमारी श्वेता जो कि एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है अपनी 13 वर्षीय पुत्री ‘सारा’ के साथ यहां आती है, ने कहा” मैंने यहाँ आकर इंग्लिश बोलना सीखा है, इस कारण मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ा है और  मुझे FDP आना अच्छा लगता है।”

वही ‘सारा’ जो कि पिछले तीन सालों से यहां आ रही है ने कहा “FDP मेरे लिए एक जीवन बदलाव वाला अनुभव है, व्यक्तित्त्व व शब्दकोश इन सभी में एक खुशनुमा बदलाव हुआ है।”

42 वर्षीय संजीव कुमार जो सरकारी कर्मी है और पिछले 3 सालों से यहाँ आ रहे है उनका यह मानना है यह समूह सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण है जहां समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

हमारे प्रतिनिधि से बात-चित के क्रम में इसके संस्थापक विजय सिन्हा जी ने ‘FACON DE PARLER’ की प्रेरणा के संबंध में बताया “अरसा पहले कॉलेज जाने वाले कुछ छात्रों ने मुझसे संपर्क कर व्यक्तित्व एवं भाषा के विकास के लिए कुछ करने की बात की थी, उसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने 80 के शुरुआती दशक में इसकी नींव रखी। उस वक़्त से ही प्रत्येक शनिवार शाम यह शैक्षणिक गतिविधि करते आ रहे है है।

एक समय यह समूह अपनी मैगज़ीन भी प्रकाशित करता था, कुछ बड़े नाम इसके प्रायोजक भी होते थे, वक़्त बदला, शहर का मिजाज भी बदला किन्तु इस समूह की फ़िज़ा में कोई बदलाव नहीं आया, तारीफ की बात यह है कि कितनों की ज़िंदगी मे प्रकाश लाने वाला यह समूह आज भी उसी ‘तेवर और कलेवर’ के साथ कायम है।

विजय सिन्हा जी एक सेवानिवृत्त केंद्रीय अधिकारी है और सेवानिवृत्ति के बाद से वो इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखते है। उनका यह मानना है कि ज्ञान बांटने या साझा करने से बढ़ती है, “FACON DE PARLER” के माध्यम से वो यही कोशिश कर रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समूह में हर किसी का स्वागत है जो खुद के व्यक्तित्व व भाषा को बेहतर बनाने के लिए इच्छुक है। यह सेवा बिल्कुल निशुल्क है।

 

बहादुरपुर की तरफ से ओवरब्रिज की शुरुआत के बायीं ओर स्थित बिल्डिंग के फ्लैट संख्या 191 में तीसरे तल्ले पर ‘FACON DE PARLER’ स्थित है। उसकी गूगल लोकेशन नीचे अंकित है:-

https://goo.gl/maps/1Df1V5o21TK2

आज का रिपोर्टर सलाम करता है श्री विजय सिन्हा के इस जज्बे को जो उम्र के इस दौर में भी इतनी ऊर्जा से समाज के विभिन्न लोगों के जीवन रोशन कर रहे है। समाज को जरूरत है ‘FACON DE PARLER’ जैसे पहल की जिनसे समाज मे बदलाव हो और ऐसे सार्थक प्रयासों को जरूरत है समर्थन, सहयोग एवं सराहना की। हम 80 के दशक से चले आ रहे इस पहल की अनवरत रूप से चली आ रही इस समूह की सफलता की कामना करते हैं। पटनावासियों से आग्रह करते है कि वो ऐसे पहल को सफल बनाने के लिए आगे आएं और अपने आस-पास को ऐसा करने के लिए उत्साहित करे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इस प्रकार का मौका और वो भी निशुल्क मिल रहा है तो जरूर लाभ उठाएं और खुद को बेहतर बनाये।

‘FACON DE PARLER’ के सभी सद्स्य भी धन्यवाद के पात्र है जो तमाम व्यस्तताओं के बाबजूद भी इस समूह को जीवंत बनाये हुए है।

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