डालमिया समूह ने ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ स्कीम के तहत 25 करोड़ रुपये में लाल किले को गोद लिया

ऐतिहासिक धरोहरों, स्मारकों को बचाने की जिम्मेदारी किसी भी देश के सरकार की होती है, ऐसे धरोहर उस देश की पहचान होती है, उस देश की इतिहास बयान करती है। इसी कड़ी में पिछले साल सितंबर में विश्व पर्यटन दिवस पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के द्वारा एक विरासत योजना ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ शुरू की गई थी। इस योजना के माध्यम से

‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना के अंतर्गत किसी स्मारक को अडॉप्ट करने वाली ‘डालमिया समूह’ देश की पहली कॉरपोरेट बन गई है। यह समूह 5 वर्षो के लिए प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के साथ ‘स्मारक मित्र’ में शामिल हो गया है।

लाल किले के देख-भाल जिसमे संचालन और रख-रखाव भी करना है, की जिम्मेदारी अब डालमिया समूह को है। इस अनुबंध को हासिल करने के लिए सीमेंट कंपनी ने इंडिगो और जीएमआर ग्रुप को पीछे छोड़ा।

हालांकि सरकार के इस कदम को विपक्ष के तीखे विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर सरकार के इस कदम की तारीफ हो रही है वहीं कुछ लोग विरोध भी प्रकट कर रहे है। लोगों को भ्रमित करने के लिए ‘लाल किले को निजी क्षेत्रों के हाथों बेच देना’ जैसे वाक्य भी उपयोग किये जा रहे है।

देखने वाली बात यह होगी कि केंद्र सरकार की ‘विरासत संरक्षण योजना’ के तहत इन स्मारकों का काया-कल्प होता है या फिर कंपनियो की। इस प्रकार की योजनाओं से अगर हमारी विरासत संरक्षित और सुरक्षित ही तो यह कदम स्वागत योग्य है।

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