आपका बेटा भी बन सकता है कामयाब, यहाँ पढ़कर

टेक्नोलॉजी के इस दौर में शायद ही कोई होगा जो माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, मास्टरकार्ड के बारे में नहीं जानता होगा। इन तीनों ही टेक कंपनियों में एक बात कॉमन है, तीनो कंपनियों के ही सीईओ भारतीय है और उस से भी अधिक मजेदार यह है कितीनो कंपनियों की ही तरह उनके तीनो ही सीईओ में भी एक बात कॉमन है और वो यह है कि उन्होंने एक ही स्कूल से पढ़ाई की है। यदि आपको यह भी बताएं कि वह स्कूल भारत का और भारत मे ही है तो क्या? क्या आप उस स्कूल के बारे में जानना नहीं चाहेंगे? आपको कौतूहल नहीं होगा?

हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चे सबसे बेहतर शिक्षा मिले ताकि वो अपनी आने वाली जिंदगी की चुनौतियों एवं कड़ी प्रतिस्पर्धियों के लिए तैयार हो सके। उन्हें लगता है कि बेहतर शिक्षा के लिए उनके बच्चें सबसे प्रतिष्ठित व सबसे बेहतर स्कूल से पढ़े, किन्तु हर किसी के साथ ऐसा हो, संभव तो नहीं। कभी प्रतिभा तो कभी आर्थिक हालात के कारण यह संभव नहीं हो पाता। फिर भी, सवाल यह है कि सर्वश्रेष्ठ स्कूल कौन सी है? शहर ही नही,राज्य भी नहीं बल्कि पूरे देश की सर्वश्रेष्ठ स्कूल कौन सी है? इसके जवाब में सभी के उत्तर भिन्न-भिन्न होंगे, किन्तु हर जवाब का अपना एक आधार होता है, कभी अनुशासन तो कभी पढ़ाई तो कभी माहौल, किन्तु क्या यही किसी स्कूल को सम्पूर्ण बनाएंगे? तो फिर सर्वश्रेष्ठ स्कूल का क्या आधार होना चाहिए? आदर्श स्थिति में सर्वश्रेष्ठ स्कूल का मापदंड उस स्कूल छात्रों की सफलता का प्रतिशत ही होना चाहिए।

सफलता की परिभाषा भी विभिन्न लोगो के लिए भिन्न-भिन्न होती है, कभी नाम तो कभी पैसा, कभी सुकून तो कभी सेवा, कभी सम्मान तो कभी शांति महत्वपूर्ण होता है। फिर भी यदि आप किसी प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के सर्वेसर्वा (सीईओ) बन जाये या फिर किसी राज्य के मुख्यमंत्री, तो उन पदों के साथ उक्त सभी अपेक्षाएं पूर्ण हो जाती है।

आइए आपको प्रतिभाओं के देश के एक ऐसे विद्यालय की सैर पर ले चलते है जहाँ के पूर्ववर्ती छात्र सिर्फ उक्त तीनों ही कंपनियों के सीईओ नहीं बल्कि देश-विदेश में विभिन्न सम्मानित पदों पर आसीन है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण, मास्टर्कार्ड के सीईओ अजयपाल सिंह बंगा, विप्रो के सीईओ टी. के. कुरियन, पूर्व केंद्रीय नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी(16वें मुख्यमंत्री), मशहूर सेलिब्रेटी अभनेता राम चरण और नागार्जुन आदि इस स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र है। पूर्ववर्ती छात्रों की फेरहस्ति काफी लंबी है फिर भी उसकी सूची आपसे साझा कर रहे है(स्त्रोत-विकिपीडिया), किन्तु इस सूची को देख कर आप कह उठेंगे ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ से निकले छात्र सर्वश्रेष्ठ होते है।

निजामों के शहर ‘हैदराबाद’ में सन्  1923 से ही ‘हैदराबद पब्लिक स्कूल’ प्रतिभाओं को निखारने के कार्य कर रहा है। यह स्कूल हैदराबाद के बेगमपेट में स्थित है, इसकी स्थापना हैदराबाद के सांतवें निज़ाम ‘सर उस्मान अली खान’ के द्वारा नवाबों, जागीरदारों व अन्य अभिजात वर्ग के पुत्रों के लिए की गई थी। 1951 मैं  जमींदारों व्यवस्था समाप्त होने के उपरांत 1951 ई० में इसका ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ के रूप में नामकरण किया गया। इस स्कूल का इतिहास जितना गौरवशाली है वर्तमान उतनी ही उम्मीदों से परिपूर्ण, क्योकि पूर्व के छात्रों के सफलता से उत्साहित वर्तमान माता-पिता की अपने बच्चों व स्कूल से उस सफलता को दुहराने या उस से भी बेहतर करने की उम्मीदें बढ़ जाती है। इस स्कूल की कैंपस 152 एकड़ (स्त्रोत-विकिपीडिया) में फैली है, अपने आप में अपनी कहानी बयान करती है।

 

देश के सूचना-प्राधौगकी केंद्रों में से एक हैदराबाद में स्थित ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ अपने आप में सफल कहानियों की गाथा है, व्यक्तिगत रूप से में अपने बच्चों को इस निजी वित्त पोषित पब्लिक स्कूल ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल में ही पढ़ाना चाहूँगा, क्या आप अपने बच्चे को यहां नहीं पढ़ाना चाहेंगे ?

