पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इसलिए लगी है आग

डीजल पेट्रोल की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच रही हैं लगातार आए दिन हो रही बढ़ोतरी के कारण चारों तरफ हंगामा मचा हुआ है दिन प्रतिदिन पेट्रोल की कीमतें नए नए रिकॉर्ड बना रही हैं। वहीं अगर बात की जाए देश की राजधानी दिल्ली की तो इस समय पेट्रोल 20 मई 2018 की कीमत 76.24 रू है जो कल 19 मई 2018 को 75.91रू थी ।और मुंबई में आज पेट्रोल 84.07 रू के भाव से बिक रहा है जो कल 19 मई की तारीख में 83.75 रुपए के भाव से बिक रहा था ।

इस हिसाब से देखा जाए तो प्रतिदिन ₹1 के हिसाब से हो रही बढ़ोतरी भविष्य में सौ रुपए प्रति लीटर के पार भी जा सकती है इसमें कोई संदेह नहीं है।

तेजी से बढ़ रहा है दाम

अगर बात की जाए डीजल की कीमतों की तो बीते 14 मई से लगातार डीजल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जो आज की तारीख 20 मई 2018 तक बढ़ता चला आ रहा है। डीजल की कीमतों में इस दौरान प्रतिदिन 0.21 पैसे से लेकर 0.29 पैसे तक लगातार कीमतों को बढ़ाया गया है। जिस कारण 14 मई 2018 को 66.14 ₹ में बिक रहा डीजल 20 मई 2018 को 67.31 ₹ में बिक रहा है।

प्रतिदिन बन रहा है नया रिकॉर्ड

अगर रिकॉर्ड की बात की जाए तो सितंबर 2014 के बाद से पेट्रोल पदार्थों की यह वृद्धि सबसे ज्यादा मानी जा रही है। हालांकि पेट्रोल पदार्थों की कीमतों में इतना इजाफा देश के इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा इजाफा है जो पहले कभी नहीं हुआ था।

कैसे तय होती है पेट्रोल पदार्थ की कीमतें

हम जब भी पेट्रोल पदार्थों को खरीदते हैं तो उसका करीब 48 फ़ीसदी हिस्सा उसका आधार मूल्य होता है, और इसके अतिरिक्त करीब 35 फ़ीसदी एक्साइज ड्यूटी को शामिल किया जाता है, और तकरीबन 15 फ़ीसदी सेल्स टैक्स लगाया जाता है, और 2 फ़ीसदी कस्टम ड्यूटी लगाई जाती है।

तेल के आधार मूल्य में, कच्चे तेल की कीमत, उस तेल को प्रोसेस करने का चार्ज, और कच्चे तेल को शोधित करने वाली रिफाइनरी कंपनियों का चार्ज, शामिल होता है।

वहीं एक्साइज ड्यूटी चार्ज को, पेट्रोल डीजल तथा केरोसिन आदि में तय करने के लिए लगाया जाता है।

और सेल्स टैक्स यानी विक्रीकर संबंधित राज्य सरकारों द्वारा लिया जाने वाला टैक्स होता है।

अगर आज की तारीख में कच्चे तेल की कीमतों की बात की जाए तो भारतीय बास्केट में इसकी कीमत $32 प्रति बैरल है। जब केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाता है, तब राज्य सरकार की ओर से लोकल टेक्स भी बढ़ाया जाता है यही वजह है कि दोगुनी मार जनता को झेलनी पड़ जाती है।

इस प्रकार से बढ़ जाती हैं पेट्रोल पदार्थों की कीमतें

अगर आंकड़ों की बात करें तो एक यूएस बैरल में करीब 159 लीटर होता है । मतलब 1 लीटर क्रूड तेल की कीमत लगभग 12.58 रुपए बैठती है, जबकि तेल कंपनियों को प्रोसेसिंग के बाद 1 लीटर पेट्रोल की कीमत तकरीबन 23.77 ₹ पड़ती है। जिसे कंपनियां डीलरों को लगभग 27.6 रुपए की कीमतों पर बेचती हैं । इसमें डीलर अपना मुनाफा लगभग दो से ₹2.50 जोड़ता है। केंद्र सरकार 1 लीटर पर ₹19.06 तक एक्साइज टैक्स लगा देती हैं , और उसके बाद राज्य सरकार वैट के जरिए तकरीबन ₹12.10 पैसे की वसूली करती है । मतलब जो पेट्रोल 35रु से 40रु में बिकना चाहिए वह इस प्रकार से दोगुने दाम पर बेचा जाता है।

