हर दिल अजीज कैबरे क्वीन सनसनी ‘हेलन’ का 79वां जन्मदिन आज

हेलन

याद होगा सत्तर के दशक का रेट्रो लुक, वो रंग-बिरंगी वेश-भूषा और उस वक़्त की अभिनेत्रियों जो बिल्कुल भारतीय परंपरागत पहनावों में नजर आती थी, किन्तु तभी एक ताजे हवा के झोंके की तरह कुशल नृत्यांगना ‘हेलन‘ का आगमन होता है, जो पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक नयी ट्रेंड स्थापित करती है एवं नृत्य की नई परिभाषा गढ़ती है।

उनके आगमन के पश्चात फिल्मो में पाश्चत्य सभ्यता की छाप लिए ‘कैबरे डांस’ का नया रूप भारतीय दर्शकों को देखने को मिला, जो कि उस वक़्त के लिहाज से काफी आधुनिक परिवेश में फिल्माया गए थे। उन पर फिल्माये गाने थियेटरों के अंदर का तापमान बढा देते थे, उनका बिंदास नृत्य करने का बिंदास अंदाज, कैमरे का सामना करने की हिचक को तोड़ती शैली से वो एक सनसनी बन गयी और हर उम्र के दर्शको को अपना दीवाना बना लिया। पश्चिमी सभ्यता की झलक लिए हुए बोल्डनेस को वो एक नई ऊंचाई पर ले गयी, कैमरे के सामने की हिचक तोड़ कर वो आत्मविश्वास से लबरेज ऒर बिंदास तरीके से नृत्य पेश करती हुई किसी भी भारतीय की ‘आह’ बन गयी। जैसे किसी भी खाने की किसी भी डिश को छौंक लगाने से वो ज्यादा चटपटा, स्वादिष्ट और बेहतर हो जाता है, उसी प्रकार बॉलीवुड की फिल्मों में ‘आइटम सॉन्ग’ रखने से फिल्मे दर्शको को आकर्षित करती है। जब बात ‘आइटम सॉन्ग’ या फिर ‘कैबरे डांसर’ की तो जहां में एक ही बात सख्शियत का ख्याल आता है और वो है ‘कैबरे क्वीन हेलन‘ का, लगभग 5 दशक से भी ज्यादा तक सुनहरे पर्दे पर तथा हर उम्र के जवां सोच पर, एकछत्र राज किया। बॉलीवुड में आइटम सॉन्ग या कैबरे डांसर का पर्यायवाची ही नही बनी बल्कि इस विधाओं को एक नयी उचाई पर ले गयी और इस सोच का एक चेहरा बनी।

हेलन का जन्म 21 नवंबर 1938 को बर्मा में हुआ था। इनके पिता एंग्लो-इंडियन और माँ बर्मीज थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पिता की मृत्यु होने के पश्चात हेलन का पूरा ओरिवार मुम्बू आ बसा। हेलन को स्कूल छोड़ने पड़ा क्योंकि घर-परिवार की माली हालत ऐसे थे कि उनकी माँ जोबकी नर्स थी का वेतन पर्याप्त नही था। 19 वर्ष की अवस्था मे हेलन को बड़ा ब्रेक 1957 में ‘हावड़ा ब्रिज’ के रूप में मिला। इस फीम में उन पर फिल्माया गाना ‘मेरा नाम चीन चीन चु.’ काफी लोकप्रिय हुआ। 60वें दशक के अंत और 70वें दशक के शुरुआती समय मे हेलन का डांस और मशहूर गायिका आशा भोंसले की आवाज़ की जोड़ी ने कितने ही सफल गाने फ़िल्म इंडस्ट्री को दिए। आ जाने जा…(इंतकाम-1969), पिया तू अब तो आ जा…(कारवां, 1971), महबूबा हो महबूबा…(शोले, 1975) आदि न जाने कितने ही सुपरहिट एवं कर्णप्रिय गाने उनके नाम पर दर्ज है। उन्होंने कैमरे के सामने की हिचक ही नही तोड़ी बल्कि एक नए बिंदास अंदाज से सामने आई। अपने दौर में हर उम्र वर्ग के लोगो की ‘फैंटसी’ बन चुकी, क्या युवा से लेकर प्रौढ़ सभी उनके फैन थे। शोले में उनपर फिल्माया गाना ‘महबूबा हो महबूबा…‘ ने उन्हें हर लोग की ज़ुबान पर उनका नाम चढ़ गया। उन्होंने डांस के अलावा कुछ फिल्मों में अभिनय भी किया है, शक्ति, पागल कही का आदि। 1979 में महेश भट्ट की फ़िल्म’लहू के दो रंग’ के लिए इन्हें फ़िल्मफ़ेअर का सर्वश्रेष्ठ सह अभनेत्री का अवार्ड तथा 1999 में फ़िल्मफ़ेअर का ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ भी मिल चुका है। 2009 में उन्हें ऐश्वर्या राय,अक्षय कुमार के साथ ही ‘पद्म श्री’ सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

