मशहूर गीतों के रचनाकार कवि नीरज का हुआ निधन,

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मशहूर कवि और गीतकार गोपालदास ‘नीरज’ ने कल गुरुवार शाम 7.50 बजे दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली. वे 93 साल के थे. नीरज के निधन पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से लेकर तमाम बड़ी हस्तियों ने दुख प्रकट किया. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर नीरज को श्रद्धांजलि दी. बता दें ‘नीरज’ के पार्थिव शरीर को शनिवार सुबह आगरा ले जाया जाएगा. वहां उनके चाहने वाले उनका अंतिम दर्शन करेंगे. इसके बाद पार्थिव शरीर को दोपहर बाद अलीगढ़ ले जाया जाएगा, जहां उनकी देह दान की जाएगी. महाकवि गोपालदास ‘नीरज’ ने 2015 में देहदान का संकल्प लिया था. वो चाहते थे कि मरने के बाद भी उनका शरीर समाज की सेवा करता रहे. इसके बाद उनका अंतिम संस्कार होगा. कवी नीरज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, ‘गोपाल दास नीरज के निधन से साहित्य जगत को हानि हुई उसकी भरपाई होना कठिन है.’ उनकी अंतिम यात्रा राजकीय सम्मान के साथ निकाली जाएगी. मुख्यमंत्री ने इसके लिए निर्देश दिए हैं.

गोपाल दास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरवली गांव में हुआ था।  गोपालदास नीरज को हिंदी के उन कवियों में शुमार किया जाता है जिन्होंने मंच पर कविता को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया. वे पहले शख्स हैं जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया. 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण पुरस्कार प्रदान किया गया. 1994 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने ‘यश भारती पुरस्कार’ प्रदान किया. गोपाल दास नीरज को विश्व उर्दू पुरस्कार से भी नवाजा गया था. 1970 के दशक में लगातार तीन वर्षों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

उनकी बेहद लोकप्रिय रचनाओं में कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे! नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पांव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गई जैसे गीत है। दर्द दिया है’, ‘आसावरी’, ‘बादलों से सलाम लेता हू’, ‘गीत जो गाए नहीं’, ‘कुछ दोहे नीरज के’, ‘नीरज की पाती’ जैसे रचना संग्रह, ‘तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा’, ‘हम तेरी चाह में, ऐ यार! वहां तक पहुंचे’, ‘अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए’, ‘दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था’ , ‘पीछे है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिये’ जैसी गजलें है। शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, आज मदहोश हुआ जाए रे, लिखे जो खत तुझे, ऐ भाई! जरा देख के चलो, खिलते हैं गुल यहाँ, फ़ूलों के रंग से, रंगीला रे! तेरे रंग में, आदमी हूँ, आदमी से प्यार करता हूँ जैसे फिल्मी गीते लिखी। हालाकि भले ही आज गोपालदास नीरज हम सब के बीच न हो लेकिन उनके लिखे गीत बेहद लोकप्रिय रहेंगे।

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