सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सूची से 44 जिलों को हटाया

   केंद्रीय गृह सचिव श्री.राजीव गाबा ने पत्रकार परिषद में ये कहा, कि सुरक्षा और विकास संबंधी उपायों से जुड़ी बहु-आयामी रणनीति के कारण, पिछले चार वर्षों में एलडब्ल्यूई हिंसा का भौगोलिक प्रसार काफी कम हो चुका हैं। उन्होंने कहा,”44 जिलों में एलडब्ल्यूई में कोई प्रभाव नहीं है और ज्यादातर नक्सली हिंसा अब केवल 30 सबसे खराब प्रभावित जिलों तक ही सीमित है। यह पहली बार हैं, कि केरल माओवादी प्रभावित राज्यों की सूची में शामिल किया गया हैं, इन क्षेत्रों में ओडिशा, मध्य प्रदेश में मंडला, आंध्र प्रदेश में पश्चिमी गोदावरी, छत्तीसगढ़ और अंगुल और बौध में कबीरधाम भी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बताया गया है, कि पिछले चार वर्षों में, नक्सली हिंसा में कमी आई है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में प्रभावित जिलों की समीक्षा करने के लिए और राज्यों के साथ परामर्श करने के लिये एक व्यापक अभ्यास किया था, उस अभ्यास के मुताबिक और 8 नए जिलों को एसआरई जिलों की सूची में जोड़ दिया गया है। इसलिए, एसआरई जिलों की कुल संख्या अब 90 है, इसी तरह, सबसे खराब एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों की संख्या भी 35 से घटकर 35 हो गई है। अधिकारियों ने कहा, कि 2013 की तुलना में 2017 में हिंसा की घटनाओं में घटकर 20 फीसदी की कमी आई है। 90 जिलों में से, 32 जिलों में पिछले कुछ वर्षों में कोई हिंसा नहीं हुई है, जबकि 2017 में केवल 58 जिलों में हिंसा की सूचना मिली है।

केंद्र सरकार के एकीकृत एक्शन प्लान (आईएपी) के तहत 35 एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों को 1000 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान कर रही है। निधि का उपयोग जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा किया जाता है और इसमें जिला वन अधिकारी के पुलिस अधीक्षक भी शामिल होते है। समिति ऐसी योजनाएं तैयार करती है, जिसमें सार्वजनिक सेवाओं जैसे स्कूल भवन, आंगनवाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक स्थानो और स्कूल आदि जैसे  ठोस प्रस्ताव शामिल हैं। हाल ही में गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक अंतर-मंत्री बैठक ने राज्य सरकारों को एलडब्ल्यूई प्रभावित इलाकों में 40 हेक्टेयर वन भूमि तक के विकास कार्यों को पूरा करने के मंजूरी दे दी है।जिन जिलों में नक्सली हमलों को कम कर दिया गया है, सरकार ने सुरक्षा संबंधी खर्च (एसआरई) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षा से जुड़े खर्चों जैसे परिवहन, भाड़े के वाहनों का भुगतान करना है, आत्मसमर्पित माओवादियों को निरूपित करना, बलों के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। इस पूरे व्यय को वर्गीकृत करके, सुरक्षा और विकास संबंधी संसाधनों की तैनाती पर ध्यान केंद्रित करने का आधार यह है, कि इस पूरी हिंसा में कमी हुई है।

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