उन्होंने फिल्मो से सन्यास 1983 में ही ले लिया था किंतु उसके बाद भी उन्होंने कुछ फिल्मो में अतिथि भूमिकाएं की है, 1996 में आई ‘खमोशी- द म्यूजिकील’, 2000 मे आई ‘मोहब्बतें’ और उन्होंने अपने वास्तिवक जीवन के पुत्र सलमान खान की मा का किरदार भी ‘हम दिल दे चूके सनम’ में निभा चुकी है। 2006 में प्रदर्शित फिल्म ‘हमको दीवाना कर गए’ में भी नजर आयी थी।

एक ओर जहाँ पेशेवर जीवन मे उन्होंने सफलता की बुलंदी तक का सफर किया वहीं दूसरी ओर उनका व्यक्तिगत जीवन बहुत ही त्रासदीपूर्ण रहा। अपने करियर के शुरुआती दिनों के निर्माता पी एन अरोड़ा के साथ उनका रिश्ता ज्यादा दिन नही टिका। शुरुआती दिन तो सही से गुजरे उसके बाद तकरार और पैसे की लेन-देन को लेकर बढ़ते तकरार का नतीजा 1974 मे रिश्ते के अंत से हुआ। अपने व्यक्तिगत जिंदगी में आये इस तूफान के साथ-साथ उन्हें अपने पेशेवर जीवन में बढ़ती प्रतियोगिता से भी दो-चार होना पड़ा। इस दौरान उनका नाम कुछ और भी लोगो से जुड़ा किन्तु स्थायित्व उन्हें मिला फ़िल्म स्क्रिप्ट लेखक सलीम खान सलीम, हेलन को पहले से जानते थे, पहले से शादीशुदा सलीम ने इस मुसीबत के वक़्त उन्होंने हेलन का हाथ बखूबी थामा और अपने परिवार का सदस्य बनाते हुए इज़्ज़त दी। शुरुआती हिचक के बाद खान परिवार ने भी उन्हें अपने परिवार में एक सदस्य के रूप में स्वीकार किया। बाद में फिर सलीम और हेलन ने ‘अर्पिता‘ को गोद लिया।

हिंदी सिनेमा में 60-70 का दशक अगर किसी की बिंदास अंदाज, बोल्डनेस के लिए याद किया जाता है, तो वो नाम है ‘हेलन’, न सिर्फ बोल्डनेस बल्कि अपनी सजीव कैबरे डांस से भी उन्होंने दर्शकों का दिल जीता, आलोचकों का ध्यान खींचा, कई अवॉर्ड हासिल किए, लेकिन जब भी उनकी चर्चा हुई, उस पर निजी जिंदगी से जुड़े विवादों का साया हमेशा मंडराता रहा। आज उनके 79वें जन्मदिन पर हम उनके बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करते हुए उन्हें धन्यवाद कहना चाहते है क्योंकि उनके बिना भारतीय फिल्म का ‘कैबरे डांस’ और ‘आइटम सांग्स’ वाला अध्याय पूर्ण नही हो पाता।

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