गठबंधन का ट्रेंड नया नही, जानिए भारत में क्या रहा है गठबंधन का इतिहास

देश जब आजाद हुआ तब देश की राजनीति में कांग्रेस ही एक मात्र पार्टी थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में 1946 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, मुस्लिम लीग तथा हिन्दू महासभा जैसे राजनीतिक दलों ने मिलकर जन्म दिया था।आजादी के बाद पहली बार 1967 में गठबंधन सरकारों का प्रयोग शुरू हुआ, आपातकाल के बाद गैर-कांग्रेसी नेताओं में एकजुटता हुई और जनता पार्टी बनी। जहाँ बिहार समेत कई राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार बनी। लेकिन राजनीतिक लालसा और सत्ता की लालच ने इस दल को ज्यादा दिन तक चलने नहीं दिया। राष्ट्रीय स्तर पर सर्वप्रथम गठबंधन सरकार की शुरूआत 1 मई, 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार के गठन के साथ मानी जाती है।      राजीव गांधी की मृत्यु के बाद 10वीं लोकसभा चुनाव के पश्चात सबसे बड़े दल के रूप में उभरी कांग्रेस। पी.वी. नरसिम्हाराव ने छोटे-छोटे राजनीतिक दलों और कुछ निर्दलीय सांसदों का समर्थन लेकर गठबंधन सरकार का गठन किया।1979, 1989, 1990 और 1991 तक कई बार गठबंधन सरकार की स्थापना हुई और अपना कार्यकाल पूरा करने में पहले ही गिर गई। 1989 के लोकसभा चुनाव में पहली बार किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका और यहीं से गठबंधन की राजनीति ने जन्म लिया।

1993 में उत्तरप्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 425 सीटों में से सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिली थीं, बीजेपी को 177 जीतकर बड़ी पार्टी बनी थी। वही बसपा ने सपा को समर्थन भी दिया था, लेकिन जल्द ही बसपा का सपा से मोहभंग हो गया और समर्थन वापस ले लिया। इसी बीच बीजेपी के तरफ से राज्यपाल को चिट्ठी दी गई कि, अगर मायावती सरकार बनाती हैं, तो वह समर्थन देगी। मायावती पहली बार जून, 1995 में भाजपा एवं अन्य दलों के बाहरी समर्थन से मुख्यमंत्री बनीं थीं। वह दूसरी बार 1997 और तीसरी बार 2002 में मुख्यमंत्री बनीं और तब उनकी पार्टी बसपा का भाजपा के साथ गठबंधन था। लेकिन किसी भी बार कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया।

1999 का लोकसभा चुनाव जीतने का नये सिरे से प्रयास किया गया। इस 13वें लोकसभा चुनाव में एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 24 दलों की गठबंधन सरकार का गठन किया गया। इस सरकार ने 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण किया। 2004 मे हुए 14 वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने डाॅ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनाई और 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। 15 वीं लोकसभा चुनाव 2009 में पहली बार दो प्रमुख राजनीतिक गठबंधन के बीच चुनाव लड़ा गया और एक बार पुनः डाॅ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी।साल 2015 में बिहार में जेडयू, आरजेडी, कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की लेकिन, डेढ़ साल ही बीते होंगे कि, जेडीयू नेता और सीएम नीतीश कुमार ने खुद ही इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। महागठबंधन बनने से पहले नीतीश कुमार ने 15 साल तक बीजेपी के साथ गठबंधन में रहे और दो बार मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा किया।     कर्नाटक में येदियुरप्पा पहली बार 12 नवंबर, 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे। सीएम बनने के बाद आठवें ही दिन 19 नवंबर, 2007 को उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। गठबंधन सरकार में हुए समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री पद पर दोनों दलों के नेताओं को बराबर-बराबर वक्त तक सीम पद पर रहना था। समझौते के तहत येदियुरप्पा ने जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी को फरवरी, 2006 में मुख्यमंत्री बनवा दिया था, लेकिन जब अक्टूबर, 2007 में येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनने का वक्त आया, तो कुमारस्वामी समझौते से मुकर गए। येदियुरप्पा के दल ने समर्थन वापस ले लिया, और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी ने पहली बार कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनवाई।  लेकिन इस गठबंधन मे समर्थन देने वाले और लेने वाले दलों के नेता पहले ही दिन से एक दूसरे को चुनौती दे रहे थे। कांग्रेस के विधायकों के दम पर आप ने सरकार बनाई थी, लेकिन इस सरकार का हाल भी सबने देखा।2018 के कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सरकार बनाने जा रही है। 23 मई को कुमारस्वामी राज्य के सीएम के पद की शपथ लेंगे।किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न होने के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों की मिली-जुली सरकार बनती है, पिछले दशक से लगभग हर चुनावों के बाद किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण विभिन्न दलों की मिली जुली सरकार केंद्र व राज्यों में निर्मित हो रही है। जिसे संयुक्त सरकार, गठबंधन सरकार, संविदा सरकार जैसे कई नामों से जाना जाता है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी जैसे दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों के अतिरिक्त क्षेत्रीय दल भी भारतीय राजनीति का अटूट हिस्सा बन चुके हैं।

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