मिस वर्ल्ड बनने के लिये मानुषी को करने पड़े यह 3 समझौते

आज हम आपको मानुषी छिल्लर की सफलता की ऐसी कहानी बताने जा रहा है, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। आपको बताएंगे कि कैसे उन्हें मजबूर होकर कुछ ऐसा समझौता करना, ताकि वह मिस वर्ल्ड बन सकें।

कौन है मानुषी छिल्लर?

पूरी दुनिया को अपनी खूबसूरती का लोहा मनवाने वाली मानुषी के उन 3 समझौतों को जानने से पहले आइये जानते हैं, उनकी पूरी कहानी। 14 मई 1997 का वह दिन डॉ. मित्र बासु छिल्लर कभी नहीं भूल सकते जब उनके घर किसी बच्चे की किलकारी गूंजी थी। वे फुले नहीं समा रहे थे, वजह थी, डॉ. नीलिम छिल्लर द्वारा एक गुड़िया को जन्म देना। जैसा की हम सभी जानते हैं की होनहार बिरवान के होते चिकने पात। वैसे ही मानुषी छिल्लर की पहचान होनहार मेधावी छात्र एवं सटीक हाजिरजवाब बालिका के रूप में हो रही थी। दोनों दम्पतियों ने महसूस किया की यह कोई साधारण बालिका नहीं है, बड़े ही लाड़-प्यार से उसे पाला और बेहतर संस्कार दिए। जिस कारन मानुषी का हर परीक्षा में अव्वल आना और इधर कुचिपुड़ी जैसे कठिन नृत्य में पारंगत होने की प्रक्रिया साथ-साथ चल रही थी। दिन बीतते गए और उसने सेंट थॉमस स्कूल से पढाई पूरी कर bps मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। मानुषी का सपना एक सफल हार्ट सर्जन बनना है। लेकिन कला, साहित्य और फैशन के शौक़ीन परिवार ने उन्हें मॉडलिंग की तरफ जाने के लिये आकर्षित किया। उस समय किसी को पता नहीं था कि मेडिकल कॉलेज में साधारण सी दिखने वाली यह लड़की ग्लैमरस की दुनिया में धूम मचा देगी।
मानुषी छिल्लर ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने के लिए सबसे पहला समझौता अपने आराम और डायट से किया। जिस कारन डॉक्टरी की पढाई के साथ ही पहला ख़िताब मिस हरियाणा का अपने नाम कर लिया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित फेमिना मिस इंडिया का ताज भी 25 जून 2017 को अपने सर पर सुशोभित करवा कर दम लिया। इस प्रतियोगिता में जब निर्णायक मंडल ने उनसे पूछा कि 1 महीना यहाँ बीताने के बाद आप क्या सबक लेकर वापस जाएँगी ? मानुषी ने बड़ा ही सुन्दर जवाब दिया कि उनके अंदर एक ऐसा दृष्टिकोण विकसित हुआ है, जिससे वह दुनिया बदल सकती है।

इसके बाद दूसरा समझौता उन्हें तब करना पड़ा जब ग्लैमरस की दुनिया छोड़कर लगभग 20 गाँव में 5000 महिलाओं से मिली, उनके बीच घुल-मिलकर उनके दर्द को जाना एवं पीरियड और स्वच्छता के बारे में आवश्यक जानकारी दी। उनके इस कार्य से उनके खुद के व्यक्तित्व और लोगों के नजरिये में विकास हुआ। समाज के लिये कुछ करने की प्रेरणा का बोध हुआ।

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इसी दौरान मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता शुरू हो गई और उन्हें करना पद गया, अपना तीसरा समझौते। अपने मेडिकल की पढाई (दूसरा साल) को 1 साल ड्राप करने का। उनके अंदर एक जज्बा और विश्वास था कि यदि मन से प्रयास करो तो खुदा भी मिलता है और यह तो सिर्फ एक प्रतियोगिता है। फिर जब मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का परिणाम आया तो सब आश्चर्यचकित थे, क्योंकि 2000 ई. में प्रियंका चोपड़ा के इस पुरस्कार के जीतने के 16 साल बाद कोई मिस वर्ल्ड बनी थी तो उसका नाम मानुषी छिल्लर था। यह उसके हिम्मत, लगन और जज्बे का परिणाम था।

इसके बाद तो जैसे भूरे आँखों वाली इस सुंदरी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हरियाणा सरकार ने एनीमिया फ्री कैंपेन का ब्रांड एम्बेसडर बनाने के साथ ही उनके “ब्यूटी विद् अ परपज” परियोजना ‘शक्ति’ को 18 करोड़ का सरकारी अनुदान भी दिया। इसके साथ ही CNN-IBN Indian of the year पुरस्कार में विशेष अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित भी किया।
आज का रिपोर्टर.कॉम से बात करते हुए मानुषी ने अपनी सफलता का राज़ साझा किया। उन्होंने बताया कि मैंने हमेशा अपना बेस्ट दिया और बाकी ईश्वर पर छोड़ दिया। वहीँ बॉयफ्रेंड के सवाल पर मुस्कुराते हुए कहा कि फिलहाल तो कोई नहीं है, लेकिन मेरी जिंदगी में जो भी आएगा उस बन्दे में सेंस ऑफ़ ह्यूमर और इंटटेलिजेंट ब्रेन होना चाहिये।

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