गुरुद्वारे में जाने से भारतीय उच्चायुक्त को रोका, पाकिस्तान के हाई कमिश्नर हुए तलब

कहा जाता है कि मंदिर, मस्जिद गुरुद्वारा और इसाई घर में आने जाने में किसी भी प्रकार की रोक-टोक का सामना नहीं करना  पड़ता बल्कि उसके उलट सुरक्षाबलों के माध्यम से यहां पर आने जाने की व्यवस्था को चाक चौबंद रखा जाता है, लेकिन इन सभी परिभाषाओं को  खारिज करते हुए पाकिस्तान ने एक गंदी हरकत दिखाते हुए भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया और महावाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को पाकिस्तान के रावलपिंडि स्थित पंजाब साहिब गुरुद्वारे में जाने से रोका है । जबकि इस मामले में भारतीय उच्चायुक्त ने पहले से ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से गुरुद्वारे में प्रवेश को लेकर, मंजूरी ले रखी थी, बावजूद इसके पाकिस्तान के द्वारा यह नापाक हरकत की गई।

क्या है पूरा मामला –

भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया अपने परिवार व अपनी पत्नी के साथ रावलपिंडी स्थित साहिब गुरुद्वारे में वहां उपस्थित श्रद्धालुओं से मिलने के लिए जा रहे थे, जिसके लिए उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय से पहले ही अनुमति ले रखी थी कि, वहां जाने में उन्हें किसी भी प्रकार की अड़चन का सामना उस समय ना करना पड़े जब वे गुरुद्वारे में प्रवेश को पहुंचे। लेकिन इससे पहले ही  बदसलूकी करते हुए अजय बिसारिया और उनकी पत्नी को इस्लामाबाद से ही वापस लौटा दिया गया।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में दिखाई सख्ती – 

भारतीय उच्चायुक्त को जब पाकिस्तान ने बदसलूकी के साथ, इस्लामाबाद से वापस लौटा दिया, उसके बाद भारत ने पाकिस्तान की इस करतूत को आड़े हाथों लेते हुए पाकिस्तान के डिप्टी कमिश्नर को तलब किया। दरअसल पाकिस्तान के द्वारा इससे पहले भी ऐसी हरकतें की जा चुकी हैं जिसके द्वारा भारतीय राजनयिकों को परेशान किया गया है, और अब पाकिस्तान ने इन हरकतों का सिलसिला जारी कर रखा हुआ है तो, भारत ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए समन जारी करके भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के डिप्टी हाई कमिश्नर सैयद हैदर शाह को इस मामले में तलब किया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी अजय बिसारिया को पंजा साहिब में दर्शन करने से रोक दिया गया था। इस दौरान अजय बिसारिया को इवेक्वी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड  की तरफ से पंजा साहिब में दर्शन करने का आमंत्रण दिया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने अजय बिसारिया को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दर्शन करने से रोक दिया था। वहीं, अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा है कि भारतीय उच्चायोग ने इस्लामाबाद में भी इसका कड़ा विरोध जताया है। गौरतलब है कि बीते मार्च के आखिरी सप्ताह में भारत और पाकिस्तान के बीच यह तय हुआ था कि भारतीय राजनयिकों के साथ जो भी समस्याएं हैं उसका समाधान निकाला जाएगा। पाकिस्तान ने 1992 के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस मामले में हामी भरी थी। जबकि दोनों देशों ने इस मुद्दे को पूरी तरीके से समझाने के लिए रजामंदी जताई थी।

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