एशिया का नोबेल इस साल 2 भारतीयों को मिला, गर्व से ऊंचा हुआ हर भारतीय का सिर

एशिया का नोबेल कहे जाने वाले साल 2018 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की सूची में दो भारतीयों के नाम शामिल हैं। डॉ भरत वाटवाणी और सोनम वांगचुक। डॉ भरत वाटवाणी और उनकी पत्नी ने मानसिक रूप से बीमार लोगों का इलाज करने के उद्देश्य से 1988 में श्रद्धा पुनर्वास फाउंडेशन का गठन किया। इस संस्था का मुख्य कार्य ज्यादा से ज्यादा मानसिक तौर पर बीमार, सड़क की पटरी पर रह रहे लोगों को मुफ्त छत, भोजन और मनोवैज्ञानिक चिकत्सा प्रदान करने के साथ इन्हें इनके परिवार से दोबारा जोड़ना है। सोनम वांगचुक को प्रकृति, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है। 19 साल की उम्र से ही समाज सेवा कर रहे वांगचुक ने श्रीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग छात्र के तौर पर पढ़ते हुए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। सोनम वांगचुक ने 1988 में अपनी इंजीनियरिंग डिग्री हासिल की। सोनम वांगचुक की पहचान उत्तर भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की विशिष्ट व्यवस्था, सहयोगी और समुदाय संचालित सुधार के तौर पर रही है। वे लद्दाख में छात्रों के एक समूह द्वारा 1988 में स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक-निदेशक भी हैं। बता दें कि फिल्म 3 इडियट्स मे आमिर खान के फुनशुक वांगड़ू का किरदार वांगचुक पर ही आधारित है।

मैग्सेसे विजेताओं में अन्य चार नामों में कंबोडिया के युक चांग, फिलीपींस के होवार्ड डी, वियतनाम की वो थी होयांग येन और ईस्ट तिमोर की मारिया डि लुआरडेज मार्टिंनस क्रज शामिल हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की स्थापना फिलीपींस के राष्ट्रपति की 1957 में एक प्लेन क्रैश में हुई मौत के बाद की गई। यह पुरस्कार औपचारिक रूप से 31 अगस्त 2018 को फिलिपीन के सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा। रेमन मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन अध्यक्ष कारमेनसिता एबेला ने कहा कि विजेता स्पष्ट रूप से एशिया की उम्मीद के नायक हैं जिन्होंने अपने प्रयासों से समाज को आगे बढ़ाया है।

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