कार्तिक की कोलकाता में कितना है दम

जब इस सीजन से पहले दिनेश कार्तिक को कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपने पाले में लाया और कप्तान नियुक्त किया जिसकी वजह थी गौतम गंभीर का दिल्ली के साथ बतौर कप्तान चले जाना तो सब ने इसे सुसाइडल फैसला करार दिया और यहाँ तक कि भविष्यवाणी हो गयी थी कि टीम बॉटम ऑफ़ दा टेबल पर खिसक जाएगी लेकिन शनिवार को हैदराबाद सनराइज़र्स को हराने के बाद कार्तिक एंड कंपनी ने अपने आलोचको को करारा जवाब दिया है|

लीग की शुरुआत से ही उसके पास क्रिस लीन , आंद्रे रसेल की फिटनेस की समस्या और सुनील नारिने जैसे स्टार बॉलर के नए एक्शन की दिक्कतें थी लेकिन अपने प्रेरणादायी कप्तान कार्तिक की लीडरशिप में पर्पल ब्रिगेड ने सभी मुसीबतो का सामना करते हुए 14 मैचों में 8 जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया जिससे वह सबसे आगे हो चुकी है क्योंकि उसके पास अब 2 मौके होंगे प्लेऑफ में जाने के लिए इसलिए ज़रुरत है तो सिर्फ 1 जीत की और इंतज़ार करने की दूसरे टीम का जो उससे फाइनल में भिड़ेगी |

पहले बात करते है क्यों है कार्तिक कॅप्टेन्सी फैक्टर केकेआर के लिए सबसे उम्दा

दिनेश कार्तिक बतौर उप-कप्तान दिल्ली के लिए कुछ ख़ास नहीं कर पाए तो ऐसे में कोलकाता का जब उन्हें कप्तान बनाया गया तो सभी ने उन्हें हलके में लिया परन्तु लोग भूल गए की वह तमिलनाडु को डोमेस्टिक क्रिकेट में कैप्टेंसी कर चुके है और उसे कई खिताब जिताये है | इस बार दो मुख्य कारणों से उन्होंने अपना लोहा मनवाया है:

1 – अनुशासन परस्त

दिनेश कार्तिक उर्फ़ डीके हमेशा से ही एक रिज़र्व और अनुशासन पसंद खिलाड़ी रहे है और इसी को अपना मूलमंत्र बनाते हुए कार्तिक ने केकेआर की नयी और असंतुलित टीम को साथ बाँध के रखा और सभी के व्यवहार पर नज़र राखी कि वह खेल को गंभीरता से ले और अपनी ज़िम्मेदारी अच्छे से निभाई जिसके कारण सभी ने अपनी ज़िम्मेदारी समझी और टीम ने मिलकर परफॉर्म किया |

2 – प्रेरणादायी कप्तान

सिर्फ अनुशासन से काम नहीं चल सकता है इसलिए आपको बतौर कप्तान मिसाल बनना पड़ता है और वही कप्तान कार्तिक ने सामने से लीड करते हुए अपने प्रदर्शन द्वारा दिखाया है | इस सीजन आईपीएल में कार्तिक मध्यक्रम की रीढ़ बनते हुए 14 मैचों में 438 रन ठोके वह भी 54 की शानदार औसत से जिसमे कई मैच विनिंग पारियां रही है जिनसे प्रेरणा पाकर पूरी टीम ने प्लेऑफ तक का सफर तय किया है |

कोलकाता की कमज़ोरीयां

अस्थिर मध्यक्रम

जितनी अच्छी ओपनिंग जोड़ी उतना ही कच्चापन है कोलकाता के मध्यक्रम में क्यूंकि कप्तान कार्तिक के अलावा युवा शुभम गिल , नितीश राणा ,ईशान जग्गी या आंद्रे रसेल से स्थिरता की उम्मीद बेमानी है इसलिए सबको अपने रोल को समझते हुए फॉर्म में लौटना होगा |

पेस अटैक

ज़रूरी नहीं है कि जितना बड़ा नाम हो वैसा ही हमेशा प्रदर्शन हो और यही हाल है मिचेल स्टार्स -मिचेल जॉनसन की अगुवाई में फ़ास्ट बोलिंग अटैक में क्यूंकि यदि दोनों में से एक नहीं चलता या पिट जाता है तो आप शिवम् मावि और कमलेश नगरकोटी पर निर्भर नहीं रह सकते है |

कोलकाता की मज़बूतियाँ

शानदार स्पिनर्स

कोलकाता के पास आईपीएल के शानदार स्पिनर्स की तिगड़ी है -सुनील नारायण , पीयूष चावला, कुलदीप यादव। यह ऐसे स्पिनर्स है जो रन भी रोक सकते है और विकेट भी। एक दूसरे का भार भी संभाल लेते है जिससे टीम को फ़िक्र करने की ज़रुरत नहीं रहती।

टॉप कप्तान

ख़त्म हो चुकी उम्मीद से टीम को जगाकर सीधे प्ले -ऑफ में पहुंचाने देने वाले कप्तान है दिनेश कार्तिक जो खुद भी चले और टीम को अच्छे से चलाया जिससे अब तीसरी बार खिताब जीतने के लिए कोलकाता रेडी है |

होम एडवांटेज रहेगा

कोलकाता के लिए अपना होम ग्राउंड और भारतीय क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले ईडन गार्डन्स में नाइट राइडर्स को काफी मदद मिलती है फिर वह स्पिनर फ्रेंडली सपाट पिच हो या फिर कोलकाता वासियों का प्यार व अभिनन्दन | बात अगर प्ले ऑफ मैच बनाम राजस्थान करें तो यहाँ पर दोनों टीमों में पिछली बार काटें की टक्कर थी लेकिन ओवरआल कोलकाता ने ही जीत हासिल की है अधिक तो उम्मीद करते है कि कोलकाता यह मैच जीतकर खिताब को लेने के लिए तैयार होगी |

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