IBPS RRB Scale I, II & III Mains Examination कल

IBPS RRB स्केल I, II और III की मुख्य परीक्षा कल होने वाली है, हज़ारो की संख्या में परीक्षार्थी अपना भाग्य आजमाने के लिए परीक्षा में बैठेंगे। जैसे-जैसे IBPS की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने की ओर होता है वैसे-वैसे उसका हर चरण पहले से मुश्किल होता जाता है, तो ऐसे में प्रतिभागियों को ज्यादा सजग और मेहनत करनी चाहिए। वैसे भी बढ़ती प्रतियोगिता का स्तर और लिखित परीक्षा का बदलता पैटर्न प्रतिभागियों की राह और मुश्किल कर देता है। इसका एक मात्र समाधान यह है कि मनोयोग और निरंतर लिखित परीक्षा की तैयारी और ज्यादा से ज्यादा अभ्यास किया जाय, तभी इसे साधा जा सकता है। और हाथ आये हर मौके को अंतिम मौका समझ कर अपना सर्वस्व झोंक कर उस मौके को सफलता में तब्दील करने का प्रयास करना चाहिए, क्या पता फिर उस मौके के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े।

मुख्य परीक्षा में उतीर्ण परीक्षार्थियो को अगला चरण ‘व्यक्तिगत साक्षात्कार’ से  गुजरना पड़ता है। यह IBPS के भर्ती प्रक्रिया का एक अहम प्रारूप होता है यहाँ पर किया गया एक चूक, परीक्षार्थियों की लंबी मेहनत पर पानी फेर देता है। सामान्यतः यही बात देखी जाती है कि परीक्षार्थी साक्षात्कार को हल्के में लेते है, जबकि लंबी साधना और मेहनत के उपरांत लक्ष्य के इतना नजदीक पहुचने पर इस स्तर पर तो और भी efforts लगाना चाहिए, क्योकि यहां तक पहुँचने के लिए सफर फिर नए सिरे से शुरू करना होगा। प्रतिभागीयों में ऐसा भी देखा जाता है की वो अपने लिखित परीक्षा के परिणाम का इंतज़ार करते है और फिर जब परिणाम आता है तभी सक्रिय होते है। ऐसी स्थिति में उन्हें काफी कम वक्त मिलता है और इसी सीमित वक़्त में उन्हें काफी कुछ करना होता है। जबकि देखा जाय तो लिखित परीक्षा की ही तरह साक्षात्कार के लिए की गई तैयारी कही न कही आने वाले भविष्य में आपको निजी और सार्वजनिक क्षेत्र ही नही व्यव्हारिक जीवन में भी काफी बेहतर बनाता है।

आईबीपीएस कुल रिक्तियों की संख्या से तीन गुना, यानी मुख्य परीक्षा में सफल लगभग 4500 उम्मीदवारों को साक्षत्कार के लिए बुलाया जाएगा। मेधावी प्रतिभागी ही प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा रूपी बाधायों को साध कर यहाँ तक पहुचते है इस कारण प्रतियोगिता और मुश्किल हो जाती है, इस स्तर पर आपको अपना सर्वक्षेष्ठ प्रदर्शन देना होता है। अक्सर कई उम्मीदवार साक्षात्कार रूपी इस बाधा को पार नहीं कर पाते हैं जिसके कई कारण होते हैं, मुख्यत:

अनुचित कम्युनिकेशन स्किल्स, आत्मविस्वास की कमी, उपयुक्त व्यवहार का अभाव, किसी अनुभवी या विशेषज्ञ की सलाह न लेना आदि।

हिंदीभाषी क्षेत्रो में एक मिथक यह भी है की साक्षात्कार के लिए आपको अच्छी अंग्रेजी आनी ही चाहिए और सामान्यतः इन क्षेत्रों में प्रतिभागियों में इसका अभाव होता है। अच्छी और धाराप्रवाह अंग्रेजी नही बोल पाने की नकारात्मक सोच के प्रभाव से उनके आत्म-विस्वास में कमी या हीनभावना आती है जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव साक्षात्कार के दौरान आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।