टेक्नोलॉजी के इस दौर में शायद ही कोई होगा जो माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, मास्टरकार्ड के बारे में नहीं जानता होगा। इन तीनों ही टेक कंपनियों में एक बात कॉमन है, तीनो कंपनियों के ही सीईओ भारतीय है और उस से भी अधिक मजेदार यह है कि, तीनो कंपनियों की ही तरह उनके तीनो ही सीईओ में भी एक बात कॉमन है और वो यह है कि उन्होंने एक ही स्कूल से पढ़ाई की है। यदि आपको यह भी बताएं कि वह स्कूल भारत का और भारत मे ही है तो क्या? क्या आप उस स्कूल के बारे में जानना नहीं चाहेंगे? आपको कौतूहल नहीं होगा?

हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चे को सबसे बेहतर शिक्षा मिले ताकि वो अपनी आने वाली जिंदगी की चुनौतियों एवं कड़ी प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार हो सके। उन्हें लगता है कि बेहतर शिक्षा के लिए उनके बच्चें सबसे प्रतिष्ठित व सबसे बेहतर स्कूल से पढ़े, किन्तु हर किसी के साथ ऐसा हो, संभव तो नहीं। कभी प्रतिभा तो कभी आर्थिक हालात के कारण यह संभव नहीं हो पाता। फिर भी, सवाल यह है कि सर्वश्रेष्ठ स्कूल कौन सा है? शहर ही नही, राज्य भी नहीं बल्कि पूरे देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूल कौन कौन से है? इसके जवाब में सभी के उत्तर भिन्न-भिन्न होंगे, किन्तु हर जवाब का अपना एक आधार होता है, कभी अनुशासन तो कभी पढ़ाई तो कभी माहौल, किन्तु क्या यही किसी स्कूल को सम्पूर्ण बनाएंगे? तो फिर सर्वश्रेष्ठ स्कूल का क्या आधार होना चाहिए? आदर्श स्थिति में सर्वश्रेष्ठ स्कूल का मापदंड उस स्कूल के छात्रों की सफलता का प्रतिशत ही होना चाहिए।

सफलता की परिभाषा भी विभिन्न लोगो के लिए भिन्न-भिन्न होती है, कभी नाम तो कभी पैसा, कभी सुकून तो कभी सेवा, कभी सम्मान तो कभी शांति महत्वपूर्ण होती है। फिर भी यदि आप किसी प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के सर्वेसर्वा (सीईओ) बन जाये या फिर किसी राज्य के मुख्यमंत्री, तो उन पदों के साथ उक्त सभी अपेक्षाएं पूर्ण हो जाती है।

आइए आपको प्रतिभाओं के धनी देश के एक ऐसे विद्यालय की सैर पर ले चलते है जहाँ के पूर्ववर्ती छात्र सिर्फ उक्त तीनों ही कंपनियों के सीईओ नहीं बल्कि देश-विदेश में विभिन्न सम्मानित पदों पर भी आसीन है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नाडेला, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण, मास्टर्कार्ड के सीईओ अजयपाल सिंह बंगा, विप्रो के सीईओ टी. के. कुरियन, पूर्व केंद्रीय नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी(16वें मुख्यमंत्री), मशहूर सेलिब्रेटी अभनेता राम चरण और नागार्जुन आदि इस स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र है। पूर्ववर्ती छात्रों की फेहरिस्त काफी लंबी है फिर भी उसकी सूची आपसे साझा कर रहे है(स्त्रोत-विकिपीडिया), किन्तु इस सूची को देख कर आप कह उठेंगे ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ से निकले छात्र सर्वश्रेष्ठ होते है।

निजामों के शहर ‘हैदराबाद’ में सन् 1923 से ही ‘हैदराबद पब्लिक स्कूल’ प्रतिभाओं को निखारने के कार्य कर रहा है। यह स्कूल हैदराबाद के बेगमपेट में स्थित है, इसकी स्थापना हैदराबाद के सांतवें निज़ाम ‘सर उस्मान अली खान’ के द्वारा नवाबों, जागीरदारों व अन्य अभिजात वर्ग के पुत्रों के लिए की गई थी। 1951 मैं जमींदारों व्यवस्था समाप्त होने के उपरांत 1951 ई० में इसका ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ के रूप में नामकरण किया गया। इस स्कूल का इतिहास जितना गौरवशाली है वर्तमान उतना ही उम्मीदों से परिपूर्ण, क्योकि पूर्व के छात्रों के सफलता से उत्साहित वर्तमान माता-पिता की अपने बच्चों व स्कूल से उस सफलता को दुहराने या उस से भी बेहतर करने की उम्मीदें बढ़ जाती है। इस स्कूल की कैंपस 152 एकड़ (स्त्रोत-विकिपीडिया) में फैली है, अपने आप में अपनी कहानी बयान करती है।

देश के सूचना-प्राधौगकी केंद्रों में से एक हैदराबाद में स्थित ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ अपने आप में सफल कहानियों की गाथा है, व्यक्तिगत रूप से में अपने बच्चों को इस निजी वित्त पोषित पब्लिक स्कूल ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल में ही पढ़ाना चाहूँगा, क्या आप अपने बच्चे को यहां नहीं पढ़ाना चाहेंगे ?

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