शर्मनाक, भारत सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट में ‘बिहार’ महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य

महिला और बाल विकास मंत्रालय के द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को लड़कियों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील स्थान बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के पहले जेंडर वलनर्बिलिटी इंडेक्स (जीवीआई) महिलाओं की जिन चुनौतियों को दिखा रहा है, उनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी और हिंसा से बचाव है।

अगर राज्यो का प्रदर्शन ‘शून्य से एक’ अंक के पैमाने पर दिखाया गया है, वो राज्य का प्रदर्शन बेहतर माना जाएगा जिसकी जीवीआई ‘एक’ अंक के करीब है। लड़कियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार बिहार की जीवीआई 0.410 है, जो कि सभी राज्यों में सबसे बुरा है। साथ ही शिक्ष क्षेत्र में भी बिहार सबसे नीचले पायदान पर है। यह बात वाकई चौकाने वाली है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शासित राज्य का यह हाल हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बुधवार जारी इस रिपोर्ट को ‘प्लान इंडिया’ ने तैयार किया है, इसके द्वारा विचारित रैंकिंग के लिए एक और पहलू ‘बाल विवाह’ था। ‘प्लान इंडिया’ द्वारा किये गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 39 प्रतिशत से अधिक लड़कियों का विवाह 21 वर्ष की उम्र से पूर्व हुए है। सिर्फ इतना ही नही, सरकार द्वारा तय की गई विवाह के लिए न्यूनतम आयु मापदंड से भी कम आयु यानी कि 19 वर्ष की उम्र से भी कम में, 12 प्रतिशत लड़कियां मां भी बन चुकी है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 29 फीसदी बच्चों की उम्र 0-5 साल है। वहीं, शून्य से छह साल की उम्र तक का बाल लिंग अनुपात 919 और नवजातों में इसका अनुपात 900 है।

इस इंडेक्स के टॉप पर काबिज राज्य ‘गोआ’ है, इसका मतलब यह है कि महिलाओं के लिए पूरे भारत मे सबसे सुरक्षित राज्य ‘गोआ’ है। यह जेंडर वलनर्बिलिटी इंडेक्स

(जीवीआई) में सबसे ऊपर है, जिसमें उसने 0.656 अंक अर्जित किए हैं। दूसरी तरफ राष्ट्रीय औसत, 0.5314 है। इस विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल को अपने लोगों की सुरक्षा में पहला स्थान दिया गया है, शिक्षा के क्षेत्र में पांचवां, स्वास्थ्य में छठे स्थान, और गरीबी में आठवां। शीर्ष ब्रैकेट में, केरल, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर जैसे राज्यों ने खुद को मजबूत किया है।

हालांकि बिहार सरकार ने कुछ योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रखा है जिसका परिणाम अविलंब तो दृष्टिगोचर तो नही हो सकता किन्तु दूरगामी परिणाम बेहतर होंगे। लड़कियों को पढ़ाई के मुख्य-धारा से जोड़ने के लिए ‘साइकल योजना’ एवं ‘पोशाक योजना’ काफी अर्से से चल रही है। इन ईजनों से लड़कियों का विद्यालयों में उपस्थिति में इज़ाफ़ा तो हुआ ही है।

इस साल गांधी जयंती 02 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कन्वेंशन सेंटर  से  दहेज प्रथा एवं बल विवाह उन्मूलन के लिए राज्यव्यपी अभियान चलाया जा रहा है, जिस से की सामाजिक चेतना जागेगी ही।

इन सभी प्रयासों के साथ ही राज्य सरकार को कुछ और भी प्रयास करने होंगे, अन्यथा देश मे राज्य की छवि प्रभावित होगी।

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