पॉक्सो एक्ट को मंजूरी, रेप के दोषियों को मिलेगी सजाए मौत

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रेप पर मौत की सजा दिये जाने के कैबिनेट के अध्यादेश यानी कि POCSO एक्ट को मंजूरी दे दी हैं। राष्ट्रपति ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस कानून के बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। शनिवार को ही प्रधानमंत्री आवास पर हुए केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में, ये अध्यादेश लाए गए थे। इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। राष्ट्रपति से अध्यादेशों को मंजूरी मिलते ही, अब ये कानून बनाया गया है, की अब 12 साल के ऊपर किसी के साथ भी अगर रेप जैसी गंभीर घटना घटित होती हैं, तो दोषियों को मौत की सजा मिलेगी। अध्यादेश में महिलाओं पर रेप करने के मामले में न्यूनतम सजा को सात वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया हैं और अधिकतम सजा उम्रकैद तक बढ़ा दी गई वहीं, 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों पर दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।

जम्मू के कठुआ और उत्तर प्रदेश के एटा में नाबालिग बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं से देश में काफी गुस्सा देखा गया था। जिसके बाद सरकार ने कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान करने का फैसला लिया था। अभी तक इस कानून में दोषियों के लिए मौत की सजा का इंतेजाम नहीं था। इस घटना के बाद कैबिनेट ने ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस’ यानी POCSO एक्ट में इन प्रस्तावों पारित किया हैं। इस एक्ट की नियमावली में ये नियम हैं।

1.सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें होगी

तुरंत एफआईआर दर्ज होगा।

2.मामलों में पीड़ितों का पक्ष रखने के लिए राज्यों में विशेष लोक अभियोजकों के पद निर्माण किये जायेंगे।

3.वैज्ञानिक जांच के लिए सभी पुलिस थानों और अस्पतालों में विशेष फॉरेंसिक किट रखी जायेगी।

4. क्राइम रिकार्ड ब्यूरो यौन अपराधियों का डेटा तैयार करेगा।

5. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस अधिकारी मामले को दर्ज करेंगे।

6. 24 घंटे के भीतर इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति और विशेष अदालत को देनी होगी।

7. किसी भी व्यक्ति, होटल, मीडिया को बाल पोर्नोग्राफी की जानकारी होने पर उसकी सूचना पुलिस को देनी होगी।

8. ऐसा नहीं करने पर उसे भी छह महीने की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है और गलत सूचना देने पर भी यही सजा।

9. बच्चों की काउंसलिंग की व्यवस्था की जायेगी।

 

10. बाल पोनोग्राफी के दोषी पाए जाने पर पांच साल कैद, अपराध दोहराने पर सात साल की कैद।

11. 2 महीने के अंदर केस की जांच पूरी करनी होगी।

12. अपील के मामले 6 महीने में निपटाने होंगे।

13. 12 साल तक की बच्चियों पर के रेप में अब फांसी भी हो सकेगी, न्यूनतम सजा भी बढ़कर 20 साल कर दी गयी हैं।

14. 13 से 16 साल तक की किशोरियों से रेप में अधिकतम सजा उम्रकैद, न्यूनतम 20 साल

15. महिलाओं से रेप में अब न्यूनतम 10 साल सजा, पहले 7 साल की सजा का प्रावधान था

ये प्रावधान जारी करना इसलिए जरूरी था, क्योंकि देश में हर 15 मिनट पर एक बच्चा यौन अपराध का शिकार होता है। इन मामलों में से 50% मामले केवल उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में दर्ज हैं और देश में ये एक गंभीर समस्या बन कर उभर आई हैं। इस कानून को लोकतंत्र की व्यवस्था में जारी करने से न केवल रेप के अपराध के मामले कम होंगे, बल्कि लोगों की सोच में एक सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा ये उम्मीद हैं।

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