बेटे अरबाज़ के बचाव में समझदार सलीम खान ने सनकपन वाली बात कह डाली

शुक्रवार को गिरफ्तारी और शनिवार को आईपीएल में सट्टेबाज़ी करने का आरोप कबूलने वाले अभिनेता -निर्देशक अरबाज़ खान को अब पुलिस कार्यवाही में शामिल होकर अपना सहयोग देना होगा | बता दें कि अरबाज़ ने न केवल यह स्वीकारा वह पिछले कई साल से आईपीएल में सट्टेबाज़ी कर रहा था और उसमे एक बड़ी रकम गंवाई बल्कि इसकी वजह से उनका वैवाहिक जीवन भी प्रभावित हुआ हालाँकि अब दोनों का तलाक़ हो चुका है|

अब इस मामले में परिवार की तरफ से उनका बचाव करने खुद उनके पिता सलीम खान सामने आये है जो बॉलीवुड के टॉप लेखक रह चुके है | यूं तो खुद सलमान द्वारा ट्वीट करने पर उनको लताड़ लगाने वाले सलीम खान इस बार इतने बड़े झटके या कहे तो इतने भौकलाहट में दिखे कि उन्हें समझ ही नहीं आया होगा कि वह क्या सनकपन की बात कर देंगे  |

सलीम खान ने तलाक़ के पीछे सट्टेबाज़ी को वजह मानने से साफ़ इंकार दिया तो वहीँ क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को लीगल यानी कानूनी करने की वकालत कर डाली और उनका तर्क था कि इस देश में जुआ चलता है , घोड़े की रेस होती है , लाटरी भी ठीक है तो क्रिकेट में सट्टेबाज़ी ईलीगल क्यों है ? क्या इससे सरकार को मोटा टैक्स बदले में नहीं मिलेगा ? गैर -कानूनी होने के बाद भी इसमें बड़े लोग शामिल है तो इसको क्यों रोका जाता है ?

सलीम खान ने आगे कहा – ” गिरफ्तार हुए सटोरिये सोनू जालान का लिंक अफ़ग़ानिस्तान ,साउथ अफ्रीका ,पाकिस्तान , सऊदी अरब से जुड़े है तो सिर्फ मेरे बेटे का नाम क्यों आ रहा है ? क्या उसके पास इतने पैसे है कि सोनू की दुकान उसी के दम पर चल रही है जबकि अरबाज़ के ऊपर उसकी उधारी थी ?”

बता दें कि ठाणे की एआईसी टीम पिछले 5 से भी अधिक सालों से आईपीएल से जुड़े सट्टेबाज़ी रैकेट की जांच कर रही है और शुक्रवार को अरबाज़ खान को समन मिलने के बाद जब उन्हें शानिवार को पूछताछ में सोनू जालान के सामने बैठाकर सवाल -जवाब किये गए जिसमें अरबाज़ ने आईपीएल में सट्टेबाज़ी और पैसे गंवाने की बात कबूल की जिसके बाद उधारी होने पर सोनू जालान उसे फ़ोन पर धमकाता था |

अभी पुलिस आधिकारिक तौर पर कुछ कहने से बच ज़रूर रही है लेकिन सूत्र अरबाज़ के कबूलनामे को पक्का मान रहे है और जांच करके पूरी कड़ियाँ जोड़ने पर पुलिस मीडिया को आधिकारिक तौर पर कुछ बताएगी इसकी भी उम्मीद जताई जा रही है |

एक पिता के लिए एक बेटे के बाद दूसरे बेटे पर आई कानूनी विपत्ति के बाद स्थिर रहना बेहद कठिन होता है और उनकी नकारात्मक मनोदशा को भी समझा जा सकता है  लेकिन ऐसी हालत में समझदारी यही होती कि वह कानूनी तरीके से अपनी लड़ाई लड़ते हुए बेटे को बचवाते न कि सनकपन की बात करते हुए सट्टेबाज़ी को लीगल करने पर बयानबाज़ी करते हुए दिखते |

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