सजा-ए-मौत के लिए फांसी ही सबसे बेहतर: SC में केंद्र का जवाब, मौत की सजा में फांसी देना बेहतर

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के तरीके को लेकर दाखिल किए गए याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की और मौत की सजा के लिए फांसी के अलावा और बेहतर विकल्‍प ढूँढने को कहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में इस विषय को लेकर याचिका दाखिल कर कहा गया है, कि फांसी की जगह मौत की सज़ा के लिए किसी दूसरे विकल्प को अपनाया जाना चाहिए। फांसी को मौत का सबसे दर्दनाक तरीका बताते हुए जहर का इंजेक्शन लगाने, गोली मारने, गैस चैंबर या बिजली के झटके देने जैसी सजा देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है, की फांसी से मौत में 40 मिनट तक लगते हैं, जबकि गोली मारने और इलेक्ट्रिक चेयर पर केवल कुछ मिनट में मौत हो जाती है, लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा, कि फांसी की सजा, मौत की सजा के लिए जल्दी और सुरक्षित तरीका है। लीथल इंजेक्शन और फायरिंग के जरिए मौत की सज़ा देना अमानवीय हैं। बता दें, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, कि सजा-ए-मौत के मामले में फांसी के अलावा कोई दूसरा तरीका भी तलाश किया जाए, जिसमें मौत शांति से हो, पीड़ा में नहीं। मौत की सज़ा के लिए फांसी के अलावा दूसरे विकल्पों के इस्तेमाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 4 हफ्तों के भीतर अपना जवाब दखिल करने को कहा है। इससे पहले 6 अक्टूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा के लिए दूसरे विकल्पों के इस्तेमाल संबंधी याचिका दायर की गई थी।

कोर्ट में ऋषि मल्होत्रा नाम के वकील ने इस मसले पर याचिका दाखिल की है। दुनिया के कई देशों ने फांसी का इस्तेमाल बंद कर दिया है। भारत में भी ऐसा होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने मौत के लिए इंजेक्शन देने, गोली मारने या इलेक्ट्रिक चेयर का इस्तेमाल करने जैसे तरीके अपनाने का सुझाव दिया है। ऋषि मल्होत्रा ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने दलीलें रखीं।

लॉ कमिशन ने 17 अक्टूबर 2003 को केंद्र सरकार को अपनी 187वीं रिपोर्ट सौंपी थी और इसके बाद लॉ कमिशन ने मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव की सिफारिश भी की। रिपोर्ट में कहा गया कि सीआरपीसी की धारा-354 (5) में मौत की सजा के बाद फांसी पर चढ़ाए जाने की प्रक्रिया का जिक्र है। इसके तहत कहा गया है कि मौत की सजा पाए शख्स को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक कि उसकी मौत न हो जाए। लॉ कमिशन ने अपनी सिफारिश में कहा था कि जानलेवा इंजेक्शन का प्रावधान रखा जाए। मौत की सजा पर अमल किस तरह से हो इसका विशेषाधिकार कोर्ट पर छोड़ा जाना चाहिए।

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