गत वर्ष ‘Simplify Career‘ संस्थान के बच्चों ने IBPS PO, IBPS RRB तथा SBI-PO और Bank Of Maharashtra में शत-प्रतिशत सफलता हासिल की। इस संस्थान के प्रमुख trainer ताजदार अमान जी ने बात-चीत के संदर्भ मैं बताया कि बिहार व उसके आस-पास के बच्चों में मेधा की कमी नही होती, जरूरत होती है तो सिर्फ उन्हें पोलिश करने की ताकि वो इंटरव्यू में आतविश्वास से परिपूर्ण हो। इंटरव्यू बेसिक्स पर काम करते हुए परीक्षार्थियों को इंटरव्यू मॉड्यूल को समझाना, एक इंटरव्यूअर की एक उम्मीदवार से एक्सपेक्टशन आदि बुनियादी चीज़े बताई जाती है। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू में भाषा,बॉडी-लैंग्वेज, ऑय-कांटेक्ट आदि अहम रोल प्ले करते है, और हमे एज अ ट्रेनर इन्ही चीज़ों पर काम करना होता है। टीम पैनल में एक साइकोलोजिस्ट के होने से छात्रों के मनोभावों, बॉडी-लैंग्वेज पर काम करना आसान हो जाता है, ऑडीओ-वीडियो मॉक इंटरव्यू से बच्चों में हिचक भी मिट जाती है और वो अपने इंटरव्यू में सहज रहते है। उनका आईबीपीएस आरआरबी के उम्मीदवारों को सलाह है की इंटरव्यू के लिए आप उसी भाषा का इस्तेमाल करें जिसमे आप सहज हैं, और अपनी बाते साफ़ साफ़ समझा सके।

Banking टेस्ट प्रेप के क्षेत्र में बिहार के जाने माने संस्थान ‘संधान’ के संचालक श्री नीती चौबे का कहना है की “छात्र प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की तैयारी तो करते हैं, किन्तु इंटरव्यू का वेटेज कम होने के वजह से इसको इग्नोर कर देते हैं, जबकि कई छात्र जो बॉर्डर-लाइन कटऑफ पर होते हैं, इंटरव्यू के अच्छे मार्क्स से ही उनका चयन सुनिश्चित हो पाता है।” उन्होंने अपने संस्था की एक छात्रा सुनीता (बदला हुआ नाम) का उदहारण देते हुए बताया की आरआरबी के इंटरव्यू में प्राप्त 87 मार्क्स के वजह से ही आज वो बैंक में ऑफिसर बनने का सपना पूरा कर पायी है। उन्होंने ये भी कहा कि इंटरव्यू की तैयारी भी पेशेवर टीम के द्वारा ही करवाना चाहिए जैसे कि उनके संस्थान में होता है। इसके लिए बाकायदा उन्होंने कुछ पेश्वरो को ही अनुबंधित कर लिया है जिनकी टीम में अनुभवी और युवा, वर्तमान बैंककर्मी और ex- IBPS पैनलिस्ट के होने से वो इस को पेशेवर ढंग से कर पाते है। उन्होंने दावा किया कि उनकी टीम ने शत-प्रतिशत सफलता हासिल की।

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सुश्री राजलक्ष्मी प्रकाश जो की वर्तमान में SBI में पीओ के रूप में कार्यरत हैं, बताया कि अपने एक सीनियर (जो कि पंजाब नेशनल बैंक में कर्मी है) के सलाह पर इंटरव्यू की तैयारी मेंस एग्जाम के तुरंत बाद कर दी थी, नतीजन वो जीडी और इंटरव्यू के दौरान बहुत सहज रही और काफी अच्छा स्कोर किया। कई छात्र मेंस के रिजल्ट आने का इंतज़ार करते हैं, फिर अचानक उनके पास समय के अभाव से तैयारी सही नहीं हो पाती है जिसका खामियाजा उन्हें इस लेवल पर असफल होकर भरना पड़ता है।

मुख्य परीक्षा में उम्मीदवार कॉल लेटर और अपनी एक वैलिड फोटो, एग्‍जाम हॉल लेकर जानी होगी। परीक्षा के दौरान सयंमित रहे, तल्लीनता से समय का ध्यान रखते हुए अपने जवाब दे आज का रिपोर्टर की टीम की तरफ से IBPS Mains exam के सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाये।

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