4 साल, 44 वां कार्यक्रम, मोदी जी ने एक बार फिर ‘मन की बात’ जरिए देश को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देश को एक बार फिर संबोधित किया। ये मन की बात का 44वां एपिसोड है, इसका पहला प्रसारण 3 अक्टूबर 2014 को हुआ था।

‘मन की बात’ की शुरुआत करते हुए मोदी ने भारतीय नौ-सेना की 6 महिला कमांडरों द्वारा 250 से भी ज़्यादा दिन समुद्र के माध्यम से INSV तारिणी में पूरी दुनिया की सैर कर 21 मई को भारत वापस आने पर उन्हें नौ सेना और भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा, भारत की 6 बेटियां 250 से भी ज़्यादा दिन ‘नाविका सागर परिक्रमा’ को INSV तारिणी में पूरी दुनिया की सैर कर 21 मई को भारत लौटीं। भारत की इन बेटियां ने विभिन्न महासागरों और कई समुद्रों में यात्रा करते हुए लगभग 22,000 nautical miles की दूरी तय की। यह विश्व में अपने आप में एक पहली घटना थी। गत बुधवार (23 मई) को मुझे सभी बेटियों से मिलने और उनके अनुभव सुनने का अवसर मिला।

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें नमन किया। नेहरू पर एक लाइन बोलने के बाद पीएम मोदी ने वीर सावरकर का जमकर गुणगान किया। वीर सावरकर का जन्म मई महीने में हुआ था और उन्होंने ही 1857 की लड़ाई को विद्रोह के बजाय आजादी की लड़ाई कहा था। पीएम मोदी ने कहा, ‘सावरकर जी का व्यक्तित्व विशेषताओं से भरा था। वे शस्त्र और शास्त्र दोनों के उपासक थे। इस सबके अलावा वे एक ओजस्वी कवि और समाज सुधारक भी थे।

इसके बाद मोदी जी ने कहा की, दो महीने पहले जब मैंने #fitIndia की बात की थी, तो मैंने नहीं सोचा था कि, इस पर इतना अच्छा रिस्पोंस आएगा। इतनी संख्या में हर क्षेत्र से लोग इसके सपोर्ट में आएंगे। जब मैं फिट इंडिया की बात करता हूं, तो मैं मानता हूं कि, जितना हम खेलेंगे, उतना ही देश खेलेगा। मेरे लिए खुशी की बात है कि, मुझे भी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने चैलेंज किया है और मैंने भी उनके चैलेंज को स्वीकार किया है। मैं मानता हूं कि, ये बहुत अच्छी चीज है और इस तरह का चैलेंज हमें फिट रखने और दूसरों को भी फिट रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा। फिल्म से जुड़े लोग हों, Sports से जुड़े लोग हों या देश के आम-जन, सेना के जवान हों, स्कूल की टीचर हों, चारों तरफ से एक ही गूंज सुनाई दे रही है –‘हम fit तो India fit’।

साथ ही उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि, जो खेल कभी गली-गली, हर बच्चे के जीवन का हिस्सा होते थे, वो आज कम होते जा रहे हैं। ये खेल खासकर गर्मी की छुट्टियों का विशेष हिस्सा होते थे। कभी भरी दोपहरी में, तो कभी रात में खाने के बाद बिना किसी चिंता के, बिल्कुल बेफिक्र होकर के बच्चे घंटो-घंटो तक खेला करते थे और कुछ खेल तो ऐसे भी हैं, जो पूरा परिवार साथ में खेला करता था। पिट्ठू हो या कंचे हो, खो-खो हो, लट्टू हो या गिल्ली डंडा हो, न जाने… अनगिनत खेल कश्मीर से लेकर कन्याकुमार, कच्छा से कामरूप तक हर किसी के बचपन का हिस्सा हुआ करते थे। पारंपरिक खेल हमारी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ हमारी लॉजिकल थिंकिंग, एकाग्रता को भी बढ़ावा देते हैं। कई खेल हमें समाज,पर्यावरण आदि के बारे में भी जागरूक करते हैं। कभी-कभी चिंता होती है कि कहीं ये खेल खो न जाएं और तब सिर्फ खेल ही नहीं खो जाएगा, बचपन ही कहीं खो जाएगा।

पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में खेल और बचपन पर चर्चा करते हुए जगजीत सिंह के मशहूर गजल से बचपन को याद किया. पीएम ने कहा. चिंता होती है कि कहीं हमारे खेल खो न जाए कहीं. खेलों के साथ ये बचपन न खो जाए. अगर ऐसा हुआ तो हम सिर्फ ये सुनते रह जाएंगे- ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन।

