फिल्म समीक्षा : रेस की दौड़ से बाहर हो गई रेस 3

आज का रिपोर्टर के द्वारा रेस 3 को दी गई रेटिंग – 10/4

कहने को तो सलमान खान का नाम ही किसी भी फिल्म को हिट साबित करने के लिए काफी है, लेकिन क्या वाकई में 52 वर्षीय इस अभिनेता में अब उतना दम खम बचा है जो हिट फिल्मों के अलावा इक्का दुक्का बेहतरीन फिल्में भी दे सकें। रेस सीरीज की आई हुई तीसरी फिल्म  Race 3 से लोगों को बड़ी बड़ी उम्मीदें थीं। लोगों को लग रहा था कि सलमान खान के आने से इस फिल्म में चार चांद की बजाय बहत्तर चांद लग जाएंगे लेकिन फिल्म की कहानी और इसका निर्देशन फिसड्डी निकला। कहानी की शुरुआत से लेकर अगर हम इसे अंत तक विस्तार पूर्वक समझाएं तो फिल्म को समझने में बेहतरी होगी।

फिल्म की कहानी – 

इस फिल्म की कहानी को देखकर लगता है कि इसे काफी पहले ही लिखा गया होता तो ये हिट होती। हॉलीवुड की फिल्मों का कॉंसेप्ट अपनाते हुए इस फिल्म की कहानी को भारतीय अंदाज में कहा गया है। फिल्म की शुरुआत शमशेर सिंह( अनिल कपूर) की पारिवारिक कहानी सुनाते हुए शुरू होती है। जिसमें उनके बच्चों संजना (डेज़ी शाह) और सूरज (साकिब सलीम) का जिक्र होता है। और सिकंदर (सलमान खान)  शमशेर सिंह की सौतेली संतान है। यश (बॉबी देओल) सिकंदर का बॉडीगार्ड है। जेसिका (जैकलिन फर्नांडीज़) सिकंदर की प्रेमिका है और इन सब का दुश्मन  राणा (फ्रेडी दारूवाला) है। शमशेर सिंह का अलशिफा में हथियार बनाने का अवैध कारखाना है। आपको पता ही होगा कि रेस सीरीज फिल्मों की खासियत यह है कि, यहां पर जो जैसा दिखता है, असल में वो वैसा होता नहीं है, सबके चेहरे के पीछे एक मुखौटा लगा होता है। शमशेर सिंह को भारत के कुछ मंत्रियों की ऐसी तस्वीरें मिलती हैं जिसमें वे मंत्री रंगरलियां मनाते हुए दिख रहे होते हैं। रंगरलियां मनाते हुए एक वीडियो ड्सिक भी है जो कि एक बैंक लॉकर में रखा गया है शमशेर चाहता है कि सिकंदर उसके लिए लॉकर से वीडियो की डिस्क चुरा कर लाए। ताकि शमशेर मंत्रियों को ब्लैकमेल कर सके।

अब सारी कहानी इसी उठापटक के बीच पड़ी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह सामने आता है कि जब शमशेर को मंत्रियों की रंगरलिया मनाते हुए फोटो मिल गई है तब वीडियो की डिस्क चुराने की जरूरत क्यों आन पड़ी ? इसके बाद वीडियो डिस्क चुराने वाला सीन भी इतना बेदम था कि उसमें कोई रोमांच नहीं दिखा अगर लॉजिक की बात जाए तो विदेश की सड़कों पर धड़ल्ले से बम, बारूद, गोली, कट्टा, बंदूक चल रही है और वहां किसी के कान में जूं तक नहीं रेंग रही यह सीन भी काफी हास्यापद रहा।

निर्देशन ने भी बिगाड़ा खेल – 

रेस 3 को लेकर जब रेमो डिसूजा का नाम सामने आया था तभी रेस सीरीज के प्रेमियों को यह बात सताने लगी थी कि फिल्म का हिस्सा कैसा होगा और फिल्म के आने के बाद यह चिंता जायज लग रही है। इतने बड़े बजट की फिल्म और सलमान खान, अनिल कपूर आदि के स्टारडम को संभालने में रेमो डिसूजा नाकामयाब निकले और उन्हें बहुत बड़ी उपलब्धि गंवा दी। रेमो डिसूजा के निर्देशन से लगता कि वह ABCD के निर्देशन के लिए ही ठीक हैं।

