भारत रहेगा दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था, अगले वित्त वर्ष में विकास दर 7.5 फीसदी से अधिक रहने की उम्मीद

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने उम्मीद जताई है, कि निवेश और क्षमता इस्तेमाल में सुधार के दम पर भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2018-19 में बढ़कर 7.5% से अधिक रह सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। विश्व बैंक, IMFऔर RBI के बाद अब नीति आयोग ने भी मौजूदा वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर के बेहतर रहने की उम्मीद जताई है। कुमार ने कहा, ”देश में आर्थिक माहौल सकारात्मक है। निवेश गति भी ऊपर की ओर बढ़ रही है। वहीं उद्योगों का क्षमता इस्तेमाल बढ़कर 74% हो गया है, साथ ही उन्होंने कहा, ”प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ रहा है और उम्मीद है, कि 2018- 19 में आर्थिक वृद्धि कम से कम 7.5 प्रतिशत पर पहुंच जायेगी। वित्त वर्ष 2017-18 में आर्थिक वृद्धि दर 6.6% रहने की उम्मीद है। सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) ने राष्ट्रीय आय के जो संशोधित अनुमान जारी किए हैं उसमें यह जानकारी दी गई है। कुमार ने कहा, ”सरकार ने कई सुधार और पहलें की हैं और सरकार को नए सुधार या पहल शुरु करने के बजाय पुरानों पर ही ध्यान केंद्रित करते हुये उन्हें मजबूती देनी चाहिए।


इकनॉमिक सर्वे 2017-18 में कहा गया है, कि अगले वित्त वर्ष में यह 7-7.5 पर्सेंट के बीच पहुंच सकती है।इस तरह से अगर भारत की तरक्की होती रही, तो 2018 में चीन को पछाड़ भारत बनेगा सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था। सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (CEBR) की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी कर रहा है। वहीं एसोचैम ने कहा है कि 7% विकास दर का उसका अनुमान प्रधानमंत्री मोदी सरकार की नीतियों में स्थिरता, अच्छे मॉनसून, औद्योगिक गतिविधियों एवं ऋण वृद्धि में तेजी और स्थिर विदेशी मुद्रा दर के अनुमानों पर आधारित है। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत का पूर्वानुमान भी व्यक्त किया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास दर 7.2 और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

कुछ अहम बातें हैं जो सामने आई हैं, वो ये है

• वित्त वर्ष 2018 कृषि विकास दर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान।
• वित्त वर्ष 2018 में सर्विस सेक्टर की विकास दर 8.3 रहेगी।
• वित्त वर्ष 2018 में औद्योगिक विकास दर 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान।
• 3.2 फीसदी का वित्तीय घाटा सरकार के लिए ज्यादा चिंता का विषय नहीं है और इसे तय दायरे में ही रखा जाएगा।
• जीएसटी रेवेन्यू में पहले से सुधार देखा गया है और इसमें 12 फीसदी ग्रोथ दर्ज की गई है।
• रिपोर्ट के अनुसार, GST के आंकड़ों के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ी है।
• नोटबंदी और जीएसटी के बाद टैक्स फाइल करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ और नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं। कुल मिलाकर 18 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं और इंडीविजुएल इनकम टैक्स कलेक्शन्स में भी बढ़ोत्तरी दिखी है।
• सरकार का फोकस रोजगार, मैन्यूफैक्चरिंग और कृषि पर रहेगा।
• आर्थिक सर्वे का कहना है कि संभावनाओं का सबसे बड़ा स्रोत निर्यात क्षेत्र है।
• दिसंबर 2016 से दिसंबर 2017 के दौरान फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व साल दर साल आधार पर बढ़कर 14.1 फीसदी हो गया है।
• अप्रैल-दिसंबर 2017 के दौरान एक्सपोर्ट की विकास दर 12.1 फीसदी रही है।
• डायरेक्ट टैक्स वसूली लक्ष्य पाने की उम्मीद।
• निजी निवेश में तेजी की तैयारी।

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