2010 से लेकर 2018 के बीच लगातार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है इसके लिए “आज का रिपोर्टर” की स्पेशल रिपोर्ट में आपको एक तालिका के द्वारा 2010 से 2018 के बीच हुई डीजल पेट्रोल की बढ़ोत्तरी को समझाया जा रहा है।

किस पर कितना पड़ रहा है असर

इन बढ़ी कीमतों से हर कोई परेशान है, चाहे वह आम आदमी हो या नौकरी पेशा। पेट्रोल पदार्थों की बढ़ी कीमतों ने सब की जेब ढीली कर रखी है।

इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। पेट्रोल पदार्थों की बढ़ी कीमतों ने फसल की सिंचाई में खलल डाला है। जहां एक ओर इस तपती धूप में नहरों में पानी आना बंद कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर यांत्रिकी के प्रयोग से फसलों की सिंचाई हेतु किसानों को इतने महंगे डीजल को खरीदकर सिंचाई करनी पड़ रही है, जिस कारण उनको सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वहीं डीजल की कीमतों को बढ़ाने की यह नई तरकीब तकरीबन डेढ़ साल पहले शुरु की गई थी। उस वक्त भाव बढ़ने को लेकर ना जनता ने चिंता की ना किसानों को भनक पड़ी और ना ही तेल वितरण कंपनियों ने इस नई ट्रिक को समझने की कोशिश की।

पेट्रोल पदार्थों की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं और कौन है इसके लिए जिम्मेदार

कच्चे तेल की स्थिरता के चलते कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है । पिछले साल 16 जून में तेल वितरण की कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, ने तेल की कीमतों से जुड़ी हुई 15 वर्षीय पुरानी परंपरा को खत्म करने हेतु प्रतिदिन रेट रिवाइज की नई परंपरा “डायनामिक प्राइजिंग सिस्टम” को लागू करने की मंजूरी दी। जिसमें प्रतिदिन विदेशी बाजारों में तेल के दामों में उतार चढ़ाव के माध्यम से भारत में भी उसी हिसाब से दाम तय की जाने की बात कही गई थी। लेकिन उसी वक्त से लगातार दाम बढ़ रहे हैं । वही तेल वितरण कंपनियों यानी ओएमसी की माने तो कुछ समय से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेलों की कीमतों में लगातार नियंत्रण होने के बावजूद भारत में लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। वहीं कच्चे तेल के दाम में गिरावट के हिसाब से तेल कंपनियों को पेट्रोल एवं डीजल के दाम कम करने का मौका सरकार ने नहीं दिया है । जिसके कारण सरकार एक्साइज ड्यूटी में लगातार बढ़ोतरी के चलते अपना खजाना भरने में लगी है, वहीं जो फायदा आम आदमी को होना चाहिए वह फायदा सरकार उठा रही है।

कौन बन रहा भुक्तभोगी

वही बढ़ी कीमतों की मार केवल आम जनता पर पड़ रही है और लोगों की जेब बड़ी खामोशी से काटी जा रही है। डायनामिक प्राइजिंग के बहाने केवल जनता को ठगा जा रहा है इस बाबत यह एक छलावा मात्र निकला ।

पेट्रोल पंप मालिकों को रोज सुबह 6:00 बजे नए दाम लागू करने होते हैं और उन को हिदायत दी जाती है कि वह इसका जिक्र किसी और से ना करें इससे पेट्रोल और डीजल के डीलर भी नाराज हैं और आम जनता हलकान भी है अगर इसी प्रकार से बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले समय में पेट्रोल डीजल की कीमत ₹100 पार कर जाएगी ।

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