वयस्क जोड़े शादी के बिना एक साथ रह सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय(सुप्रीम कोर्ट) ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद रिश्तें संबंधी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी दी है, जिसके अनुसार वयस्क अब बिना शादी (लिव इन रिलेशनशिप) के साथ रह सकते है। शादी के बिना दो विपरीत लिंग के वयस्कों का साथ रहना समाज मे स्वीकार्य नहीं था और ऐसे संबंधों को वैध नहीं माना जाता था, किन्तु सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से समाज की सोच बदलेंगी या नहीं यह आने वलए वक़्त में ही पता चलेगा।

‘बिन फेरे… हम तेरे’ की तर्ज पर देखे जाने वाले लिव इन रिलेशनशिप के बारे में उच्चतम न्यायालय ने कहा “रिश्ते में रिश्तों को पहचाना जाता है, ‘लिव इन रिलेशनशिप’ अब विधानमंडल द्वारा भी मान्यता प्राप्त है और उन्हें घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिलाओं के संरक्षण के प्रावधानों के तहत एक जगह मिल चुकी है। ”

केरल हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक जोड़े द्वारा दायर याचिका की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी दी।

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पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति में ‘लिव इन’ सामान्य है, भारतीय समाज मे इसे आज भी अच्छी नजरो से नहीं देखा जाता है। हालाकिं महानगरीय जीवन शैली में यह स्वीकार्य है एवं चलन में है। नयी पीढ़ी को रिश्तें का यह ‘रंग-ढंग’ मुफीद लग रहा है और वो इसे अपना भी रहे है, अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सकारात्मक टिप्पणी के है तो समाज मे इसके प्रति लोगों की सोच भी बदलेगी।

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