आपराधिक मामलों में आधार डाटा का इस्तेमाल नहीं होगा : यूआईडीएआई

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधार कानून के तहत आपराधिक मामलों की जांच में बॉयोमीट्रिक डेटा का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इस आधार पर, यूआईडीएआई ने अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ बॉयोमीट्रिक डेटा साझा करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को, एनसीआरबी नेबॉयोमीट्रिक डेटा साझा करने पर जोर दिया था। यूआईडीएआई ने कहा कि आधार अधिनियम की धारा 29 के तहत लिया गया डेटा केवल परिसर के धारकों की पहचान साबित करने के लिए किया जा सकता है।

साझा किये गए आपराधिक मामलें 

इसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है। प्राधिकरण ने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी भी जांच एजेंसी के साथ बॉयोमीट्रिक डेटा साझा नहीं किया है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में इसे अधिनियम की धारा 33 के तहत साझा किया जा सकता है। गुरुवार को फिंगरप्रिंट ब्यूरो के निदेशक मंडल के 1 9 वें अखिल भारतीय सम्मेलन में बोलते हुए एनसीआरबी के निदेशक ईश कुमार ने कहा कि देशभर में हर साल लगभग 50 लाख मामले दर्ज़ होते है|

इनमें से 80-85 प्रतिशत लोग पहली बार अपराध करते हैं, जिनके पुलिस के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा हर साल 40,000 शव को बरामद किया जाता है, जिसे पहचाना नहीं जा सकता है। कुमार ने कहा कि इन शवों के आंकड़ों के आधार डाटा की मदद से इनकी पहचान कर इन्हें इनके परिवारों को सौंप दिया जा सकता है।

अब जबकि आधार को ही हर भारतीय नागरिक का मूल डाटा स्त्रोत मन जायेगा तो ऐसे में यदि आपराधिक मामलों में इसका सदुपयोग हो जाए तो हर्ज़ ही क्या है ? लेकिन कम से कम इस पर एक चर्चा प्रक्रिया का आगाज़ तो हो वरना कोर्ट के सहारे इसकी उपयोगिता से लेकर अब इसके आपराधिक मामलों में इस्तेमाल पर कोई याचिका डाले तो सुनवाई होगी|

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