‎उन्होंने कहा आउटडोर गतिविधियों के बारे में कहा कि, वर्षों से लोग एवरेस्ट की चढ़ाई करते रहे हैं और ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने सफलतापूर्वक इसे पूरा किया है। मैं इन सभी साहसी वीरों को, खासकर के बेटियों को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। अगर हम मानव जाति की विकास को देखें तो पायेंगे, किसी-न-किसी एडवेंचर की कोख में ही प्रगति पैदा हुई है। विकास एडवेंचर की गोद में ही तो जन्म लेता है। कुछ लीक से हटकर कर गुजरने का इरादा, कुछ असाधारण करने का भाव, इनसे युगों तक, कोटि-कोटि लोगों को प्रेरणा मिलती रहती है।

उन्होंने 16 मई को महाराष्ट्र के चंद्रपुर के आश्रम-स्कूल के 5 आदिवासी छात्र मनीषा धुर्वे, प्रमेश आले, उमाकान्त मडवी, कविदास कातमोड़े, विकास सोयाम को ‘मिशन शौर्य’ के तहत दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ने की उपलब्धि पर बधाई दी। साथ ही पिछले दिनों ‘स्वच्छ गंगा अभियान’ के तहत BSF के एक group ने Everest की चढ़ाई की और Everest से ढ़ेर सारा कूड़ा अपने साथ नीचे लायी। इस कार्य से प्रभावित होकर अपने कार्यक्रम में मोदी जी ने इस BSF के ग्रुप को भी बधाई दी और कहा, यह कार्य प्रशंसनीय तो है ही साथ-ही, यह स्वच्छता के प्रति, पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

उन्होंने महिला सशक्तिकरण के उदाहरण दाखिल, राजस्थान के सीकर की बस्तियों की बेटियों की मिसाल पेश की। वो आज आत्मनिर्भर बन गई हैं। सिलाई का काम सीखने के साथ-साथ कौशल विकास का course भी कर रही हैं। उन्होंने आशा और विश्वास से भरी इन बेटियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

पीएम मोदी ने अगले महीने आने वाले ईद के त्योहार की भी बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘अब से कुछ दिनों बाद लोग चाँद की भी प्रतीक्षा करेंगे। चाँद दिखाई देने का अर्थ यह है कि, ईद मनाई जा सकती है। रमजान के दौरान एक महीने के उपवास के बाद ईद का पर्व जश्न की शुरुआत का प्रतीक है। मुझे विश्वास है कि, सभी लोग ईद को पूरे उत्साह से मनायेंगे। इस अवसर पर बच्चों को विशेष तौर पर अच्छी ईदी भी मिलेगी। आशा करता हूं कि, ईद का त्योहार हमारे समाज में सद्भाव के बंधन को और मजबूती प्रदान करेगा। सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।’

उन्होंने 21 जून का भी जिक्र करते हुए कहा कि, पूरी दुनिया हमारे साथ योग दिवस मनाएगी। एक बार फिर मैं सभी देश वासियों से अपील करता हूं कि, वे योग की अपनी विरासत को आगे बढ़ाएं और एक स्वस्थ, खुशहाल और सद्भावपूर्ण राष्ट्र का निर्माण करें। जिस 21 जून का हमें बेसब्री से इंतजार रहता है। अब हमें इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। योग करने से साहस पैदा होता है, जो पिता की तरह हमारी रक्षा करता है। मां की तरह हमारे अंदर सहनशीलता पैदा करता है। मैं सभी से अपील करता हूं कि, योग की विरासत को आगे बढाएं और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण करें। साथ ही उन्होंने यह घोषणा की, की आने वाले 5 जून को भारत आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस के कार्यक्रम को होस्ट करेगा। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस बार की थीम है ‘बीट प्लास्टिक पॉल्युशन’। मेरी आप सभी से अपील है कि, हम यह सुनिश्चित करें कि, हम पॉलिथीन और लो ग्रेड प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। प्लास्टिक का हमारी प्रकृति पर, वन्यजीवन पर और हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। जब भयंकर गर्मी होती है, बाढ़ होती है, बारिश थमती नहीं है, असहनीय ठंड पड़ जाती है, तो हर कोई एक्सपर्ट बन करके ग्लोबल वॉर्मिंग, जलवायु परिवर्तन की बातें करता है, लेकिन बातें करने से बात नहीं बनती है। प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना, उसकी रक्षा करना, हमारा स्वभाव होना चाहिए।

मन की बात में पीएम मोदी ने इन सारे बातों का जिक्र किया। पूरे देश को अपील की, की योग की विरासत को आगे बढ़ाएं और एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण करे।

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