गर्मी को झेल रहे लोगों के लिए अच्छी खबर, इस बार मानसून 3 दिन पहले ही देश में दस्तक दे सकता है; मौसम विभाग

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार में 29 मई को दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक देगा, आमतौर पर एक जून को मानसून केरल में दस्तक देता है। IMD के अनुसार, इस बार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ऊपर बने वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और राजस्थान और मध्य प्रदेश के ऊपर चक्रवाती हालात बनने से मौसम लगातार खराब हो रहा है।

बीते 24 घंटों के दौरान केरल और कर्नाटक के कुछेक क्षेत्रों में तेज तो कुछेक में हल्की बारिश हुई है। वहीं दक्षिणी तमिलनाडु, दक्षिणी मध्य महाराष्ट्र, दक्षिणी कोंकण, छत्तीसगढ़, असम और जम्मू-कश्मीर के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। आगामी 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक तमिलनाडु, दक्षिण तटीय कोंकण, दक्षिणी मध्य महाराष्ट्र, उत्तर भारत के हरियाणा, उत्तरी राजस्थान, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, दिल्ली और उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली एजेंसी स्काईमेट के ने ये अनुमान लगाया हैं कि, 29 या 30 मई को आगाज के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पश्चिमी तट, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और यहां तक कि, पूर्वी एवं उत्तर-पूर्व में तेजी से बढने के आसार हैं। सरकार के भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 30 मई के आसपास मानसून आने के बाद बारिश पश्चिमी तट की तरफ तेजी से बढ़ेगी। वहीं कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण मानसून को देशभर में फैलने में मदद मिलेगी। इस समय ऐसा लग रहा है कि, मॉनसून उनके शुरुआती अनुमान लंबी अवधि के औसत (LPA) के 97 % से भी अधिक रह सकता है। LPA भारत में 1951 से 50 वर्षों तक हुई बारिश का औसत है। वर्ष 2018 में 97 % बारिश होने आशंका है, जो सामान्य वर्षा होगी। विभाग ने छह किस्म के पैरामीटरों के आधार पर यह आकलन किया है। विभाग ने कहा कि इसमें मॉडलीय त्रुटि अधिकतम चार दिन की हो सकती है। यानी मानसून 29 मई से चार दिन पहले या फिर चार दिन के बाद भी आ सकता है। केरल में पिछले साल 30 मई को मानसून पहुंचा था। लेकिन 2016 में यह 8 जून, 2015 में 5 जून, 2014 में 6 जून तथा 2013 में एक जून को पहुंचा था।

अंदमान सागर से केरल में मानसून के प्रविष्ट होने में एक सप्ताह से कम का समय लगता है। मानसून के करीब आने पर नजदीकी इलाकों का तापमान बदलने लगता है और वहां की, आ‌र्द्रता बढ़ जाती है। देश में हर साल औसतन 887.5 मिमी बारिश होती है। ये चार महीने इसलिए अहम माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान बरसने वाला पानी देश की सालभर की बारिश में 70% योगदान देता है। भारत में मानूसनी बारिश देश की अर्थव्यवस्था की लाइफ लाइन है। 70 फीसदी सिंचाई की जरूरतों को पूरा करती है। देश में करीब आधी कृषि भूमि जून-सितंबर के मानसून पर ही निर्भर है। सामान्य मानसून की बदौलत एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्थ्या भारत में उच्च कृषि उत्पादकता और अार्थिक गति में तेजी की भी उम्मीद है।

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