जानिए क्यों देश भर बंद होगा मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी

जो लोग अगले साल मार्च के बाद अपना मोबाइल नंबर पोर्ट करना चाहते हैं उन्हें समस्या का सामना करना पड़ सकता है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी फ़िलहाल आसानी से किया जा सकता है लेकिन अगले साल से यह संभव होने वाला नहीं है| भारत में पोर्टेबिलिटी सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां एमएनपी इंटरकनेक्शन, टेलीकॉम सॉल्यूशंस और सिनेर्जी टेक्नोलॉजीज ने दूरसंचार विभाग को बताया है कि जनवरी से पोर्टिंग शुल्क में 80% की कमी आई है, जिसके कारण कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और वे अपनी सेवाओं को रोकने पर विचार कर रही है|

यदि इन कंपनियां की समस्या बरकरार रहती हैं तो बिलिंग, वौइस् क्वालिटी या टैरिफ से संबंधित समस्याओं से परेशां रहने वाले ग्राहक अपनी संतुष्टि के लिए पुराना नंबर रहते हुए अपना सर्विस प्रदाता नहीं बदल पाएंगे|

दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यदि मामला हल नहीं होता है,तो किसी भी और कंपनियों को इस काम के लिए लाइसेंस प्राप्त करवाया जा सकता है। हाल के दिनों में, पोर्टेबिलिटी की मांग में 3 गुना वृद्धि हुई है। इस वृद्धि के पीछे रिलायंस जिओ का बढ़ता यूजर बेस और रिलायंस कम्युनिकेशन का बंद होना है |

इसके अलावा हाल के दिनों में टाटा टेलिसर्विस, एयरसेल, टेलिनॉर इंडिया ने भी अपनी सर्विस बंद कर दी हैं जबकि एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर ने अपने टैरिफ में खासी कटौती की है जिसके कारण बड़ी संख्या में कस्टमर्स अपना नंबर पोर्ट कराना चाहते हैं। इससे पहले एमएनपी इंटरकनेक्शंस ने दक्षिण और पूर्वी भारत में अपनी सेवाओं का लाइसेंस सरेंडर कर दिया है जबकि उत्तर और पश्चिम भारत में सर्विस देने वाले सिनिवर्स टेक्नॉलजीस ने डिपार्टमेंट को बताया है कि वह भारी वित्तीय घाटा झेल रही है। ऐसा इसलिए भी हुआ है क्योंकि टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई)  ने पोर्ट करने के चार्ज को 19 रुपये से घटाकर 4 रुपये कर दिया है जिसके उनके राजस्व भण्डारण पर खासा असर पड़ा है|

आपको अवगत करा दें कि इन् कंपनियों ने ट्राई के इस ऑर्डर के खिलाफ कोर्ट का रुख भी किया है जिसकी अगली सुनवाई 4 जुलाई को होनी है। दोनों कंपनियों के पास इस साल मार्च महीने तक 370 मिलियन नंबर पोर्टबिलिटी की रिक्वेस्ट आ चुकी हैं जबकि पिछले महीने में ही अकेले कंपनियों को नंबर पोर्टबिलिटी की 2 करोड़ रिक्वेस्ट मिली हैं। सरकार का कहना है कि वह इन कंपनियों के लिए जल्द से जल्द सुनवाई चाहती है और यदि यह कंपनियां तैयार नहीं होती है तो नया टेंडर जारी कर कंपनियों को काम सौंपा जा सकता है|

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