शशि एक सितारा

4 दिसंबर 2017 का वह मनहूस दिन जब बॉलीवुड को फिर अपना एक अनमोल रतन खोना पड़ा। हम बात कर रहे हैं पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे बलबीर पृथ्वीराज कपूर की, जो शशि कपूर के नाम से असंख्य दिलों में बसे हुए हैं। वैसे देखा जाए तो बलबीर को शशि कहना ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि यह नाम उन पर पूरी तरह फिट बैठता है। शशि का अर्थ होता है चांद और शशि साहब के चांद जैसे चेहरे ने 60-70 के दशक में न जाने कितनी लड़कियों के दिलों में एकाधिकार जमा लिया था। यह नाम इसलिए भी सही कहा जा सकता है क्योंकि इससे उनके शीतलता भरे व्यवहार का भी पता चलता है। उस ज़माने में जब, शशि कपूर बॉलीवुड के दूसरे सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाले नायक थे तब वह हमेशा अपने निर्माताओं की तकलीफ को समझा करते थे और कई दफा आर्थिक मदद करने के लिए भी आगे आते थे।

शशि कपूर ने बचपन से ही अभिनय को अपना सब कुछ मान कर इसमें कदम रख दिया था और ‘आग’ और ‘आवारा’  जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी अदा का जलवा बिखेरा था । शशि कपूर की पहली फिल्म थी – धर्मपुत्र, जिसमें वे मुख्य किरदार में थे। इसके बाद उन्होंने 116 फिल्मों में अपने अभिनय का योगदान दिया 60, 70 और मध्य 80 के दशक में जब राजेश खन्ना जैसे अदाकार अपनी अदाओं से हसीनाओं को कायल किए हुए थे तभी शशि कपूर जैसा अभिनेता अपने अभिनय की संजीदगी से चुपके चुपके हसीनाओं के सपनों में अपना हक जमा रहा था। शशि कपूर ने खुद को केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित ना रखते हुए अंग्रेजी फिल्मों में भी  अपने अभिनय का जलवा बिखेरा । जिसमें ‘द हाउस होल्डर’ और ‘शेक्सपियर वल्लाह’  जैसी बेहतरीन फिल्में शामिल हैं ।

छोटी आँखे, माथे से चिपके हुए बाल और जादूगर मुस्कान बिखेरने वाले होठ न केवल लड़कियों का ही बल्कि उस ज़माने की बेहतरीन अभिनेत्रियों का भी नशा हुआ करते थे । जिसमें शर्मिला टैगोर और नंदा जैसी उस ज़माने की बेहतरीन अभिनेत्री शामिल हैं। शशि के लिए शर्मिला की दीवानगी बयां करने वाला एक बेहतरीन किस्सा भी है। कहा जाता है शर्मिला ‘कश्मीर की कली’ फिल्म का एक गाना शम्मी कपूर के साथ शूट कर रही थी, जब अचानक शशि वहाँ सेट पर पहुंचते हैं और शर्मिला का पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। अंत में निर्देशक को शशि कपूर से सेट छोड़कर जाने तक का आग्रह करना पड़ा ताकि गाना फ़िल्माया जा सके क्योंकि शर्मिला अभिनय में अपना ध्यान नहीं लगा पा रही थीं।

कपूर खानदान में शशि इकलौते ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने 61 फिल्मों में मुख्य किरदार के तौर पर अभिनय किया है। इस दौर में उनके भतीजे ऋषि, रणधीर और राजीव भी उनसे पीछे हैं।

जिस चाँद को देख हजारों दिल खुदा से उसे इबादत में माँगते हैं वह भी किसी को पाने की हसरत रखता है। हम बात कर रहे हैं उनकी प्रेमिका जेनिफर केंडल की जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनी। शशि से जेनिफर की मुलाकात 1956 में , कलकत्ता में हुई थी। आगे चलकर दोनों शादी के पवित्र बंधन में भी बंध गए। शशि ने जेनिफर से मात्र 20 वर्ष की आयु में ही विवाह कर लिया था।

हालाँकि किसी के लिए इससे बड़ा सम्मान नहीं हो सकता कि हजारों दिल उसे हर रोज याद करते हैं मगर फिर भी शशि कपूर ने अपनी अदाओं से अनेको सम्मान अपने नाम किये हैं, जिसमें भारत सरकार द्वारा प्रदत्त पद्मभूषण सम्मान और दादा साहब फाल्के जैसे अजीज़ सम्मान शामिल हैं। शशि कपूर के सम्मान में ओमान देश के मुस्कात शहर में उनके नाम एक फिल्म त्योहार भी 2007 में मनाया गया था। भले ही सिनेमा का यह नायक कहने को इस दुनिया से चला गया हो मगर आज भी ‘मेरे पास मां है’ की आवाज़  हमारे कानों में गूँजती है। और एहसास दिलाती है कि शशि, एक सितारा है जो हमेशा आसमान में दिखाई देता रहेगा और हमारे दिलों पर राज करेगा। शशि अमर हैं!

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