‘होली’ के प्रति भारतीय सरकार व डाक विभाग की उदासीनता

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पूरे विश्व में भारतीय परम्पराओ एवं संस्कृति की चर्चा होती है। यहां के नैतिक मूल्यों एवं रिश्तों की गर्माहट की प्रशंसा तो हर कोई करता है। भारत की अनेक विशेषताओं में से एक यहां के पर्व-त्योहार भी है। पूरे विश्व में फैले भारतीय उन देशों में भी यहाँ के त्योहार मनाते है, त्योहारों को मनाने का रंग-ढंग सदैव आकर्षण का केंद्र रहा है। पूरे विश्व में यहां के पर्व-त्योहारीं की चर्चा भले हो किन्तु देश में सरकार की उदासीनता दिखती है। समाजिक एकता का प्रतीक, असमानता को मिटाता उम्मीदों का रंग-बिरंगा त्योहार ‘होली’ के प्रति भी ऐसी ही स्थिति है।

यहाँ के विविध त्योहार विभिन्न देशों को अपनी विशेषताओं से आकर्षित करते है, इसी कड़ी में दक्षिण अमेरिकी देश ‘गुयाना’ ने रस पहले 1969 में ही भारत के रंगों, उमंगों के त्योहार ‘होली’ को समर्पित डाक-टिकते जारी की थी। यह डाक टिकटें फगवा (होली) पर आधारित थी जिसमे 1969 की होली को दिखाया गया था। इस थीम में चार वर्ग की डाक-टिकटें थी जिनका मूल्य क्रमशः 6, 25, 30 और 40 सेंट था, इन संग्रहीय डाक टिकटों में भगवान श्रीकृष्ण को राधा व गोपियो के साथ रंगों के इस त्योहार को मनाते हुए दर्शाया गया था।

भले ही गुयाना की जनसंख्या में भारतीयों की अच्छी संख्या हो किन्तु देश तो दक्षिण अमेरिकी ही है। जब अन्य देश की सरकारें अरसा पूर्व 1969 में ही होली पर डाक-टिकट जारी कर चुकी है तो अपने देश में क्यों नहीं?

उम्मीद करते है कि भारतीय सरकार अपने मुख्य त्योहारों को नोटिस करे और उन्हें उचित सम्मान दे।

‘आज का रिपोर्टर’ की तरफ से हमारे सभी पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपके जीवन में सुख, ख़ुशी और समृद्धि के रंग भरें।

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