रिटायर हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने जाते-जाते कह डाली सीजेआई पर यह बात

न्यायाधीश जे चेलमेश्वर रसर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शुक्रवार को सेवानिवृत्त हुए| उन्होंने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के ऊपर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के बारे में कहा कि उन्हें यह करने पर कोई पछतावा नहीं है। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने 12 जनवरी को उनके साथी न्यायाधीशों के साथ चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के काम पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था। एक साक्षात्कार में, न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायाधीशों ने चीजों को ठीक करने की कोशिश की थी लेकिन जब कुछ भी नहीं हुआ तो उन्होंने देश को जानकारी देने का फैसला किया।

जस्टिस चेलमेश्वर सुझाव दिखा रहे थे कि कुछ भी नहीं बदला गया ,लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस ने अदालत में क्या चल रहा था और सुप्रीम कोर्ट को कैसे बचाया जा सकता है इस बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि  समय-समय पर न्यायपालिका की गतिविधियों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

चेलमेश्वर एकमात्र न्यायाधीश थे जिन्होंने सरकार के उस फैसले का समर्थन किया था, जिसमें कहा गया था कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए बनाई गई कॉलेजियम प्रणाली को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) द्वारा प्रतिस्थापित किये जाने की बात कही गई थी| वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी को असंवैधानिक करार करते हुए खारिज कर दिया था। साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा प्रणाली ‘निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारदर्शी’ नहीं है।

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर को सात साल तक शीर्ष अदालत में रहने के बाद शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर 10 अक्टूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने। अब देखना ख़ास होगा कि भविष्य में वह किस संस्थान के प्रमुख के तौर पर सिस्टम की विषमताओं को उजागर करते है| वाकई एक जस्टिस सो सबसे हटकर था!

Connect with Us! अपनी राय कमेंट्स में दें. ताजा ख़बरों के लिए हमें फॉलो करें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई, तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें. Subscribe our Youtube Channel: AajKaReporter Follow us on: Facebook, Twitter, Instagram