गूगल ने डूडल के जरिए ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता महान कवियत्री महादेवी वर्मा को याद किया

   वे भारत की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक हैं, उन्हें आधुनिक ‘मीरा’ भी कहा जाता है, कवि निराला ने तो उन्हें ‘हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती’ भी कहा है। हाँ, बिल्कुल सही, उनका नाम हैं, महादेवी वर्मा। सर्च ईंजन गूगल ने भारत की महान कवियत्री, स्वतंत्रता सेनानी, महिला अधिकारों की लड़ाई वाली कार्यकर्ता और शिक्षाविद महादेवी वर्मा को डूडल के जरिए सलाम किया है। इस डूडल में महान कवयित्री को हाथों में डायरी और कलम लिए अपने विचारों में खोया हुआ दिखाया गया है। इस गूगल के डूडल को कलाकार सोनाली ज़ोहरा ने बनाया है। 

    इस महान कवियित्री का जन्म 26 मार्च 1907 उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद में हुआ। इन्हें घर की देवी मानते हुए, माता-पिता ने इनका नाम महादेवी रखा। उनके पिता एक कॉलेज में प्राध्यापक थे और उनकी माता का नाम हेमरानी देवी था। इन दोनों ने ही अपनी बेटी को शिक्षा हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। महादेवी वर्मा का बाल विवाह हुआ था। सन 1916 में महज 9 साल की उम्र में उनका विवाह बाबा श्री बांके विहारी से हुआ था।

     महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। उन्होंने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा हैं और उसके बाद का भी। जिसका असर उनकी हर एक रचना में हैं। उनका साहित्य के क्षेत्र में योगदान इतना अधिक है, कि 1956 में भारत सरकार ने उन्हें उनकी साहित्यिक सेवा के लिये ‘पद्म भूषण’ की उपाधि दी।  1988 में उन्हें मरणोपरांत भारत सरकार की पद्म विभूषण उपाधि से सम्मानित किया गया। ‘यामा’ नामक काव्य संकलन के लिये 27 अप्रैल 1982 को उन्हें भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ। महादेवी वर्मा ने मुख्य रूप से कविताएं लिखीं। उनकी कहानियों और रेखाचित्रों के संकलन, ‘अतीत की रेखाएं’ में उनके वो अनुभवों सामने आए हैं, जो महिला स्कूल की प्रधानाचार्या होने के नाते उन्हें हुए। महादेवी का कार्यक्षेत्र लेखन, संपादन और अध्यापन रहा। वे हिंदी साहित्य में रहस्यवाद की प्रवर्तिका भी मानी जाती हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए बहुत काम किया। जिसका असर उनकी सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं में देखने को मिलता है। उन्होंने ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्यगीत’, ‘दीपशिखा’, ‘सप्तपर्णा’, ‘प्रथम आयाम’ और ‘अग्निरेखा’ जैसे काव्य संग्रहों का निर्माण किया है। उनके रेखाचित्र ‘अतीत के चलचित्र’ और ‘स्मृति की रेखाएं’ काफी लोकप्रिय हैं। महादेवी वर्मा का कहानी संग्रह ‘गिल्लू’ तो बहुत ही लोकप्रिय है। वे भारत की 50 सबसे यशस्वी महिलाओं में भी शामिल हैं। 11 सितंबर 1987 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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