उपेंद्र कुशवाहा ने कॉलेजियम को बताया “लोकतंत्र पर धब्बा”

केंद्र सरकार के नेशनल जज अपॉइंटमेंट कमीशन का खाका पेश कर के न्यायपालिका में लोकतान्त्रिक चुनाव को प्रोत्साहित करने हेतु पेश किया जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसको सिरे से खारिज कर दिया था वह भी यह बताते हुए कि इससे उसकी ऑटोनोमी पर असर पड़ेगा| सरकार द्वारा नया तंत्र बनाने का आश्वासन था लेकिन जब से 4 वरिष्ठम जजों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ जनता के समक्ष मोर्चा खोला है तब से कॉलेजियम सिस्टम की पुनः आलोचना प्रारम्भ हो चुकी है| 

इसी सिलसिले में मोदी सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में एक कार्यक्रम के दौरान कॉलेजियम की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र पर एक धब्बा करार दिया| उन्होंने कहा – “लोग आरक्षण का विरोध करते है क्योंकि उसके कारण मेरिट अवेहलना होती है लेकिन मैं समझता हूँ कि कॉलेजियम में योग्यता की अनदेखी होती है| 

एक चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है ,एक मछुआरे का बेटा वैज्ञानिक और बाद में देश का राष्ट्रपति बन सकता है लेकिन ,क्या एक नौकरानी का बेटा जज बन सकता है ? बता दें यह बयान तब सामने आया है जब पिछले सप्ताह ही कॉलेजियम द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की सिफारिश की है| इनमें उत्तरखंड के मुख्य न्यायधीश के.एम जोसेफ के नाम पर मामला गरमाया हुआ था|  

कुशवाहा ने आगे बढ़ते हुए एक और आरोप लगाया कि जज अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करते है| उन्होंने कहा -“जजों के इस रैवये से ऐसा प्रतीत होता है कि वह अगले जज की नियुक्ति करने के बजाये अपने उत्तराधिकारी का चयन करते है| ऐसी व्यवस्था की क्या ज़रुरत है?”| गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2015 में असंवैधानिक करार दिया था उस पीठ में केवल जस्टिस चेलामेश्वर ने इसका समर्थन किया था| 

इस बयान के बाद विपक्ष का सरकार हमला होना तय है ऐसे में कुशवाहा खुद इस पर सफाई देंगे या सरकार उनको डिफेंड यह देखना ख़ास होगा क्योंकि आरएलएसपी और भाजपा के बीच रिश्ते कुछ मधुर नहीं चल रहे है इसलिए सरकार द्वारा इस बयान के खंडन किये जाने की उम्मीद ज्यादा है| 

 

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