अब लेट इएमआई आई या क्रेडिट कार्ड का पेमेंट हुआ लेट तो लगेगा जीएसटी

बैंकिंग सर्विसेज पर जीएसटी लगेगा या नहीं इस पर भ्रांति की चादर हटी भी नहीं थी कि अब नहीं बात आने से सभी आम देशवासी सख्ते में आने को मजबूर है | अनिश्चिता के इस पहुदरे के बीच सोमवार को अप्रत्यक्ष कर बोर्ड और कस्टम विभाग ने नोटिस ज़ारी कर स्तिथि को क्लियर किया | इस नोटिस में साफ़ तौर पर बताया गया कि किस हालात में और किस बैंकिंग सेवाओं पर बैंक जीएसटी वसूल सकते है |

बैंकिंग सुविधा के सम्बन्ध में यह विवाद तब सबके सामने आया जब वित्त मंत्रालय के वित्तय सेवा विभाग एवं राजस्व विभाग के मुफ्त सेवाओं पर जीएसटी लगाने को लेकर अलग -अलग मत प्रकट हुए | इसके बाद अप्रत्यक्ष कर बोर्ड और कस्टम विभाग ने मसले को साफ तौर पर पेश किया |

विभाग द्वारा प्रश्न-उत्तर के रूप में ज़ारी नोट में कहा गया है कि बैंको द्वारा ग्राहकों को दी जा रही मुफ्त सेवाओं जैसे एटीएम , चेक बुक या स्टेटमेंट इत्यादि पर कोई भी जीएसटी नहीं लगेगा परन्तु कोई मुफ्त सेवा के अतिरिक्त किसी अन्य सेवा का उपयोग करता है तो उसके ऊपर गुड्स एन्ड सर्विसेज टैक्स देय होगा |

आइये आपको बताते हैं कि किन-किन सेवाओं पर यह कर लगेगा  : –

ज़्यादा एटीएम यूज़ किया तो 

ग्राहकों को 3 -5 बार प्रतिमाह एटीएम से मुफ्त में पैसे निकलने की छूट है लेकिन इस मुफ्त निकासी ने हटकर कोई निकासी हुई तो वह जीएसटी के दायरे में आएगा |

चेकबुक व स्टेटमेंट 

ग्राहकों को मुफ्त चेकबुक व स्टेटमेंट की सुविधा प्राप्त है लेकिन अब इस मुफ्त सुविधा से इतर कोई चेकबुक या स्टेटमेंट इशू करवाने पर आपको जीएसटी देना होगा |

क्रेडिट कार्ड द्वारा लेट पेमेंट 

क्रेडिट कार्ड से देरी से पेमेंट करनेवालों को दिक्कत होनी तय है क्योंकि अब उनके ऊपर भी जीएसटी लगेगा और देरी भुगतान की हालत में क्रेडिट कार्ड जब आउटस्टैंडिंग हो जायेगा तो उसके ब्याज के साथ जीएसटी भी वसूला जायेगा |

इएमआई में देरी हुई तो 

जीएसटी एक्ट 2017 के सेक्शन 15 (2) के तहत इस तरह के शुल्क के ऊपर जीएसटी लगेगा इसलिए किसी भी वजह से इएमआई देने में आपके द्वारा देरी होती है तो जीएसटी देने को तैयार हो जाइये |

आखिरी शब्द 

गुड्स एन्ड सर्विसेज टैक्स वास्तव में देश को एकसूत्री कर व्यवस्था में बांधकर टैक्स सरलीकरण का एक अनोखा मॉडल बनाने का कदम था जिसको लेकर सरकार ने खूब इवेंट मैनेजमेंट पीआर और मार्केटिंग की लेकिन अफसोसनाक बात है कि 2014 में 2 .36 लाख करोड़ के एनपीए यानी बैड लोन वाले बैंकिंग सेक्टर के पास आज 2018 में 9 लाख करोड़ से भी ज़्यादा का एनपीए है और अब 21 बड़े बैंको में से आधे तो बड़े लोन तक नहीं दे सकते , बैंकिंग कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी को लेकर हड़ताल पे हड़ताल कर रही है ,एटीएम में कभी भी पैसा गायब हो जाता है , पासबुक मशीने निकम्मी हो चली है  , नयी बैंकिंग नौकरियां आ नहीं रही वजह जिसकी साफ़ है -विजय माल्या ,मेहुल चोस्की , नीरव मोदी जैसे घोटालेबाज़ों का जनता की गाढ़ी कमाई को लेकर फुर्र हो जाना और सरकार का मुँह ताकते रह जाना और ऊपर पिछले सरकार पर अरूप मढ़कर खुद के द्वारा की गयी दिखावटी कार्यवाही की शोरबाज़ी |

ऐसे में जब सरकार को कोई भी आईडिया नहीं सुझा तो विनाश काले विपरीत बुद्धि के तर्ज़ पर पहले से 3 लाख करोड़ पैसे की मदद पा चुके बैंकिंग सेक्टर को आईसीयू की शय्या से बाहर लाने हेतु जन विरोधी प्रपंचो जैसे यह “जीएसटी ऑन नॉन-फ्री बैंकिंग सर्विसेज” पर लगाकर को पेश कर के किया जा रहा है जिससे रोषित जनता वोटों की गोली गिनना शुरू कर चुकी है इसलिए अभी भी वक़्त है सरकार आपकी है बचा सकते हो बचाइए वजीर -ए -आज़म साहब !

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