लेखन ने भी दिखाई कमजोरी – 

सिराज अहमद का लेखन भी काफी कमजोर रहा उन्हें लगा कि दर्शकों को बीच-बीच में चौंका कर उन्हें फिल्म से लगातार जोड़ा जा सकता है। लेकिन बार-बार चौंकाने वाले सीन की वजह से चौंकने का मजा ही खत्म हो गया। फिल्म की स्क्रिप्ट को भी अपने कंफर्ट के हिसाब से लिखा गया जब मन में आया जो आया वह डाल दिया गया और बाद में उसे किसी तरीके से एडजस्ट कर दिया गया। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो लेखक ने रेमो डिसूजा का साथ ठीक से नहीं दिया नहीं फिल्म कुछ हद तक बेहतरीन होने की लिस्ट में जाती हुई नजर आती।

सिनेमेटोग्राफी ने बचाई फिल्म की इज्जत – 

अगर प्लस पॉइंट के हिसाब से बात करें तो फिल्म की सिनेमेटोग्राफी ने इस फिल्म की इज्जत को बचा लिया। कुछ एक्शन सीन के कारण फिल्म अच्छी दिखी और 3D में देखने के कारण इस का मजा और भी बढ़ गया जिसकी वजह से दर्शक सिनेमाघर में रुके रहे। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी अच्छा रहा है।

एक्टिंग करने में सबने की कॉमेडी –

52 साल के हो चुके सलमान खान शर्ट उतारने से पीछे नहीं हटे और उन्होंने रेस 3 में भी शर्ट उतारी। उन्हें रेस 3 में उनके स्टारडम के हिसाब से सीन नहीं मिले और ना ही रेमो डिसूजा ने सलमान से उनके स्तर की कोई दमदार एक्टिंग करवा पाई। बॉबी देओल ने जितनी मेहनत बॉडी बनाने में कि अगर उन्होंने इतनी मेहनत एक्टिंग करने में की होती तो शायद उनका किरदार देखने लायक हो जाता। हमेशा की तरह मुस्कान लिए हुए वह रेस 3 में भी शरमाकर मुस्कुराते हुए नजर आए जहां पर भी उनकी मुस्की नहीं रुक रही थी। जैकलिन फर्नांडीज़ और डेजी़ शाह में तो मानो शर्त लगी थी कि सबसे घटिया एक्टिंग करके कौन दिखाएगा। डेज़ी शाह के डायलॉग डिलीवरी को सुनने के बाद हंसी छूट जाती है। अनिल कपूर ही अपने किरदार को निभाते हुए ठीक नजर आए। राणा के नाम पर फ्रेडी दारूवाला का नाम दहशत बनाने के लिए दिखाया गया लेकिन उन्हें मुश्किल से गिने चुने सीन ही करने को मिलें। अगर साकिब सलीम की बात की जाए तो उन्हें फिल्म में ना भी रखा जाता है तो भी उससे फिल्म को कोई नुकसान नहीं था।

हीरिये को छोड़ कामचलाऊ गानों की भीड़़ – 

फिल्म में गानों को बेवजह रखा गया है। लंबे – लंबे गाने फिल्म को बोझिल बना देते हैं और एक वक्त ऐसा आता है जब यह गाने ब्रेक का काम करते हुए नजर आते हैं। फिल्म में केवल हीरिए गाना ही अच्छा लगता है। रेमो डिसूजा एक बेहतरीन कोरियोग्राफर है लेकिन उनकी ही फिल्म में गानों की कोरियोग्राफी दमदार नहीं है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो अब्बास-मस्तान की जोड़ी फिल्म में जो रोमांच देती थी और सैफ अली खान कि जो एक्टिंग रेस सीरीज की फिल्मों में देखने को मिलती थी वह Race 3 में पूरी तरीके से नदारद है। अगर फिल्म में सलमान खान न होते तो यह फिल्म बुरी तरीके से ब्लॉकबस्टर सुपर डुपर फ्लॉप साबित होती। सलमान खान के स्टारडम के बदले ही फिल्म ने पहले दिन 29 करोड़ का बिजनेस कर पाया है । लेकिन अगर सलमान खान ऐसे ही फिल्में देते रहे तो एक वक्त ऐसा भी आएगा जब दर्शक उन्हें नजरअंदाज कर देंगे।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram