देश के लोकप्रिय नेता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आज पूरा देश स्मरण कर रहा है

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या को आज 27 साल पूरे हो गए। देश आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर स्मरण और नमन कर रहा है। वह देश के बेहद लोकप्रिय नेताओं में से एक थे। देश की राजनीति में उनकी छवि एक बेहद दमदार और प्रभावशाली शख्सियत की तौर पर थी। उनका पूरा नाम राजीव रत्‍‌न गांधी था। राजीव गांधी फिरोज गांधी व देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र थे। राजीव गांधी का विवाह सोनिया गांधी के साथ हुआ था। राजीव गांधी की दो संतानें पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी हैं। जब तक भाई संजय गांधी जीवित थे, राजीव गांधी राजनीति से बाहर ही रहे, लेकिन जब संजय गांधी की 23 जून, 1980 को एक दुर्घटना में मौत हो गयी उसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री और उनकी माँ इंदिरा गांधी उन्हें राजनीतिक जीवन में ले आई। जून 1981 में वह लोकसभा उपचुनाव में निर्वाचित हुए और इसी महीने युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बन गए।

31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां की हत्या के बाद राजीव को उसी दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई और उन्हें कुछ दिन बाद कांग्रेस पार्टी का नेता चुन लिया गया। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के लिए जोरदार कदम उठाए। उन्हें देश में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार क्रांति का जनक कहा जाता है। उनके ही कार्यकाल में मतदान उम्र सीमा 18 साल की गयी और ईवीएम मशीनों की शुरुआत हुई। राजीव ने इनकम और कॉर्पोरेट टैक्स घटाया, लाइसेंस सिस्टम सरल किया और कंप्यूटर, ड्रग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों से सरकारी नियंत्रण खत्म किया। साथ ही कस्टम ड्यूटी भी घटाई और निवेशकों को बढ़ावा दिया। बंद अर्थव्यवस्था को बाहरी दुनिया की खुली हवा महसूस करवाने का यह पहला मौका था, लेकिन 1989 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि भारतीय सेना द्वारा बोफोर्स तोप की खरीदारी में लिए गए कमीशन का मुद्दा उछला, जिसके चलते चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा। राजीव गांधी ने अपने प्रधानमंत्री काल में श्रीलंका में शांति प्रयासों के लिए भारतीय सैन्य टुकड़ियों को भी वहां भेजा। लेकिन उनके इसी फैसले से वे खुद लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ऐलम [लिट्टे] के निशाने पर आ गए और लिट्टे उग्रवादियों ने देश के पूर्व युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जान ले ली।

वर्ष 1987 में भी श्रीलंका में राजीव गांधी पर हमला किया गया था, जब श्रीलंका में शांति सेना भेजने के बाद राजीव गांधी वहां के दौरे पर गए थे। तब यह हमला श्रीलंकाई नौसेना के जवान विजीता रोहाना विजेमुनी ने किया था। हालांकि, गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने के दौरान राजीव गांधी सैनिकों के काफी करीब पहुंच गए थे, तभी उसने यह हमला किया। लेकिन राजीव गांधी के सुरक्षाकर्मी की सजगता से वह इस हमले में बाल-बाल बच गए थे।

21 मई 1991 को रात तकरीबन 10 बजकर 10 मिनट पर राजीव गांधी तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में रैली स्थल पर पहुंचे। वे कार की अगली सीट पर बैठे थे और उन्होंने उतरते ही सबका अभिवादन किया। मंच की ओर बढ़ते हुए एक महिला आत्मघाती हमलावर धनु ने उन्हें माला पहनानी चाही, तो सब इंस्पेक्टर अनुसुइया ने उसे रोक दिया। हालांकि राजीव गांधी के कहने पर उसे माला पहनाने के लिए आने दिया गया। धनु ने उन्हें माला पहनाई और जैसे ही वो उनके पैर छूने के लिए नीचे झुकी, उसने अपने कमर से बंधे बम का बटन दबा दिया। एक जोरदार धमाका हुआ और फिर सबकुछ सुन्न हो गया। चारों ओर धुआँ फैल गया, जब धुआं छटा तो राजीव गांधी की तलाश शुरू हुई। उनके शरीर का एक हिस्सा औंधे मुंह पड़ा हुआ था। उनका कपाल फट चुका था और उसमें से उनका मगज निकल कर उनके सुरक्षा अधिकारी पीके गुप्ता के पैरों पर गिरा हुआ था जो स्वयं अपनी अंतिम घड़ियां गिन रहे थे। इस धमाके ने राजीव गांधी की जान ले ली।

इस केस की जांच के लिए सीआरपीएफ के आईजी डॉक्टर डीआर कार्तिकेयन के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। कुछ ही महीनो में इस हत्या के आरोप में एलटीटीई के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। मुख्य अभियुक्त शिवरासन और उसके साथियों ने गिरफ्तार होने से पहले साइनाइड खा लिया। एक साल के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी गई।इस दर्दनाक घटना को आज 27 साल पूरे हुए। इस 27वीं पुण्यतिथि पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी ने सोमवार (21 मई) को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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