मानसून सामान्य रहने के आसार, पूर्वानुमान में अच्छी बारिश की उम्मीद

भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, और कृषि वर्षा पर। मानसून न सिर्फ मौसम बल्कि कृषि के लिए भी नितांत आवश्यक है। जिस देश का आधारस्तम्भ ही कृषि हो वहाँ मानसून के पूर्वानुमान पर नजर होना स्वाभाविक ही है। मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने बुधवार को जारी मानसून के पूर्वानुमान में यह दावा किया है। देश में इस साल सूखा पड़ने के बिल्कुल आसार नहीं हैं। बल्कि जून से सितंबर के बीच मानसून के चार महीने के दौरान 887 mm तक बारिश होने की संभावना है। इसके अनुसार मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इस बार अच्छी बारिश होगी। यदि मॉनसून की अच्छी बारिश होती है तो इसका असर कृषि उत्पादन की बढ़ोतरी पर होगा। ग्रामीण भारत की आय बढ़ने से देश में उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बढ़ेगी। भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून का 2 ट्रिलियन योगदान है। इसी के साथ देश में बेहतर फ़सल की उम्मीद की जा सकती है।  देश में कृषि क्षेत्र में 40 से 45 प्रतिशत यांत्रिकरण हुआ है और मानसून अनुकूल होने से इस क्षेत्र को लाभ होने की आशा है। बाजार पर भी इसका अच्छा असर होने की उम्मीद है। कृषि और उद्योग जगत के लिए अच्छी खबर है।

स्काइमेट के अनुसार ला नीना का कमजोर होना आैर प्रशांत महासागर का गर्म होना सामान्य से अधिक बारिश की संभावना को खारिज करते हैं। हालांकि, दक्षिणी प्रायद्वीप व पूर्वोत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है। पिछले वर्ष करीब 95 प्रतिशत वर्षा हुयी थी।हालांकि इस साल गर्मी का प्रकोप तो रहेगा, लेकिन साथ ही साथ मानसून का साथ भी भरपूर मिलेगा। 2018 में मानसून 100 फीसदी सामान्य रहेगा। मई के महीने में मानसून की शुरूआत केरल से होकर पूरे देश में फैलेगी। देश में करीब 45 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र हैं। मानसून 15 मई तक सबसे पहले केरल पहुंचेगा और 45 दिनों के अंदर पूरे देश में फैल जायेगा। मौसम विभाग जून में मानसून के संबंध में अगला पूर्वानुमान जारी करेगा।

मॉनसून के दौरान भारत को उसके वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत बारिश मिलती है। भारत का कृषि क्षेत्र उसके 2000 अरब डॉलर अर्थव्यवस्था का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन यह देश की 1.3 अरब आबादी के आधे से अधिक लोगों को रोजगार देता है। सामान्य बारिश की वजह से न केवल कृषि विकास को मदद मिलती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर होता है।

पिछले साल बिल्कुल सटीक था स्काईमेट का अनुमान :

वर्ष       स्काईमेट    मौसम विभाग   वास्तविक बारिश

2012       96%           99%                92%

2013      103%           98%              106%

2014       94%           96%                88%

2015      102%           93%                86%

2016      105%         106%                97%

2017        95%          96%                95%

जून और सितंबर में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान है। जुलाई और अगस्त में बारिश कुछ कम रह सकती है, लेकिन वह भी सामान्य के आसपास ही होगी। जून में एलपीए की 111%, जुलाई में 97%, अगस्त में 96% और सितंबर में 101% बारिश होने का अनुमान है।

 

उत्तर भारत के कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा या भारी बारिश की संभावना:

वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ, शिमला, मनाली, देहरादून, श्रीनगर सहित पूर्वी उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू और कश्‍मीर के इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद है। यहां भारी बारिश की भी संभावना है। वहीं, दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, आगरा, जयपुर और जोधपुर के इलाकों में सामान्य बारिश की ही उम्मीद है।

पूर्वी भारत, खासकर बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिमी बंगाल में भी अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। भारत का मौसम विभाग भी जल्द ही मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी करने वाला है।

दक्षिण भारत में इस बार कम रहेगी बारिश:

चेन्नई, बेंगलुरू, तिरुवनंतपुरम, कन्नूर, कोझिकोड, हैदराबाद, कर्नाटक के तटीय इलाकों में विजयवाड़ा, विशाखापट्‌टनम में मानसून सामान्य या सामान्य से कुछ कम रह सकता है।

मध्य भारत में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रायपुर, मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश की उम्मीद है। यानी इन जगह मानसून अच्छा रहेगा। वहीं, अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और सूरत जैसे शहरों में सामान्य बारिश हो सकती है।

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram