क्या है भारतीय रेल का खेल, आइये डालें एक नज़र।

भारतीय रेल

शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जिसने अपने जीवन में कभी भारतीय रेल का स्वाद न चखा होगा। ये वाकई ज़रा अजीब सा लगता है सुनने में कि भला भारतीय रेल कोई व्यंजन है जिसका स्वाद चखा जाए मगर ऐसा कहना गलत भी नहीं क्योंकि जिस प्रकार खाने में कम या ज्यादा नमक रहने की शिकायत, खाना ज्यादा जल जाने की या आधा पके होने की शिकायत या फिर खाना उनके मन माफ़िक न पके हुए होने की शिकायत लोगों को होती है ठीक उसी प्रकार रेल यात्री भी इसी तरह की शिकायतें फ़रमाते हैं बस शब्द बदल जाते हैं। जैसे ट्रेन में ज्यादा या कम भीड़ होना , ट्रेन का अपने निर्धारित समय से न चलना या फिर यात्रियों को सीट मिलना मगर उनके मन के अनुसार खिड़की वाली सीट न मिल पाना आदि।

ट्रेन के विषय में इसलिए पढना या बोलना वाजिब है क्योकि हम भारतीयों की भावनाएं भी इससे जुड़ी हुई हैं, यह वाकई हमारे जीवन का अहम हिस्सा है । असल में ट्रेन की कहानी काफ़ी दुःख भरी है क्योंकि इसे रोज़ लोगों की गालियाँ मुफ्त में मिलती हैं हालाँकि इसमें गलती ट्रेन की नहीं बल्कि उनकी होती है जो इसे संभाल रहे होते हैं। हाई लेवल सेफ्टी कमीटी की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार 2007-08 से लेकर 2011 तक के बीच रेल में हुई लापरवाहियों की वजह से 1019 लोगों के अपनी जान गँवाई और 2118 लोग घायल हुए। इसी अवधि में 1600 भारतीय रेल के कर्मचारी भी अपनी जान से हाथ गवां बैठे और 8700 कर्मचारी घायल हए। हर साल ग़ैरकानूनी अतिक्रमण की वजह से 15000 लोगों की जान जाती है। साथ ही साथ कई अर्थशास्त्र विद ऐसा मानते हैं कि भारतीय रेल द्वारा अमितव्ययी मार्ग पर अपनी सेवा देना इसे घाटे के गड्ढे में ढकेलती है मगर चूँकि भारतीय रेल एक सरकारी उपक्रम है इसीलिए इसे ऐसा करना पड़ता है ताकि दूरस्थ स्थानों पर रहने वाले लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

ऐसे घाटों पर अगर नज़र डालें तो राजकोषीय वर्ष 2016-17 के लिए यह 296.3 अरब रूपए का घाटा है। भारतीय रेल पर आमतौर पर ये इलज़ामात लगाये जाते हैं कि भारतीय रेल आज भी उस प्रकार के लोकोमोटिव का इस्तेमाल करता है जिन्हें जापान, जर्मनी, फ्रांस जैसे देश कई दशक पहले ही कचरे में फेक चुके हैं। आधुनिक समय के अनुसार इनकी गति काफ़ी धीमी बताई जाती है। दरअसल इन लोकोमोटिव को आधुनिक इंजनो से बदलने के खर्चे पर अगर हम नज़र डालें तो यह 30 खरब रूपए होता है और हम भारतीय भाड़े में हुए बढ़ावे को कतई बर्दाश्त भी नहीं कर सकते।

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मगर फिर भी सरकार भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने के प्रयासों में जुटी हुई है और इसके लिए 2020 तक ₹ 9.05 खरब की राशि खर्च की जाएगी। मगर सौ बात की एक बात यह है की भारतीय रेल हम सभी भारतीय नागरिकों की जिम्मेदारी है और हम सब मिल कर इसे बेहतर बना सकते हैं क्योंकि जी हाँ हम जनता हैं और जनता की ताकत से बढ़कर कुछ नहीं होता।

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