अय्यर साहब ने एक बार फिर बटोरी सुर्खियाँ

राजनीति की परिभाषा जो अरस्तु देकर गए थे, उससे बिल्कुल अलग हो चुकी है मौजूदा वक्त की राजनीति। आज की राजनीति केवल बेहूदा बयानों तक सीमित हो चुकी है और हो भी क्यों न? आखिर इससे कम लागत में अधिक मुनाफ़ा जो प्राप्त होता है। सस्ते सस्ते बयानों से आप जनता का आकर्षण प्राप्त कर लेते हैं , वो भी बिल्कुल काम समय मे । ख़ैर छोड़िये , राजनीति का स्तर कितना भी क्यों न गिर जाए इस पर चर्चा तो होती रहेगी, आखिर हमारा देश लोकतांत्रिक जो ठहरा ।

गुजरात मे चुनाव दस्तक दे रहे हैं और इसी बीच काँग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी ने देश को चर्चा का विषय दे दिया है । वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर यूपी.पी.ए. की सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं और इस से पूर्व में भी अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। चाहे वो वर्ष 2000 में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव पर हो , या 2004 में जिन्नाह और सावरकर पर या फिर 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी पर , अय्यर साहब ने सुर्खियाँ बटोरने में कभी कमी नहीं की ।पूर्व की तरह ही इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ और इन्होंने कह दिया कि नरेंद्र मोदी जैसा नीच आदमी इन्होंने आज तक नही देखा । हालाँकि विवाद बढ़ने के बाद में अपनी सफाई देते हुए यह कहा कि इसके लिए उनका कमज़ोर हिंदी भाषा ज्ञान ज़िम्मेदार है । जिसकी वजह से वे सही शब्द चयन नहीं कर पाए , यदि बावजूद इसके किसी को आपत्ति है तो मैं अपने कथन के लिए माफ़ी मांगता हूं । मगर इनका क्षमा प्रार्थना किसी काम की नहीं रही क्योंकि चुनावी मौसम में तो हर नेता अपनी छवि को लेकर सबसे ज़्यादा चिंतित रहता है और इसी चिंता में काँग्रेस मुखिया राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर दिया।

लेकिन सवाल उठता है – क्या सच में काँग्रेस का यह फैसला मतदाताओं के ऊपर अच्छी छाप छोड़ेगा ? क्योंकि आज गिरती हुई काँग्रेस पार्टी को उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है और काँग्रेस के दिग्गज नेता को इस तरह पार्टी से निकाल कर वह कार्यकर्ताओं के उत्साह को कम कर रही है । और यदि सच में पार्टी ने यह फैसला बयान की अभद्रता को ध्यान में रख कर लिया है तो ऐसा पहली बार तो हुआ नहीं जब मणिशंकर अय्यर जी ने ऐसे बयान दिए हों । उन्होंने तो कई दफ़ा अभद्रता की हदें पार की हैं तो फिर उस समय यह फैसला क्यों नही लिया गया ? वैसे बेतुके बयानों की दौड़ में बीजेपी नेता भी पीछे नहीं हैं । बयानों की लिस्ट काफ़ी लंबी है । वैसे भी चुनावी मौसम में ऐसे बयानों की आदत तो जनता को भी है ।

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