देश में इस्लामिक बैंकिंग नहीं – RBI

आरबीआई ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि देश मे इस्लामिक बैंको के प्रस्ताव को आगे नही बढ़ाएगी। एक RTI के जवाब में रिज़र्व बैंक ने यह जानकारी दी।

बैंकों और वित्तीय सेवाओं को सभी नागरिकों तक पहुंचाने के लिए उपलब्ध व्यापक और समान अवसरों को ध्यान में रखते हुए, इस्लामिक बैंकिंग प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का फैसला नहीं लिया गया है।” केंद्रीय बैंक ने आरटीआई आवेदन के जवाब में ऐसा कहा।

शरिया या इस्लामिक बैंकिंग में कोई ग्राहकों को ब्याज या शुद्ध नही दिया जाता है, ऐसा इसलिए होता है कि, इस्लाम मे ब्याज लेना हराम माना जाता है। इस्लामिक बैंकिंग का प्रस्ताव रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के समय से ही है। इस बैंकिंग सिस्टम पर केंद्र सरकार और रिज़र्व बैंक ने काफी लंबे अरसे से हो रही बातचीत का पटाक्षेप करते हुए, यह फैसला लिया गया है।

रिज़र्व बैंक ने यह भी बताया कि अगस्त 2014 को केंद्रीय सरकार के द्वारा जान-धन योजना की शुरुआत की गई थी जिसके अंतर्गत गरीबो को खाता मुफ्त में खुलवाया गया और पूरे देश में इन की संख्या 50 करोड़ पहुच चुकी है। जन-धन खाते गरीबो को सरकारी योजनाओं और सामाजिक योजनाओ का लाभ दिलवाने के लिए पर्याप्त एवं एक सुरक्षित माध्यम है।

फिलहाल, रिज़र्व बैंक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में इस्लामिक बैंक के शुरुआत की ऐसी कोई संभावना भी नही है।

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