किसानों का 22 राज्यों में चल रहा, 10 दिवसीय देशव्यापी ‘गांव बंद आंदोलन’ हुआ तेज

      किसानों के 10 दिवसीय देशव्यापी ‘गांव बंद आंदोलन’ के दूसरे दिन 2 जून को मध्य प्रदेश में 3 किसानों की मौत हुई है, जिनमें से 2 किसानों ने क़र्ज़ से परेशान होकर आत्महत्या की है, जबकि 1 किसान की कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं के कारण मौत हुई है। ‌

      ‎ देश के किसान मुख्य रूप से अपनी चार मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं, किसानों की मांग है कि,

1. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए‌। 

2. ‎कृषि ऋण माफ किया जाए।

3. ‎किसानों को उसकी फसल का लागत मूल्य में लाभ जोड़ कर दिया जाए। 

4. ‎किसानों की जमीन कुर्क के जो नोटिस भेजे गए हैं, वो वापस लिए जाएं।

उधर पुलिस मध्य प्रदेश के मंदसौर में कड़ी सतर्कता बरत रही है। पिछले साल 6 जून को किसानों के प्रदर्शन के दौरान, यहां पुलिस गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हो गई थी। जिसके बाद समूचे राज्य में हिंसा, लूट, आगजनी एवं तोड़फोड़ हुई थी। जानकारी के अनुसार, मंदसौर कृषि उपज मंडी और अन्य मंडियों में 2 जून को सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि ‎पिछले साल भी किसानों ने एक जून से 10 जून तक आंदोलन किया था और इसका मुख्य केन्द्र मंदसौर रहा था। 

        राष्ट्रीय किसान महासंघ के संयोजक शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्काजी ने बताया, ‘हमने देश के 22 राज्यों में देशव्यापी ‘गांव बंद आंदोलन’ एक जून से शुरू किया है। उन्होंने कहा कि, हमारा आंदोलन पूरी तरह अहिंसक एवं शांतिपूर्ण है, लेकिन राज्य सरकारें किसानों के आंदोलन को हिंसक बनाना चाहती है‌। उन्होंने कहा, ‘जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी, हमारी जंग जारी रहेगी‌।’ 

इस आंदोलन के चलते देश भर में सब्ज़ियों ‌और फलों की कीमतें बढ़ीं हैं। सब्जियों और दूध को शहरों में जाने देने से रोकने के लिए किसानों द्वारा नाकाबंदी करने की भी ख़बरें हैं। जयपुर में आंदोलन के दूसरे दिन शनिवार को ही सब्जियों के भावों में जबरदस्त उछाल आ गया है। जयपुर में सब्जियों की आवक आधी रह गई और दाम चार गुना तक बढ़ गए हैं। महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में विभिन्न बाज़ार समितियों तक सब्ज़ियां पहुंचाने और जिले में दूध एकत्रित करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष राजू देसाले ने बताया, ‘ज़िले की सभी दूध डेयरियां बंद हैं और दूध इकट्ठा करने वाले केंद्र इससे प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 2 जून की सुबह येओला तालुका के विसपुर में सड़कों पर दूध उड़ेल दिया। विरोध के चलते सब्जियां देरी से पहुंचाई जा रही हैं। किसान आंदोलन के दूसरे दिन 2 जून को वाम संगठनों से जुड़ी ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने आरोप लगाया कि, महाराष्ट्र सरकार किसानों के जारी 10 दिन के प्रदर्शन के प्रति नकारात्मक रवैया अपना रही है।‌ वहीं किसानों द्वारा आपूर्ति रोक दिए जाने की वजह से हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में सब्ज़ियों का खुदरा मूल्य 10 से 20 रुपये प्रति किग्रा बढ़ गया है।

      कृषि मंत्री ने किसानों के आंदोलन के बारे में कहा कि, मीडिया में आने के लिए कुछ किसान तरह-तरह के उपक्रम कर रहे हैं। देश में करोड़ों की संख्या में किसान हैं और उसमें कुछ किसानों का ये प्रदर्शन मायने नहीं रखता है।

      ‎माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह द्वारा किसानों की आत्महत्या के बारे में दिए गए इस विवादित बयान को शर्मनाक बताते हुए इसे किसानों का किया गया भद्दा मज़ाक बताया है। येचुरी ने ट्वीट कर कहा है कि, ‘मोदी और उनके मंत्रियों के लिए मीडिया कवरेज ही सब कुछ है। हमारे ग़रीब और मेहनती किसानों द्वारा ख़ुदकुशी पर भी वही घटिया सोच। यह बेहद शर्मनाक और तकलीफ़देह हरकत है।’

      ‎इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने आंदोलन के बारे में कहा था कि, यह कोई मुद्दा ही नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा था कि, किसानों का ऐसा कोई मुद्दा है ही नहीं और वे खामखा की बातों को लेकर आगे चल रहे हैं। इससे किसानों का ही नुकसान कर रहे हैं।

       साथ ही ‎केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किसानों की चिंताओं के लिए वैश्विक आर्थिक स्थिति और अतिरिक्त उपज को ज़िम्मेदार ठहराया है। किसानों के जारी आंदोलन के बारे में गडकरी ने कहा कि, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अतिरिक्त उपज के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। यह एक पुराना मुद्दा है, कोई नया नहीं है। सरकार दीर्घकालीन नीतियां बना कर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। 

       ‎मध्य प्रदेश के मंदसौर में होने वाली किसान रैली से कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार कृषि संकट की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि, किसानों के हक की लड़ाई में कांग्रेस उनके साथ खड़ी होगी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘हमारे देश में हर रोज़ 35 किसान आत्महत्या करते हैं। हमारे अन्नदाताओं के हक़ की लड़ाई में उनके साथ खड़े होने के लिए 6 जून को मंदसौर में किसान रैली को संबोधित करूंगा। 

       ‎ ‎ राष्ट्रीय किसान महासंघ की अगुवाई में करीब 170 किसान संगठन इसमें भाग ले रहे हैं। जिसके चलते…

– 1 से 4 जून तक गांवों में युवाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरानी खेल गतिविधियां होंगी।

– 5 जून को किसान धिक्कार दिवस के रूप में मनाएंगे।

– ‎6 जून को श्रद्धांजलि के रूप में मनाया जाएगा, 6 जून को ही राहुल गांधी की मंदसौर में सभा होनी है‌।

– 8 जून को असहयोग दिवस के रूप में मनाया जाएगा। 

– ‎10 जून को भारत बंद की अपील की गई है।

 ‎ ‌   इस आंदोलन को मद्दनजर रखते हुए कई लोगों ने आंदोलन के पहले से ही घरों में सब्जियों और फलों का स्टॉक रखना शुरू कर दिया था। वहीं सरकार ने इसे रोकने की कोशिशें भी तेज कर दी हैं। राज्य सरकारों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहरों में पुलिस की तैनाती कर दी है। कई जगह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अगर 10 दिन तक किसानों का यह आंदोलन चलता है, तो शहर में सब्जियों और खाद्य पदार्थ को लेकर संकट खड़ा हो सकता है।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram